मोहन भागवत के जेन-Z बयान पर सपा का पलटवार: युवा चुनौतियों से घबराई है सरकार, UPI शुल्क पर भी निशाना
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने 7 अगस्त 2026 को संसद परिसर में एक साथ कई मोर्चों पर केंद्र सरकार को घेरा — कराधान संशोधन विधेयक, UPI भुगतान पर संभावित शुल्क, और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की जेन-Z पीढ़ी को लेकर की गई टिप्पणी — इन सभी पर विपक्ष ने तीखे सवाल उठाए। सपा की यह प्रेस वार्ता ऐसे समय में आई जब संसद का मानसून सत्र कई अहम विधेयकों पर गहमागहमी के बीच चल रहा है।
कराधान विधेयक पर सपा का आरोप
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता जनता को राहत देना नहीं, बल्कि उन पर आर्थिक बोझ बढ़ाना है। उन्होंने कहा, 'अब तक ऐसा कोई कानून नहीं बनाया गया जो आम जनता के हित में हो।' उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य लोगों की जेब से अधिक से अधिक पैसा निकालना और बाद में उसे विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 'रेवड़ियों' के रूप में बाँटना है।
UPI शुल्क की चर्चा पर सवाल
UPI भुगतान पर संभावित शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं पर भी राम गोपाल यादव ने सरकार की मंशा को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है जिनसे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। उनका आरोप था कि सरकार का ध्यान उत्पादक कार्यों के बजाय राजस्व बढ़ाने और अधिक वसूली पर केंद्रित है। गौरतलब है कि UPI पर शुल्क की संभावना को लेकर हाल के हफ्तों में व्यापक सार्वजनिक बहस छिड़ी हुई है।
भागवत के जेन-Z बयान पर सपा का पलटवार
RSS प्रमुख मोहन भागवत की जेन-Z पीढ़ी और उनके आंदोलनों को लेकर की गई टिप्पणी पर राम गोपाल यादव ने कहा कि भाजपा सरकार युवाओं से मिल रही चुनौतियों को लेकर चिंतित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार राजनीतिक रूप से दबाव में आती है, तब वह RSS की ओर रुख करती है और उससे रास्ता निकालने या अपनी ओर से बयान देने की अपेक्षा करती है।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने इसी मुद्दे पर कहा कि यदि RSS प्रमुख युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों की सीख दे रहे हैं, तो उन्हें पहले अपनी ही सरकार को इस सलाह का पालन करने के लिए कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार है। अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि अपनी माँगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कई स्थानों पर लाठीचार्ज, आँसू गैस और गोलीबारी जैसी कार्रवाई की गई, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
महिला आरक्षण और छात्र आंदोलन पर सपा की माँग
अवधेश प्रसाद ने महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन में देरी पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पहले ही संसद से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, लेकिन सरकार इसे लागू करने में देरी कर रही है और जिम्मेदारी विपक्ष पर डालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने माँग की कि सरकार इस कानून को जल्द लागू करे ताकि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का लाभ मिल सके।
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े छात्रों के आंदोलन पर भी अवधेश प्रसाद ने कहा कि चाहे छात्र झारखंड के हों, उत्तर प्रदेश, राजस्थान या किसी अन्य राज्य के — सभी देश का भविष्य हैं। उनका आरोप था कि युवाओं की समस्याएँ लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार उनके समाधान के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखा रही।
शून्यकाल में व्यवधान पर विपक्ष की आपत्ति
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील पर अवधेश प्रसाद ने कहा कि विपक्ष भी सदन को व्यवस्थित ढंग से चलाने का पक्षधर है, लेकिन सांसदों को शून्यकाल (ज़ीरो आवर) के दौरान अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उनका आरोप था कि शून्यकाल में भी व्यवधान उत्पन्न किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर संसद के भीतर और बाहर बहस तेज होने की संभावना है।