यूपीआई शुल्क विवाद: भाजपा का पलटवार — '96% P2M लेन-देन पर कोई चार्ज नहीं, कांग्रेस फैला रही भ्रम'
सारांश
मुख्य बातें
यूपीआई शुल्क के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच 16 सितंबर को बयानबाज़ी तेज़ हो गई, जब भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का सीधा आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की माँग की थी, जिसके जवाब में भाजपा नेताओं ने नई व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर इसका कोई सीधा बोझ नहीं पड़ेगा।
मुख्य घटनाक्रम
राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस पहले भी छोटे कर्मचारियों, रेहड़ी-पटरी वालों, ठेले वालों और छोटे टैक्सी ऑपरेटरों के बीच यह कहकर डर पैदा करने की कोशिश कर चुकी है कि उन पर सर्विस चार्ज लगाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छोटे लेन-देन पर किसी अतिरिक्त शुल्क का असर नहीं पड़ेगा और बड़े लेन-देन के मामले में 0.4 प्रतिशत शुल्क का प्रावधान है।
राठौड़ ने यूसीसी (समान नागरिक संहिता) का भी उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान में इस संबंध में विधेयक पेश किया जा चुका है और 'एक देश, एक कानून' होना चाहिए — सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलने चाहिए।
भाजपा नेता जफर इस्लाम की सफाई
भाजपा नेता जफर इस्लाम ने यूपीआई शुल्क ढाँचे को विस्तार से समझाते हुए कहा कि इसके दो अलग पहलू हैं — उपभोक्ता (Consumer) और व्यापारी (Merchant)। उनके अनुसार, व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यानी उपभोक्ता-से-उपभोक्ता लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं है।
इस्लाम ने बताया कि ₹2,000 तक के व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) भुगतान और जीरो-एमडीआर व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले छोटे व्यापारियों के लेन-देन पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा। उन्होंने दावा किया कि 96 प्रतिशत P2M लेन-देन इस नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।
₹2,000 से अधिक के निर्धारित व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर (MDR) लागू होगा। बीमा, रेलवे टिकट और कुछ अन्य आवश्यक सेवाओं पर निर्धारित शुल्क व्यापारी स्तर पर लागू होगा — न कि उपभोक्ता पर सीधे।
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार के नए फैसले से उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से यूपीआई पर लगाए गए शुल्क को वापस लेने की माँग की है। हालाँकि, भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे की तकनीकी बारीकियाँ जानते हुए भी जनता में भ्रम फैला रहा है।
आम जनता और व्यापारियों पर असर
यूपीआई भारत की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली है और करोड़ों छोटे व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले और आम नागरिक इस पर निर्भर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में डिजिटल लेन-देन की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और किसी भी शुल्क बदलाव का व्यापक असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि भाजपा के दावों के अनुसार, छोटे और मझोले व्यापारियों तथा आम उपभोक्ताओं को इस बदलाव से प्रत्यक्ष रूप से कोई नुकसान नहीं होगा। बड़े व्यापारिक लेन-देन पर ही शुल्क लागू होगा और वह भी व्यापारी स्तर पर।
क्या होगा आगे
यूपीआई शुल्क विवाद आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि दोनों दल इसे जनता के बीच अपने-अपने नज़रिये से पेश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को शुल्क ढाँचे की स्पष्ट और सरल व्याख्या जनता के सामने रखनी होगी, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।