UPI पर MDR: ₹2,000 से बड़े ट्रांजैक्शन पर शुल्क से डिजिटल पेमेंट और मजबूत होगा — BillDesk को फाउंडर
सारांश
मुख्य बातें
BillDesk के निदेशक एवं सह संस्थापक श्रीनिवासु एमएन ने 16 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा कि सरकार का ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का प्रस्तावित कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था आम उपभोक्ताओं या छोटे व्यापारियों पर वित्तीय बोझ डालने के लिए नहीं, बल्कि पेमेंट नेटवर्क के विस्तार और तकनीकी निवेश को संसाधन देने के उद्देश्य से है।
MDR का दायरा और उपभोक्ताओं पर असर
श्रीनिवासु एमएन ने स्पष्ट किया कि सामान्य उपभोक्ताओं के लिए UPI पेमेंट पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। उन्होंने कहा, "सामान्य उपभोक्ता के लिए UPI पूरी तरह मुफ्त रहेगा और छोटे मूल्य के व्यापारिक लेनदेन पर भी कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।" MDR केवल कुछ चुनिंदा ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, और इससे प्राप्त संसाधनों का उपयोग UPI नेटवर्क के विस्तार तथा तकनीकी उन्नयन के लिए किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, यूटिलिटी बिल, सरकारी कर भुगतान, बीमा प्रीमियम और ईंधन भुगतान जैसे नियमित लेनदेन के लिए रियायती शुल्क व्यवस्था रखी गई है। BillDesk को फाउंडर के अनुसार, यह संतुलित मॉडल एक ओर डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करेगा और दूसरी ओर भुगतान सेवा प्रदाताओं को निवेश के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगा।
निवेश और नेटवर्क विस्तार की आवश्यकता
श्रीनिवासु एमएन ने कहा कि UPI की सफलता के पीछे बैंकों, वित्तीय संस्थानों और पूरे डिजिटल भुगतान उद्योग द्वारा किया गया व्यापक निवेश है। उन्होंने कहा, "डिजिटल भुगतान का अगला चरण केवल उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होगा। इसके लिए साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम तंत्र, ग्राहक शिक्षा और उन्नत तकनीकी ढाँचे पर भी लगातार निवेश करना होगा।"
उन्होंने आगे बताया कि MDR से प्राप्त संसाधनों का एक हिस्सा एक विशेष कोष के निर्माण में लगाया जाएगा, जिसका उद्देश्य छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना और UPI को देश के अधिकाधिक हिस्सों तक पहुँचाना होगा।
भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति: वैश्विक संदर्भ
BillDesk को फाउंडर ने कहा कि भारत आज रिटेल डिजिटल भुगतान के मामले में दुनिया का अग्रणी देश बन चुका है। उनके अनुसार, दुनिया के 50 प्रतिशत से अधिक रिटेल डिजिटल लेनदेन भारत में होते हैं। यह आँकड़ा देश की डिजिटल भुगतान क्रांति की असाधारण सफलता को रेखांकित करता है।
गौरतलब है कि UPI इस समय लगभग 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुँच चुका है, जो भारत की कुल आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार और उद्योग दोनों ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान की पहुँच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
आगे क्या: विस्तार की संभावनाएँ
श्रीनिवासु एमएन ने कहा कि भारत में डिजिटल भुगतान के विस्तार की बड़ी संभावनाएँ अभी भी बची हुई हैं। 50 करोड़ मौजूदा उपयोगकर्ताओं के बावजूद, देश की शेष दो तिहाई आबादी को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाना बाकी है। आने वाले वर्षों में करोड़ों नए उपभोक्ताओं और कारोबारियों को इस प्रणाली से जोड़ने की गुंजाइश बनी हुई है, जो MDR से प्राप्त निवेश से और आसान हो सकती है।