16 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

UPI पर MDR: ₹2,000 से बड़े ट्रांजैक्शन पर शुल्क से डिजिटल पेमेंट और मजबूत होगा — BillDesk को फाउंडर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
UPI पर MDR: ₹2,000 से बड़े ट्रांजैक्शन पर शुल्क से डिजिटल पेमेंट और मजबूत होगा — BillDesk को फाउंडर

सारांश

BillDesk के को फाउंडर श्रीनिवासु एमएन का कहना है कि ₹2,000 से बड़े UPI ट्रांजैक्शन पर MDR आम उपभोक्ता पर बोझ नहीं — यह डिजिटल पेमेंट के अगले चरण के लिए ज़रूरी निवेश का रास्ता है। भारत पहले से ही दुनिया के 50% रिटेल डिजिटल लेनदेन का केंद्र है, और अभी दो तिहाई आबादी जुड़नी बाकी है।

मुख्य बातें

BillDesk के सह संस्थापक श्रीनिवासु एमएन ने 16 सितंबर 2026 को कहा कि ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करना डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करेगा।
सामान्य उपभोक्ताओं के लिए UPI पूरी तरह निःशुल्क रहेगा; छोटे मूल्य के लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं।
यूटिलिटी बिल, सरकारी कर, बीमा प्रीमियम और ईंधन भुगतान पर रियायती शुल्क व्यवस्था प्रस्तावित।
MDR से प्राप्त संसाधन साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और छोटे व्यापारियों के लिए विशेष कोष में लगाए जाएँगे।
भारत में दुनिया के 50% से अधिक रिटेल डिजिटल लेनदेन; UPI 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुँचा, लेकिन दो तिहाई आबादी अभी भी बाहर।

BillDesk के निदेशक एवं सह संस्थापक श्रीनिवासु एमएन ने 16 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा कि सरकार का ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का प्रस्तावित कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था आम उपभोक्ताओं या छोटे व्यापारियों पर वित्तीय बोझ डालने के लिए नहीं, बल्कि पेमेंट नेटवर्क के विस्तार और तकनीकी निवेश को संसाधन देने के उद्देश्य से है।

MDR का दायरा और उपभोक्ताओं पर असर

श्रीनिवासु एमएन ने स्पष्ट किया कि सामान्य उपभोक्ताओं के लिए UPI पेमेंट पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। उन्होंने कहा, "सामान्य उपभोक्ता के लिए UPI पूरी तरह मुफ्त रहेगा और छोटे मूल्य के व्यापारिक लेनदेन पर भी कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।" MDR केवल कुछ चुनिंदा ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, और इससे प्राप्त संसाधनों का उपयोग UPI नेटवर्क के विस्तार तथा तकनीकी उन्नयन के लिए किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, यूटिलिटी बिल, सरकारी कर भुगतान, बीमा प्रीमियम और ईंधन भुगतान जैसे नियमित लेनदेन के लिए रियायती शुल्क व्यवस्था रखी गई है। BillDesk को फाउंडर के अनुसार, यह संतुलित मॉडल एक ओर डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करेगा और दूसरी ओर भुगतान सेवा प्रदाताओं को निवेश के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगा।

निवेश और नेटवर्क विस्तार की आवश्यकता

श्रीनिवासु एमएन ने कहा कि UPI की सफलता के पीछे बैंकों, वित्तीय संस्थानों और पूरे डिजिटल भुगतान उद्योग द्वारा किया गया व्यापक निवेश है। उन्होंने कहा, "डिजिटल भुगतान का अगला चरण केवल उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होगा। इसके लिए साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम तंत्र, ग्राहक शिक्षा और उन्नत तकनीकी ढाँचे पर भी लगातार निवेश करना होगा।"

उन्होंने आगे बताया कि MDR से प्राप्त संसाधनों का एक हिस्सा एक विशेष कोष के निर्माण में लगाया जाएगा, जिसका उद्देश्य छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना और UPI को देश के अधिकाधिक हिस्सों तक पहुँचाना होगा।

भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति: वैश्विक संदर्भ

BillDesk को फाउंडर ने कहा कि भारत आज रिटेल डिजिटल भुगतान के मामले में दुनिया का अग्रणी देश बन चुका है। उनके अनुसार, दुनिया के 50 प्रतिशत से अधिक रिटेल डिजिटल लेनदेन भारत में होते हैं। यह आँकड़ा देश की डिजिटल भुगतान क्रांति की असाधारण सफलता को रेखांकित करता है।

गौरतलब है कि UPI इस समय लगभग 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुँच चुका है, जो भारत की कुल आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार और उद्योग दोनों ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान की पहुँच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

आगे क्या: विस्तार की संभावनाएँ

श्रीनिवासु एमएन ने कहा कि भारत में डिजिटल भुगतान के विस्तार की बड़ी संभावनाएँ अभी भी बची हुई हैं। 50 करोड़ मौजूदा उपयोगकर्ताओं के बावजूद, देश की शेष दो तिहाई आबादी को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाना बाकी है। आने वाले वर्षों में करोड़ों नए उपभोक्ताओं और कारोबारियों को इस प्रणाली से जोड़ने की गुंजाइश बनी हुई है, जो MDR से प्राप्त निवेश से और आसान हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हर बार राजनीतिक दबाव में इसे वापस लिया गया। BillDesk जैसी कंपनियाँ जो इस इकोसिस्टम की मुख्य लाभार्थी हैं, उनका MDR का समर्थन करना स्वाभाविक है, लेकिन असली सवाल यह है कि इस शुल्क से प्राप्त राजस्व किस पारदर्शी तंत्र से छोटे व्यापारियों और ग्रामीण विस्तार पर खर्च होगा। 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं के बाद का विस्तार अधिक कठिन और महँगा होगा — ग्रामीण भारत में कनेक्टिविटी, डिजिटल साक्षरता और विश्वास की कमी असली चुनौती है, जिसे MDR अकेले हल नहीं कर सकता।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UPI पर MDR क्या है और यह कब से लागू होगा?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर भुगतान करते हैं। सरकार के प्रस्तावित कदम के तहत यह केवल ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर लागू होगा; लागू होने की तिथि की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
क्या आम UPI उपयोगकर्ताओं को MDR देना होगा?
नहीं। BillDesk के सह संस्थापक श्रीनिवासु एमएन के अनुसार, सामान्य उपभोक्ताओं के लिए UPI पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। MDR का भार व्यापारियों पर होगा और वह भी केवल ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा लेनदेन पर।
MDR से प्राप्त राजस्व का उपयोग कैसे होगा?
BillDesk को फाउंडर के अनुसार, इस राजस्व का उपयोग UPI नेटवर्क के तकनीकी विस्तार, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान से जोड़ने के लिए एक विशेष कोष बनाने में किया जाएगा।
क्या यूटिलिटी बिल या सरकारी भुगतान पर भी MDR लगेगा?
यूटिलिटी बिल, सरकारी कर भुगतान, बीमा प्रीमियम और ईंधन भुगतान जैसे नियमित लेनदेन के लिए रियायती शुल्क व्यवस्था रखी गई है, यानी इन पर पूर्ण MDR नहीं लगेगा।
भारत में UPI की मौजूदा स्थिति क्या है और आगे क्या संभावना है?
UPI अभी लगभग 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुँच चुका है और भारत दुनिया के 50% से अधिक रिटेल डिजिटल लेनदेन का केंद्र है। हालाँकि, देश की कुल आबादी का लगभग दो तिहाई हिस्सा अभी भी इस प्रणाली से बाहर है, जो भविष्य में विस्तार की बड़ी संभावना दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 20 मिनट पहले
  2. 5 घंटे पहले
  3. 6 घंटे पहले
  4. 8 घंटे पहले
  5. 20 घंटे पहले
  6. 23 घंटे पहले
  7. कल
  8. 1 महीना पहले