UPI पर MDR: ₹2,000 से बड़े लेनदेन पर शुल्क से डिजिटल पेमेंट होगा मजबूत — BillDesk को-फाउंडर
सारांश
मुख्य बातें
डिजिटल भुगतान क्षेत्र की अग्रणी कंपनी BillDesk के सह-संस्थापक एवं निदेशक श्रीनिवासु एमएन ने 16 सितंबर को कहा कि ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का सरकारी निर्णय भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम आम उपभोक्ताओं या लघु व्यापारियों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय दबाव डालने के लिए नहीं, बल्कि पेमेंट नेटवर्क में नए निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
MDR की संरचना और दायरा
श्रीनिवासु एमएन ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं के लिए UPI पेमेंट पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। छोटे मूल्य के व्यापारिक लेनदेन पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा। MDR केवल ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा लेनदेन पर लागू होगा, और इससे प्राप्त संसाधनों का उपयोग UPI नेटवर्क के विस्तार तथा तकनीकी उन्नयन में किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि यूटिलिटी बिल, सरकारी कर भुगतान, बीमा प्रीमियम और ईंधन भुगतान जैसी नियमित आवश्यकताओं के लिए रियायती शुल्क व्यवस्था बनाए रखी गई है। उनके अनुसार यह संतुलित मॉडल एक ओर डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करेगा और दूसरी ओर भुगतान सेवा प्रदाताओं को निवेश के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगा।
UPI की मौजूदा स्थिति और विस्तार की संभावना
BillDesk के सह-संस्थापक ने बताया कि UPI आज लगभग 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुँच चुका है, जो भारत की कुल जनसंख्या का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। इसका अर्थ है कि अभी भी करोड़ों नए उपभोक्ताओं और कारोबारियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ने की व्यापक संभावना बनी हुई है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दुनिया के 50% से अधिक रिटेल डिजिटल लेनदेन अब भारत में हो रहे हैं — एक आँकड़ा जो देश की डिजिटल भुगतान क्रांति की वैश्विक पहचान को दर्शाता है। गौरतलब है कि यह उपलब्धि बैंकों, वित्तीय संस्थानों और पूरे डिजिटल भुगतान उद्योग द्वारा किए गए बड़े पैमाने के निवेश की बदौलत संभव हुई है।
डिजिटल भुगतान का अगला चरण
श्रीनिवासु एमएन ने कहा, 'डिजिटल भुगतान का अगला चरण केवल उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होगा। इसके लिए साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम तंत्र, ग्राहक शिक्षा और उन्नत तकनीकी ढाँचे पर भी लगातार निवेश करना होगा।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार UPI के अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर भी ज़ोर दे रही है और कई देशों के साथ UPI इंटरऑपरेबिलिटी समझौते हो चुके हैं। ऐसे में नेटवर्क की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
लघु व्यापारियों के लिए विशेष कोष
BillDesk के सह-संस्थापक ने बताया कि MDR से प्राप्त संसाधनों का एक हिस्सा एक विशेष कोष के निर्माण में लगाया जाएगा, जिसका उद्देश्य छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना और UPI को देश के अधिकाधिक हिस्सों तक पहुँचाना होगा। उनके अनुसार यह कदम डिजिटल समावेश की दिशा में एक ठोस प्रयास है, जो भविष्य में UPI की पहुँच को और व्यापक बनाएगा।