16 सितंबर 2026
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UPI MDR पर नितिन कामथ का समर्थन, ब्रोकिंग सेक्टर के लिए अलग व्यवस्था की माँग

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UPI MDR पर नितिन कामथ का समर्थन, ब्रोकिंग सेक्टर के लिए अलग व्यवस्था की माँग

सारांश

जेरोधा के CEO नितिन कामथ ने UPI MDR को अपरिहार्य बताया — 95% बाज़ार तीन ऐप्स के पास होने की स्थिति में यह प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा। लेकिन ब्रोकिंग सेक्टर के लिए यह ₹2 करोड़ तक की अतिरिक्त लागत का ज़ोखिम बन सकता है, जहाँ फंड ट्रांसफर और ट्रेड के बीच कोई गारंटी नहीं होती।

मुख्य बातें

जेरोधा CEO नितिन कामथ ने 16 सितंबर को एक्स पर UPI MDR का समर्थन किया।
UPI बाज़ार का 95% से अधिक हिस्सा केवल तीन ऐप्स के पास — MDR से प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद।
ब्रोकिंग सेक्टर पर जोखिम: 10,000 ग्राहकों के ₹2 लाख के UPI ट्रांसफर पर ब्रोकर को लगभग ₹2 करोड़ अतिरिक्त खर्च हो सकता है।
त्रैमासिक निपटान (QS) नियमों के कारण बार-बार फंड ट्रांसफर से ब्रोकर्स पर MDR का बोझ और बढ़ सकता है।
कामथ ने निवेश व ब्रोकिंग क्षेत्र के लिए अलग MDR व्यवस्था पर विचार करने की सिफारिश की।

जेरोधा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितिन कामथ ने 16 सितंबर को व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) UPI भुगतान पर लागू किए गए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान के इस स्तर तक पहुँचने के बाद यह कदम अपरिहार्य था, हालाँकि ब्रोकिंग और निवेश जैसे क्षेत्रों के लिए इस ढाँचे में विशेष प्रावधान होने चाहिए।

MDR का समर्थन क्यों

कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट में कहा, 'मुझे लगता है कि UPI पर MDR किसी न किसी समय लागू होना ही था, खासकर तब जब UPI का उपयोग इतने व्यापक स्तर पर हो चुका है। इससे अधिक प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल सकती है।' उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वर्तमान में UPI बाज़ार का 95% से अधिक हिस्सा केवल तीन ऐप्स के पास है और नया शुल्क ढाँचा इस एकाग्रता को कम कर सकता है।

गौरतलब है कि UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को जन-जन तक पहुँचाया है, लेकिन इसके संचालन की लागत वहन करने का प्रश्न लंबे समय से बहस का विषय रहा है। MDR का यह कदम ऐसे समय में आया है जब सरकार डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाने पर ध्यान दे रही है।

ब्रोकिंग सेक्टर के लिए चुनौती

कामथ ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित MDR संरचना निवेश और ब्रोकिंग कारोबार के लिए उपयुक्त नहीं है। उनके अनुसार, ब्रोकर्स के पास यह सुनिश्चित करने का कोई तरीका नहीं होता कि UPI के ज़रिए उनके खातों में आया पैसा अंततः किसी ट्रेड में लगेगा ही। ग्राहक फंड ट्रांसफर करने के बाद ट्रेड करें, यह ब्रोकर्स के वश में नहीं होता।

उन्होंने एक ठोस उदाहरण देते हुए समझाया: यदि 10,000 ग्राहक एक महीने में ₹2 लाख के 50-50 UPI ट्रांसफर करें और बाद में कोई ट्रेड न करें, तो प्रस्तावित MDR व्यवस्था के तहत किसी ब्रोकर पर लगभग ₹2 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आ सकता है — बिना किसी अतिरिक्त राजस्व के।

त्रैमासिक निपटान नियमों का पेच

कामथ ने त्रैमासिक निपटान (Quarterly Settlement — QS) नियमों का भी उल्लेख किया। इन नियमों के तहत ब्रोकर्स को हर महीने या तिमाही में ग्राहकों के अप्रयुक्त फंड उनके बैंक खातों में वापस भेजने होते हैं। ग्राहक अक्सर यह राशि फिर से अपने ब्रोकिंग खातों में जमा करते हैं और ऐसे आधे से अधिक ट्रांसफर UPI के माध्यम से होते हैं।

इस चक्र में बार-बार फंड ट्रांसफर होने पर ब्रोकर्स को UPI शुल्क देना पड़ सकता है, जबकि उनके राजस्व में कोई वृद्धि नहीं होती। यह एक संरचनात्मक समस्या है जो ब्रोकिंग उद्योग की विशिष्ट प्रकृति से उपजती है।

कामथ की सिफारिश

कामथ का मानना है कि UPI पर MDR लागू करने के पीछे का तर्क मज़बूत है और इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, लेकिन निवेश व ब्रोकिंग जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अलग व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि ऐसा नहीं किया गया तो डिजिटल भुगतान की बढ़ती लागत उद्योग पर अनावश्यक बोझ बन जाएगी।

यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि नीति-निर्माता ब्रोकिंग सेक्टर की इन चिंताओं को MDR के अंतिम ढाँचे में किस हद तक समायोजित करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

सभी के लिए' की सोच से आगे बढ़कर ब्रोकिंग जैसे क्षेत्रों की संरचनात्मक विशिष्टताओं को समझेंगे। QS नियमों और ट्रेड की अनिश्चितता के बीच ब्रोकर्स पर MDR का बोझ डालना उस उद्योग को दंडित करना है जो पहले से ही SEBI के सख्त नियामक दबाव में है। यदि MDR का अंतिम ढाँचा इन बारीकियों को नज़रअंदाज़ करता है, तो डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की नीति उलटा असर दिखा सकती है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UPI MDR क्या है और यह नया क्यों है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर देते हैं। UPI पर P2M (व्यक्ति-से-व्यापारी) लेनदेन के लिए MDR हाल ही में लागू किया गया है, जो पहले शून्य था। इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाना और नए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना है।
नितिन कामथ ने UPI MDR का समर्थन क्यों किया?
कामथ का मानना है कि UPI बाज़ार का 95% से अधिक हिस्सा केवल तीन ऐप्स के पास होना स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए नुकसानदेह है। उनके अनुसार MDR से नए प्रतिभागियों को बाज़ार में आने का प्रोत्साहन मिलेगा और एकाग्रता कम होगी।
ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए UPI MDR समस्या क्यों है?
ब्रोकर्स यह सुनिश्चित नहीं कर सकते कि UPI से आया फंड ट्रेड में लगेगा। यदि ग्राहक पैसा ट्रांसफर करके ट्रेड न करें, तो MDR का खर्च ब्रोकर को उठाना पड़ेगा बिना किसी राजस्व के — उदाहरण के तौर पर 10,000 ग्राहकों के ₹2 लाख के ट्रांसफर पर लगभग ₹2 करोड़ का बोझ पड़ सकता है।
त्रैमासिक निपटान (QS) नियम MDR को और जटिल कैसे बनाते हैं?
QS नियमों के तहत ब्रोकर्स को ग्राहकों का अप्रयुक्त फंड हर महीने या तिमाही में वापस करना होता है। ग्राहक यही राशि फिर UPI से जमा करते हैं — इस चक्र में बार-बार MDR देना पड़ सकता है, जबकि ब्रोकर का राजस्व नहीं बढ़ता।
कामथ ने ब्रोकिंग सेक्टर के लिए क्या सुझाव दिया?
कामथ ने सुझाव दिया कि UPI MDR का समग्र तर्क सही है, लेकिन निवेश और ब्रोकिंग जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट प्रकृति को देखते हुए उनके लिए अलग MDR व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि डिजिटल भुगतान की लागत उद्योग पर अनावश्यक बोझ न बने।
राष्ट्र प्रेस
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