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UPI MDR पर नितिन कामथ का समर्थन, ब्रोकिंग सेक्टर के लिए अलग व्यवस्था की माँग

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UPI MDR पर नितिन कामथ का समर्थन, ब्रोकिंग सेक्टर के लिए अलग व्यवस्था की माँग

सारांश

जेरोधा के CEO नितिन कामथ ने UPI MDR को ज़रूरी बताया — लेकिन ब्रोकिंग सेक्टर के लिए यह बड़ी मुसीबत बन सकता है। 10,000 ग्राहक, ₹2 लाख के ट्रांसफर और कोई ट्रेड नहीं — तो ब्रोकर पर ₹2 करोड़ का बोझ। UPI का 95% बाज़ार तीन ऐप्स के हाथ में, MDR से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी — पर कीमत कौन चुकाएगा?

मुख्य बातें

जेरोधा CEO नितिन कामथ ने एक्स पर पोस्ट कर P2M UPI भुगतान पर MDR का समर्थन किया।
UPI बाज़ार का 95% से अधिक हिस्सा केवल तीन ऐप्स के पास — MDR से प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद।
ब्रोकिंग सेक्टर के लिए खतरा: 10,000 ग्राहकों के ₹2 लाख के ट्रांसफर पर बिना ट्रेड के ब्रोकर पर ₹2 करोड़ का बोझ संभव।
Quarterly Settlement (QS) नियमों के कारण बार बार UPI ट्रांसफर होते हैं — इससे ब्रोकर्स की लागत बढ़ेगी, राजस्व नहीं।
कामथ ने निवेश और ब्रोकिंग क्षेत्र के लिए अलग MDR व्यवस्था की माँग की।

जेरोधा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितिन कामथ ने 16 सितंबर 2026 को व्यक्ति से व्यापारी (P2M) UPI भुगतान पर लागू किए गए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का सैद्धांतिक समर्थन किया है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रोकिंग और निवेश जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट कार्यप्रणाली को देखते हुए इस शुल्क ढाँचे में अपवाद या अलग व्यवस्था ज़रूरी है।

MDR के समर्थन में कामथ का तर्क

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में कामथ ने कहा, "मुझे लगता है कि UPI पर MDR किसी न किसी समय लागू होना ही था, खासकर तब जब UPI का उपयोग इतने व्यापक स्तर पर हो चुका है। इससे अधिक प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल सकती है।" उनके अनुसार, वर्तमान में UPI बाज़ार का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल तीन ऐप्स के पास केंद्रित है और नया शुल्क ढाँचा इस एकाग्रता को कम करते हुए नई प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित कर सकता है।

ब्रोकिंग सेक्टर के लिए क्यों है चुनौती

हालांकि कामथ ने यह भी रेखांकित किया कि प्रस्तावित MDR संरचना निवेश और ब्रोकिंग व्यवसाय के लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने बताया कि ब्रोकर्स के पास यह सुनिश्चित करने का कोई तरीका नहीं होता कि UPI के ज़रिए उनके खातों में ट्रांसफर हुआ पैसा किसी ट्रेड में इस्तेमाल होगा या नहीं। ग्राहक फंड ट्रांसफर करने के बाद ट्रेड न करें, तो ब्रोकर उन्हें बाध्य नहीं कर सकता — और ऐसी स्थिति में UPI शुल्क का बोझ ब्रोकर को उठाना पड़ेगा जबकि राजस्व शून्य रहेगा।

₹2 करोड़ के बोझ का उदाहरण

कामथ ने एक ठोस उदाहरण देते हुए बताया कि यदि 10,000 ग्राहक एक महीने में ₹2 लाख के 50 50 UPI ट्रांसफर करें और बाद में कोई ट्रेड न करें, तो प्रस्तावित MDR व्यवस्था के तहत किसी ब्रोकर पर लगभग ₹2 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आ सकता है। यह परिदृश्य काल्पनिक नहीं है — त्रैमासिक निपटान (Quarterly Settlement — QS) नियमों के तहत ब्रोकर्स को हर महीने या तिमाही में ग्राहकों के अप्रयुक्त फंड वापस उनके बैंक खातों में भेजने होते हैं।

बार बार ट्रांसफर से बढ़ती लागत

कामथ ने बताया कि ग्राहक अक्सर यह राशि फिर से अपने ब्रोकिंग खातों में जमा करते हैं और आधे से अधिक ट्रांसफर UPI के माध्यम से होते हैं। इस चक्र के कारण बार बार फंड ट्रांसफर पर ब्रोकर्स को UPI शुल्क देना पड़ सकता है, जबकि उनके राजस्व में कोई अतिरिक्त वृद्धि नहीं होती। यह स्थिति डिजिटल भुगतान की बढ़ती लागत को उद्योग पर अनावश्यक बोझ बना सकती है।

आगे क्या होना चाहिए

कामथ का मानना है कि UPI पर MDR लागू करने का तर्क मज़बूत है, लेकिन निवेश और ब्रोकिंग जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को देखते हुए अलग शुल्क व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। यह विमर्श ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल भुगतान की मात्रा रिकॉर्ड स्तर पर है और MDR नीति को लेकर वित्तीय उद्योग में व्यापक बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन MDR उसका समाधान तभी होगा जब शुल्क ढाँचा सभी क्षेत्रों की कार्यप्रणाली को समझे। ब्रोकिंग सेक्टर का QS प्रेरित चक्रीय ट्रांसफर पैटर्न नीति निर्माताओं की नज़र से शायद बचा हुआ है — यह उन अनदेखे परिणामों का उदाहरण है जो बड़ी डिजिटल नीतियों में अक्सर छोटे सेक्टरों को असंगत रूप से प्रभावित करते हैं। असली सवाल यह है कि क्या सरकार क्षेत्र विशिष्ट अपवादों पर विचार करेगी, या एक समान ढाँचा थोपा जाएगा।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UPI MDR क्या है और यह नया क्यों है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर अदा करते हैं। P2M UPI लेनदेन पर MDR हाल ही में लागू किया गया है — इससे पहले UPI लेनदेन पर यह शुल्क शून्य था, जो डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की नीति का हिस्सा था।
नितिन कामथ ने UPI MDR का समर्थन क्यों किया?
जेरोधा के CEO नितिन कामथ ने कहा कि UPI के इतने व्यापक उपयोग के बाद MDR लागू होना अपरिहार्य था। उनके अनुसार यह कदम UPI बाज़ार में मौजूद एकाग्रता — जहाँ 95% से अधिक हिस्सा केवल तीन ऐप्स के पास है — को कम करने में मदद कर सकता है और नई प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे सकता है।
ब्रोकिंग सेक्टर के लिए UPI MDR समस्या क्यों है?
ब्रोकर्स यह सुनिश्चित नहीं कर सकते कि UPI से ट्रांसफर हुआ पैसा ट्रेड में इस्तेमाल होगा। Quarterly Settlement नियमों के तहत बार बार फंड ट्रांसफर होने से MDR का बोझ बढ़ता है, जबकि राजस्व नहीं बढ़ता — जिससे यह शुल्क ढाँचा ब्रोकिंग के लिए असंगत हो जाता है।
कामथ ने ₹2 करोड़ के बोझ का उदाहरण क्यों दिया?
यह उदाहरण MDR के व्यावहारिक प्रभाव को समझाने के लिए था। यदि 10,000 ग्राहक एक महीने में ₹2 लाख के 50 50 UPI ट्रांसफर करें और कोई ट्रेड न करें, तो एक ब्रोकर पर लगभग ₹2 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आ सकता है — बिना किसी अतिरिक्त राजस्व के।
ब्रोकिंग सेक्टर के लिए MDR पर क्या समाधान सुझाया गया है?
नितिन कामथ ने सुझाया है कि निवेश और ब्रोकिंग जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट कार्यप्रणाली को देखते हुए उनके लिए अलग MDR व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि डिजिटल भुगतान की बढ़ती लागत उद्योग पर अनावश्यक बोझ न बने।
राष्ट्र प्रेस
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