UPI पर MDR लागू: RBI बोला — डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए ज़रूरी कदम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि अधिक मूल्य वाले UPI ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करना भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम नीतिगत कदम है। केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि P2P (पर्सन-टू-पर्सन) ट्रांजेक्शन और ₹2,000 से कम के सभी P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) ट्रांजेक्शन उपयोगकर्ताओं के लिए पूर्णतः निःशुल्क बने रहेंगे।
MDR क्या है और इसे क्यों लाया गया
RBI ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अपनी आधिकारिक पोस्ट में कहा, 'इकोसिस्टम में शामिल प्रतिभागियों के बीच MDR का उचित और न्यायसंगत वितरण, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढाँचे और स्वीकृति नेटवर्क में निरंतर निवेश को प्रोत्साहित करेगा।' बैंक के अनुसार, इससे UPI की स्वीकृति का दायरा बढ़ेगा, उपयोगकर्ताओं की संख्या में वृद्धि होगी और ट्रांजेक्शन की मात्रा में लगातार इज़ाफ़ा होगा।
वित्त मंत्रालय ने इस संदर्भ में मंगलवार को एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए रेखांकित किया कि MDR न तो कोई कर है और न ही सरकार या नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क। यह राशि बैंकों, पेमेंट सेवा प्रदाताओं और UPI एप्लिकेशन प्रदाताओं के बीच वितरित की जाएगी।
किन ट्रांजेक्शन पर लागू होगा MDR
0.4 प्रतिशत की दर से MDR केवल ₹2,000 से अधिक के P2M UPI ट्रांजेक्शन पर लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजेक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजेक्शन तय की गई है।
गौरतलब है कि रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि उत्पादों जैसे आवश्यक एवं कम-मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए ₹2,000 से अधिक के ट्रांजेक्शन पर एक फ्लैट ₹5 प्रति ट्रांजेक्शन का एकसमान शुल्क लागू होगा। यह व्यवस्था इन सेक्टरों को लागत की निश्चितता प्रदान करेगी।
आम उपयोगकर्ता पर क्या असर
RBI ने दोहराया कि सभी P2P ट्रांजेक्शन — चाहे कितनी भी राशि हो — और ₹2,000 तक के P2M ट्रांजेक्शन उपयोगकर्ताओं के लिए पूरी तरह मुफ़्त रहेंगे। नई MDR संरचना का बोझ सीधे आम उपभोक्ता पर नहीं, बल्कि मर्चेंट स्तर पर पड़ेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को जनसाधारण तक पहुँचाने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है और मासिक ट्रांजेक्शन का आँकड़ा अरबों तक पहुँच चुका है। MDR-मुक्त मॉडल के कारण पेमेंट सेवा प्रदाताओं को होने वाला राजस्व नुकसान लंबे समय से इकोसिस्टम की स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगाता रहा है।
RBI की प्रतिबद्धता
केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि UPI सुरक्षित, सरल, किफ़ायती और सभी की पहुँच में बना रहे। साथ ही, भारत के विश्वस्तरीय डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता और विकास को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
आने वाले हफ्तों में बैंकों और पेमेंट प्रदाताओं द्वारा इस नई MDR संरचना को लागू करने की विस्तृत रूपरेखा सामने आने की उम्मीद है, जो इस नीतिगत कदम के व्यावहारिक प्रभाव को और स्पष्ट करेगी।