सीपीआई-एम पोलित ब्यूरो का बड़ा फैसला: केरल यूनिट में व्यापक फेरबदल, जयराजन की वापसी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पोलित ब्यूरो ने 15 सितंबर 2026 को केरल यूनिट में बड़े पैमाने पर संगठनात्मक फेरबदल का आदेश दिया, जो कोझिकोड में तीन दिन तक चली राज्य समिति की बैठक के समापन पर लिया गया निर्णय है। चुनावी हार और जमीनी संगठन के कमज़ोर पड़ने को लेकर बढ़ती आंतरिक आलोचना के बाद यह कदम उठाया गया है, जो दर्शाता है कि केंद्रीय नेतृत्व अब केरल के संगठनात्मक संकट को नज़रअंदाज़ करने के मूड में नहीं है।
राज्य सचिवालय में प्रमुख बदलाव
राज्य सचिवालय का पुनर्गठन करते हुए पी. जयराजन और पूर्व मंत्री वी. शिवनकुट्टी तथा एम.बी. राजेश को शामिल किया गया है। वहीं, टी.पी. रामकृष्णन और थॉमस इसाक को सचिवालय से हटा दिया गया है। कन्नूर के प्रमुख नेता पी. जयराजन की वापसी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे पार्टी की पारंपरिक संगठनात्मक शैली के प्रतीक रहे हैं।
शिवनकुट्टी के शामिल होने से दक्षिणी जिलों का प्रतिनिधित्व मज़बूत होगा, जबकि राजेश की उपस्थिति शीर्ष निर्णय-निर्माण इकाई में एक युवा और प्रभावशाली नेतृत्व चेहरे को जोड़ती है।
राज्य समिति में नौ नए चेहरे
राज्य समिति का भी पुनर्गठन किया गया, जिसमें नौ नए सदस्य शामिल किए गए। इनमें ओ.एस. अंबिका, एम. विजिन, जैक सी. थॉमस और पी.एस. संजीव के नाम प्रमुख हैं। इसे संगठनात्मक ढाँचे में युवा चेहरों को आगे लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि यह पुनर्गठन संगठनात्मक चुनावों से ठीक पहले हो रहा है, जिससे जमीनी स्तर से ऊपर तक पार्टी के पुनर्निर्माण के लिए ये बदलाव और भी अहम हो जाते हैं।
राज्य सचिव पर आंतरिक असंतोष
खबरों के मुताबिक, राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के कामकाज और कुछ सार्वजनिक बयानों की आलोचना के बाद पोलित ब्यूरो ने उन्हें कथित तौर पर फटकार लगाई। कई प्रतिनिधियों ने बैठक में तर्क दिया कि गोविंदन जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से दूर हो गए हैं और मीडिया से उनके निपटने के तरीके ने पार्टी को राजनीतिक हमलों के प्रति कमज़ोर बना दिया है।
आलोचना केवल व्यक्तिगत गलतियों तक सीमित नहीं रही — प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि पार्टी संगठन पर सरकार के बढ़ते दबदबे और पारंपरिक जमीनी मशीनरी के कमज़ोर होने के मुद्दे को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
चुनावी हार और संगठनात्मक निष्क्रियता पर समीक्षा
बैठक में प्रतिनिधियों ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी हार को केवल शासन की कमियों पर नहीं थोपा जा सकता। उन्होंने जोर दिया कि संगठन की निष्क्रियता और पार्टी कार्यकर्ताओं का भरोसा व उत्साह बनाए रखने में विफलता की भी स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब सीपीआई-एम केरल में अपनी राजनीतिक पकड़ को लेकर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इस पुनर्गठन को पार्टी के भीतर विभिन्न वर्गों को एकजुट करने और पीढ़ीगत बदलाव का संकेत देने की दोहरी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
आगे की राह
पोलित ब्यूरो के समर्थन से किए गए ये बदलाव केरल में सीपीआई-एम के लिए एक अहम मोड़ माने जा रहे हैं। अब सबकी नज़रें इस बात पर होंगी कि नया सचिवालय संगठन को किस दिशा में ले जाता है और क्या ये बदलाव आगामी संगठनात्मक चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर सकारात्मक असर डाल पाते हैं।