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केरल चुनाव हार के बाद सीपीआई(एम) में अंदरूनी कलह, थॉमस आइजैक और टी.के. गोविंदन ने नेतृत्व को घेरा

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केरल चुनाव हार के बाद सीपीआई(एम) में अंदरूनी कलह, थॉमस आइजैक और टी.के. गोविंदन ने नेतृत्व को घेरा

सारांश

केरल में चुनावी हार के बाद सीपीआई(एम) का आंतरिक संकट सतह पर आ गया है। थॉमस आइजैक नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि बागी उम्मीदवार टी.के. गोविंदन ने पिनराई विजयन को सीधे जिम्मेदारी स्वीकार करने की चुनौती दी है। विस्तारित राज्य समिति की बैठक से पहले पार्टी के भीतर असहमति की आवाज़ें तेज़ हो रही हैं।

मुख्य बातें

थॉमस आइजैक ने 3 सितंबर को स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना केंद्रीय समिति की रिपोर्ट पर आधारित है और वे अपने रुख पर कायम हैं।
आइजैक ने माना कि दस वर्षों की सत्ता के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में अहंकार आ गया था।
गोविंदन ने तालिपारम्बा में पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार पी.के.
श्यामला को हराया, जो राज्य सचिव एम.वी.
गोविंदन की पत्नी हैं।
गोविंदन ने कन्नूर जिला सचिव के.के.
रागेश की संपत्तियों की जाँच की माँग की और स्वयं को भी जाँच के लिए प्रस्तुत किया।
कैराली टीवी के पत्रकार शैमी प्रभाकर की फेसबुक पोस्ट ने पार्टी समर्थकों में नई बहस छेड़ी।
अगले सप्ताहांत से विस्तारित राज्य समिति की बैठक होनी है, जिसका एजेंडा अंतिम रूप लेने की प्रक्रिया में है।

केरल विधानसभा चुनाव में वामपंथी मोर्चे की हार के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] में आंतरिक मंथन तेज़ी से गहराता जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता थॉमस आइजैक ने 3 सितंबर को स्पष्ट किया कि नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर उनकी आलोचनात्मक टिप्पणियाँ पार्टी की केंद्रीय समिति की रिपोर्ट पर ही आधारित हैं और वे अपने रुख पर कायम हैं। इसी बीच पूर्व वरिष्ठ नेता टी.के. गोविंदन ने खुलकर नेतृत्व को हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने की चुनौती दी है।

आइजैक का रुख और केंद्रीय समिति का संदर्भ

थॉमस आइजैक ने गुरुवार को कहा कि उनकी टिप्पणियाँ पूरी तरह पार्टी की केंद्रीय समिति की आधिकारिक रिपोर्ट में निहित आकलन पर टिकी हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दस वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं में अहंकार घर कर गया था — एक ऐसी बात जिसे लेकर संगठन के भीतर बहस पहले ही शुरू हो चुकी थी। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पार्टी अगले सप्ताहांत से होने वाली विस्तारित राज्य समिति की बैठक के एजेंडे को अंतिम रूप देने में जुटी है।

टी.के. गोविंदन का सीधा प्रहार

पूर्व नेता टी.के. गोविंदन, जिन्होंने सीपीआई(एम) से नाता तोड़कर बागी उम्मीदवार के रूप में तालिपारम्बा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, ने नेतृत्व पर सबसे तीखा हमला बोला। कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) के समर्थन से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार और राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन की पत्नी पी.के. श्यामला को पराजित किया — जो चुनाव की सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील घटनाओं में से एक मानी जा रही है।

गोविंदन ने माँग की कि सीपीआई(एम) और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन हार में अपनी भूमिका को खुलकर स्वीकार करें। उन्होंने विजयन के करीबी और 56 वर्षीय कन्नूर सीपीआई(एम) जिला सचिव के.के. रागेश पर भी निशाना साधा, यह कहते हुए कि रागेश ने पार्टी में तब प्रवेश किया था जब वे एक प्लंबर/इलेक्ट्रीशियन थे और उनकी वर्तमान संपत्तियों की जाँच होनी चाहिए। गोविंदन ने स्वयं को भी इसी जाँच के लिए प्रस्तुत किया।

गोविंदन ने यह भी सवाल उठाया कि केंद्रीय समिति ने तालिपारम्बा में उम्मीदवार चयन की खामियों को स्वीकार किया, फिर भी विजयन के पय्यानूर और तालिपारम्बा दौरों के भाषणों में यह आत्म-आलोचना क्यों नहीं दिखी।

सोशल मीडिया पर उभरती बहस

सीपीआई(एम) समर्थित टेलीविजन चैनल कैराली टीवी के समाचार संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शैमी प्रभाकर की फेसबुक पर एक पोस्ट ने पार्टी समर्थकों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। पोस्ट में पिछले दस वर्षों के वामपंथी शासन की उपलब्धियों की सराहना करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री की इस बात के लिए आलोचना की गई है कि वे कथित तौर पर इस झटके की गंभीरता को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

विस्तारित राज्य समिति बैठक और आगे की राह

राज्य सचिवालय और राज्य समिति से अपेक्षा है कि वे उन प्रमुख संगठनात्मक और राजनीतिक प्रश्नों की पहचान करें जिन पर विस्तृत चर्चा ज़रूरी है। आइजैक जहाँ इस बहस को केंद्रीय समिति के आकलन के दायरे में रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं गोविंदन की माँग है कि नेतृत्व स्वयं उन गलतियों का सामना करे जिन्हें पार्टी ने आधिकारिक रूप से माना है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सीपीआई(एम) को केरल में सत्ता खोने के बाद इस तरह के आंतरिक विमर्श से गुज़रना पड़ा हो — लेकिन बागी उम्मीदवार द्वारा आधिकारिक प्रत्याशी को हराने की घटना इस बार के संकट को अधिक गहरा बनाती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ये आलोचनाएँ वास्तविक संगठनात्मक सुधार में बदलेंगी या चुनाव-पश्चात असहमति की रस्म तक ही सिमट कर रह जाएंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नेतृत्व उसी आत्म-आलोचना को सार्वजनिक रूप से दोहराने से बच रहा है। थॉमस आइजैक जैसे वरिष्ठ नेता का खुलकर बोलना दर्शाता है कि असहमति अब हाशिये पर नहीं, मुख्यधारा में है। असली सवाल यह है कि विस्तारित राज्य समिति की बैठक क्या वास्तविक जवाबदेही तय करेगी, या यह भी पिछले चुनावी समीक्षाओं की तरह कागज़ी कवायद बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल चुनाव में सीपीआई(एम) की हार के बाद क्या विवाद उभरा है?
केरल विधानसभा चुनाव में हार के बाद सीपीआई(एम) में आंतरिक मतभेद सामने आए हैं। वरिष्ठ नेता थॉमस आइजैक ने नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि पूर्व नेता टी.के. गोविंदन ने पिनराई विजयन को हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने की खुली चुनौती दी है।
थॉमस आइजैक ने सीपीआई(एम) नेतृत्व पर क्या कहा?
थॉमस आइजैक ने कहा कि उनकी आलोचनात्मक टिप्पणियाँ पार्टी की केंद्रीय समिति की रिपोर्ट पर आधारित हैं और वे अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने यह भी माना कि दस वर्षों की सत्ता के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में अहंकार आ गया था।
तालिपारम्बा में टी.के. गोविंदन की जीत का क्या महत्व है?
टी.के. गोविंदन ने सीपीआई(एम) से बगावत कर यूडीएफ के समर्थन से तालिपारम्बा सीट पर पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार और राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन की पत्नी पी.के. श्यामला को हराया। यह घटना चुनाव की सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील परिणामों में से एक मानी जा रही है।
सीपीआई(एम) की विस्तारित राज्य समिति बैठक में क्या होने की उम्मीद है?
अगले सप्ताहांत से होने वाली विस्तारित राज्य समिति की बैठक में प्रमुख संगठनात्मक और राजनीतिक प्रश्नों पर चर्चा होने की उम्मीद है। राज्य सचिवालय और राज्य समिति उन मुद्दों की पहचान कर रहे हैं जिन पर विस्तृत विमर्श आवश्यक है।
के.के. रागेश पर टी.के. गोविंदन ने क्या आरोप लगाए?
टी.के. गोविंदन ने कन्नूर सीपीआई(एम) जिला सचिव और पिनराई विजयन के करीबी 56 वर्षीय के.के. रागेश की वर्तमान संपत्तियों की जाँच की माँग की। उन्होंने कहा कि रागेश ने पार्टी में तब प्रवेश किया था जब वे एक प्लंबर/इलेक्ट्रीशियन थे, और स्वयं को भी इसी जाँच के लिए प्रस्तुत किया।
राष्ट्र प्रेस
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