कर्नाटक हाईकोर्ट ने दुनिया विजय को दिया तलाक, पत्नी नागरत्ना को मिलेगा ₹2 करोड़ गुजारा भत्ता
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को कन्नड़ फिल्म जगत के अभिनेता, निर्देशक और निर्माता दुनिया विजय तथा उनकी पत्नी नागरत्ना के बीच वर्षों से चले आ रहे वैवाहिक विवाद पर अंतिम फैसला सुनाते हुए तलाक को मंजूरी दे दी। अदालत ने साथ ही दुनिया विजय को दो महीने के भीतर नागरत्ना को ₹2 करोड़ की एकमुश्त गुजारा भत्ता राशि अदा करने का आदेश दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस डी.के. सिंह और जस्टिस एच. शांतिभूषण की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। बेंच ने फैसला सुनाते समय नागरत्ना की व्यक्तिगत परिस्थितियों, दंपति के तीन बच्चों के हित, तथा दुनिया विजय की आर्थिक स्थिति और फिल्म इंडस्ट्री में उनकी कमाई की क्षमता को विशेष रूप से ध्यान में रखा।
कोर्ट के आदेश के अनुसार, यदि दुनिया विजय निर्धारित दो महीने की अवधि में ₹2 करोड़ की राशि का भुगतान नहीं करते, तो उन्हें बकाया रकम पर 6% वार्षिक ब्याज भी चुकाना होगा।
पारिवारिक न्यायालय से हाईकोर्ट तक का सफर
यह विवाद कई वर्षों से न्यायालयों में लंबित था। इससे पूर्व फैमिली कोर्ट ने दुनिया विजय की तलाक याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उन्होंने पत्नी पर क्रूरता के जो आरोप लगाए थे, वे सिद्ध नहीं हो सके। हालाँकि, फैमिली कोर्ट के उस निर्णय के बाद भी दोनों के बीच संबंधों में कोई सुधार नहीं आया।
सुनवाई के दौरान दुनिया विजय ने अदालत को बताया था कि नागरत्ना उनके माता-पिता की समुचित देखभाल नहीं करती थीं। वहीं, नागरत्ना शुरुआत में तलाक के विरोध में थीं, जबकि दुनिया विजय साथ रहने को तैयार नहीं थे। रिश्ते में आई गहरी दूरी और लंबे समय से चली आ रही अनबन को देखते हुए हाईकोर्ट ने अंततः तलाक को उचित ठहराया।
दुनिया विजय का फिल्मी सफर
दुनिया विजय ने 2007 में प्रदर्शित फिल्म 'दुनिया' से कन्नड़ सिनेमा में अपनी पहचान बनाई थी। उस फिल्म की जबरदस्त सफलता के बाद वे कन्नड़ फिल्म जगत के चर्चित चेहरों में शामिल हो गए। आगे चलकर उन्होंने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन और निर्माण में भी कदम रखा और इंडस्ट्री में एक बहुआयामी पहचान बनाई।
आगे क्या होगा
अदालत के आदेश के अनुसार दुनिया विजय को दो महीने के भीतर ₹2 करोड़ की एकमुश्त राशि नागरत्ना को सौंपनी होगी। समय पर भुगतान न होने की स्थिति में ब्याज का प्रावधान इस आदेश को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाता है। यह फैसला कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बना हुआ है।