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खाद्यान्न उत्पादन 376.56 मिलियन टन रहने का अनुमान, विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना से मिल रहा बल

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खाद्यान्न उत्पादन 376.56 मिलियन टन रहने का अनुमान, विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना से मिल रहा बल

सारांश

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है — पिछले साल से 5.3% अधिक। इसके साथ 2023 में शुरू विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत 313 PACS में गोदाम तैयार हो चुके हैं, जो किसानों को बेहतर मूल्य और खाद्य सुरक्षा को नई मज़बूती दे रहे हैं।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान में कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान।
यह पिछले वर्ष के 357.732 मिलियन टन से 18.8 मिलियन टन यानी 5.3% अधिक है।
2023 में शुरू विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत जुलाई 2026 तक 313 PACS में गोदाम निर्माण पूरा।
देशभर में 1.80 लाख टन (LMT) से अधिक की नई भंडारण क्षमता तैयार।
पायलट परियोजनाएँ 11 राज्यों में लागू; 80 करोड़ लाभार्थियों वाले राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को मिल रहा सहारा।

वित्त वर्ष 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है — जो पिछले वर्ष के 357.732 मिलियन टन की तुलना में 18.8 मिलियन टन यानी 5.3 प्रतिशत अधिक है। यह आँकड़ा 3 सितंबर 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में सामने आया। इसके साथ ही, सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण ढाँचे के विस्तार ने इस उत्पादन वृद्धि को ज़मीन पर टिकाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।

उत्पादन में उछाल का महत्व

भारत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक संचालित करता है, जिसके दायरे में करीब 80 करोड़ लोग आते हैं। ऐसे में खाद्यान्न उत्पादन में यह वृद्धि केवल कृषि आँकड़ा नहीं है — यह सामाजिक सुरक्षा की नींव को और मज़बूत करने वाला संकेत भी है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बना हुआ है।

विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना की भूमिका

फैक्टशीट के अनुसार, 2023 में सहकारी क्षेत्र में शुरू की गई विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के माध्यम से भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण प्रणालियों को बेहतर बनाने में मदद की है। इस योजना को संस्थागत समन्वय और वित्तीय सहायता तंत्र के माध्यम से सहारा दिया जा रहा है।

11 राज्यों में 9,750 मिलियन टन भंडारण क्षमता के साथ शुरू हुई पायलट परियोजनाएँ लगातार विस्तार कर रही हैं। जुलाई 2026 तक देशभर में 313 PACS में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका था, जिससे 1.80 लाख टन (LMT) से अधिक की भंडारण क्षमता तैयार हुई है।

योजना के प्रमुख उद्देश्य

इस योजना के तहत कई लक्ष्य एक साथ साधे जा रहे हैं — खाद्यान्न की बर्बादी कम करना, किसानों को संकट में बिक्री से बचाना और बेहतर मूल्य दिलाना, खरीद केंद्रों व उचित मूल्य दुकानों के बीच परिवहन लागत घटाना, और PACS की भूमिका को कृषि गतिविधियों में विविधता लाकर विस्तारित करना। साथ ही, यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी सृजित करती है।

पायलट राज्य और परिचालन आधार

पायलट परियोजनाएँ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, असम, कर्नाटक और त्रिपुरा में लागू की गई हैं। फैक्टशीट के अनुसार, इन परियोजनाओं ने सहकारी स्तर पर स्थानीय भंडारण ढाँचे की व्यवहार्यता को प्रमाणित किया है और महत्वपूर्ण परिचालन आधार तैयार किया है। इस ढाँचे में गुणवत्ता मानकों, पारदर्शिता और संचालन की व्यवहार्यता पर भी जोर दिया गया है।

आगे की राह

उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि और भंडारण क्षमता के विस्तार के बीच यह देखना होगा कि PACS नेटवर्क का राष्ट्रव्यापी विस्तार कितनी तेज़ी से होता है और किसानों तक इसका वास्तविक लाभ पहुँचता है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि विकेंद्रीकृत भंडारण ढाँचे की सफलता अंततः स्थानीय प्रशासन और सहकारी संस्थाओं की क्षमता पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भंडारण ढाँचा इस उत्पादन के अनुपात में बढ़ रहा है। 313 PACS में 1.80 लाख टन की क्षमता एक शुरुआत है, पर 80 करोड़ लाभार्थियों वाले कार्यक्रम के पैमाने के सामने यह अभी भी सीमित है। विकेंद्रीकृत भंडारण का विचार सही दिशा में है, लेकिन पायलट से राष्ट्रव्यापी विस्तार की गति और गुणवत्ता पर नज़र रखना ज़रूरी है। बिना मज़बूत जवाबदेही और स्वतंत्र मूल्यांकन के, यह योजना भी उन कई कृषि पहलों की कतार में खड़ी हो सकती है जो कागज़ पर मज़बूत दिखती हैं पर ज़मीन पर किसान तक पूरी तरह नहीं पहुँचतीं।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन कितना रहने का अनुमान है?
तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 357.732 मिलियन टन से 18.8 मिलियन टन यानी 5.3 प्रतिशत अधिक है।
विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना क्या है और यह कब शुरू हुई?
यह 2023 में सहकारी क्षेत्र में शुरू की गई योजना है, जो PACS के माध्यम से भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिए काम करती है। इसका उद्देश्य खाद्यान्न की बर्बादी कम करना और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाना है।
जुलाई 2026 तक PACS गोदाम निर्माण की क्या स्थिति है?
जुलाई 2026 तक देशभर में 313 PACS में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका था, जिससे 1.80 लाख टन (LMT) से अधिक की भंडारण क्षमता तैयार हुई है। यह योजना 11 राज्यों में पायलट परियोजनाओं के रूप में लागू है।
इस योजना से किसानों को क्या फायदा होगा?
यह योजना किसानों को संकट में सस्ती बिक्री से बचाती है और बेहतर मूल्य प्राप्त करने का लचीलापन देती है। साथ ही परिवहन लागत कम होती है और अतिरिक्त आय के अवसर भी बनते हैं।
पायलट परियोजनाएँ किन राज्यों में लागू की गई हैं?
पायलट परियोजनाएँ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, असम, कर्नाटक और त्रिपुरा — कुल 11 राज्यों में लागू की गई हैं। इन परियोजनाओं ने सहकारी स्तर पर स्थानीय भंडारण ढाँचे की व्यवहार्यता को प्रमाणित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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