मद्रास हाई कोर्ट में विजय के विरुद्ध आयकर मामले पर रिट याचिका, एफआईआर की मांग
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई, 6 मई। अभिनेता और तमिलगा वेट्ट्रि कझगम (टीवीके) के प्रमुख विजय के विरुद्ध कथित आयकर अनियमितताओं को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की गई है, जिसमें उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की माँग की गई है। यह मामला 2015 में रिलीज़ हुई फिल्म 'पुलि' से जुड़ा है, जहाँ आयकर विभाग ने विजय को ₹4.93 करोड़ का बेहिसाब नकद भुगतान मिलने का आरोप लगाया है।
याचिका की पृष्ठभूमि
हाई कोर्ट की रजिस्ट्री ने बुधवार को याचिका को नंबर दे दिया है और इसे शीघ्र ही 'मेंटेनेबिलिटी' (स्वीकार्यता) के मुद्दे पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। गौरतलब है कि यह याचिका पहले पिछले महीने दायर की गई थी, लेकिन रजिस्ट्री ने शुरुआत में इसे नंबर देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद 8 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि याचिका को मेंटेनेबिलिटी के अधीन नंबर दिया जाए।
आयकर विभाग की कार्रवाई
फिल्म 'पुलि' के रिलीज़ होने के बाद 30 सितंबर 2015 को आयकर विभाग ने विजय से जुड़े परिसरों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की थी। इस दौरान कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज़ मिले थे, जिनमें बेहिसाब नकद लेनदेन का संकेत मिला। फिल्म के निर्माता पी.टी. सेल्वकुमार और शिबू (एसकेटी स्टूडियोज़) ने विजय को ₹16 करोड़ चेक के माध्यम से और ₹4.93 करोड़ नकद दिए थे।
टीडीएस पर विवाद
याचिका में दावा किया गया है कि टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) केवल चेक से दी गई ₹16 करोड़ की राशि पर जमा किया गया, जबकि ₹4.93 करोड़ के नकद भुगतान पर नहीं। यह आयकर नियमों के अनुसार अनियमितता मानी जाती है, क्योंकि अभिनेता पारिश्रमिक पर टीडीएस का भुगतान अनिवार्य है।
विजय की पूछताछ और स्वेच्छा खुलासा
याचिका में कहा गया है कि आयकर जांच के दौरान विजय से पूछताछ की गई थी, जिसमें उन्होंने कथित रूप से ₹5 करोड़ नकद प्राप्त करने की बात स्वीकार की और उस पर कर चुकाने पर सहमति जताई। इसके अलावा, उन्होंने वित्त वर्ष 2015-16 के लिए ₹15 करोड़ की अतिरिक्त आय का स्वेच्छा से खुलासा किया था। बाद में 29 जुलाई 2016 को विजय ने आकलन वर्ष 2016-17 के लिए ₹35.42 करोड़ की कुल आय घोषित करते हुए आयकर रिटर्न दाखिल किया था, जिसमें यह अतिरिक्त आय भी शामिल थी।
छूट के दावे
रिटर्न में ₹17.81 लाख के मूल्यह्रास (डिप्रिसिएशन) और ₹64.71 लाख के फैन्स क्लब खर्च पर छूट का भी दावा किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ये छूट के दावे अनुचित हैं और आयकर कार्यवाही में सामने आए तथ्यों के आधार पर विजय के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
आगे की कार्रवाई
हाई कोर्ट की सुनवाई के परिणाम से यह स्पष्ट होगा कि क्या न्यायालय आयकर विभाग को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देगा या याचिका को खारिज करेगा। यह मामला न केवल विजय के लिए बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में आयकर अनुपालन के मानदंड को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।