3 सितंबर 2026
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एनएसई का शेयर मौजूदा नियमों में खुद के प्लेटफॉर्म पर नहीं होगा लिस्ट: बीएसई सीईओ राममूर्ति

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एनएसई का शेयर मौजूदा नियमों में खुद के प्लेटफॉर्म पर नहीं होगा लिस्ट: बीएसई सीईओ राममूर्ति

सारांश

BSE सीईओ राममूर्ति ने साफ कर दिया — NSE मौजूदा नियामकीय ढाँचे में अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता। 2017 में BSE को भी यही जवाब मिला था। साथ ही अगस्त में दोनों एक्सचेंजों का डेरिवेटिव्स टर्नओवर बहु-वर्षीय निचले स्तर पर आ गया।

मुख्य बातें

BSE सीईओ सुंदररमन राममूर्ति ने 3 सितंबर 2026 को कहा कि NSE का शेयर मौजूदा नियामकीय ढाँचे के तहत अपने प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध नहीं हो सकता।
NSE ने BSE की कंप्लायंस टीम को बताया कि सेल्फ-ट्रेडिंग अनुमति के लिए DRHP में कोई अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल नहीं किया जाएगा।
BSE को भी 2017 में अपने ही एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की अनुमति नहीं मिली थी।
अगस्त में NSE का मासिक इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर ₹34.48 लाख करोड़ — नवंबर 2023 के बाद सबसे निचला स्तर।
BSE का अगस्त टर्नओवर ₹32.2 लाख करोड़ — जून 2025 के बाद सबसे कम।
CAS में लिक्विडिटी की कमी से भागीदारी सीमित, इंडेक्स वॉल्यूम में गिरावट।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ सुंदररमन राममूर्ति ने 3 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का शेयर मौजूदा नियामकीय ढाँचे के तहत अपने ही प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध नहीं हो सकता। यह बयान उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि BSE पर लिस्ट होने के बाद NSE अपने एक्सचेंज पर खुद ट्रेड कर सकता है।

क्या है पूरा मामला

राममूर्ति के अनुसार, BSE की कंप्लायंस टीम ने NSE से यह जानने की कोशिश की थी कि क्या वह सेल्फ-ट्रेडिंग की अनुमति के लिए अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में कोई अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की योजना बना रहा है। NSE ने जवाब दिया कि इस विषय में आई मीडिया रिपोर्टें अटकलों पर आधारित और बेबुनियाद हैं, और वह इस संदर्भ में कोई नया दस्तावेज दाखिल नहीं करेगा।

राममूर्ति ने यह भी बताया कि BSE ने स्वयं 2017 में अपने ही एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की अनुमति माँगी थी, परंतु नियामक स्तर पर यह अनुमति नहीं दी गई थी। यह उदाहरण इस बात को रेखांकित करता है कि सेल्फ-लिस्टिंग का मुद्दा केवल NSE तक सीमित नहीं है — यह पूरे भारतीय एक्सचेंज नियामकीय ढाँचे की एक बुनियादी सीमा है।

सेल्फ-लिस्टिंग पर नियामकीय स्थिति

भारत में एक्सचेंज के अपने प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने को लेकर कोई स्पष्ट अनुमति अभी तक नहीं दी गई है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के मौजूदा नियम इस व्यवस्था को अनुमति नहीं देते, क्योंकि इससे हितों का टकराव (conflict of interest) उत्पन्न होने की संभावना रहती है। राममूर्ति का यह स्पष्टीकरण बाज़ार में फैली भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से आया है।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन पर BSE की स्थिति

राममूर्ति ने हाल ही में शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि CAS प्रणाली के सुचारु संचालन के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी अनिवार्य है, परंतु अभी तक इसमें भागीदारी सीमित रही है। इसके परिणामस्वरूप इंडेक्स वॉल्यूम में गिरावट दर्ज की गई है।

डेरिवेटिव्स टर्नओवर में गिरावट

बाज़ार आँकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में NSE का मासिक इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर घटकर ₹34.48 लाख करोड़ रह गया, जो नवंबर 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं, इसी अवधि में BSE का टर्नओवर ₹32.2 लाख करोड़ रहा, जो जून 2025 के बाद सबसे कम है। यह गिरावट दोनों प्रमुख एक्सचेंजों पर डेरिवेटिव्स बाज़ार में आई सुस्ती को दर्शाती है।

आगे क्या होगा

NSE के IPO की प्रक्रिया जारी है और बाज़ार की नज़र SEBI के उस अंतिम निर्णय पर टिकी है जो तय करेगा कि NSE का शेयर किस एक्सचेंज पर और किन शर्तों के साथ सूचीबद्ध होगा। सेल्फ-लिस्टिंग का मुद्दा तब तक अनुत्तरित रहेगा जब तक SEBI नियामकीय ढाँचे में कोई बदलाव नहीं करता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि SEBI इस नियामकीय रिक्तता को कब और कैसे भरेगा। NSE का IPO वर्षों से लंबित है और सेल्फ-लिस्टिंग का मुद्दा उस प्रक्रिया में एक और पेचीदगी जोड़ता है। दोनों एक्सचेंजों के डेरिवेटिव्स टर्नओवर का एक साथ बहु-वर्षीय निचले स्तर पर आना यह भी संकेत देता है कि बाज़ार में संरचनात्मक बदलाव हो रहे हैं — जिन पर नियामक ध्यान देना ज़रूरी है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NSE का शेयर अपने ही प्लेटफॉर्म पर क्यों लिस्ट नहीं हो सकता?
SEBI के मौजूदा नियामकीय ढाँचे के तहत किसी एक्सचेंज को अपने ही प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने की अनुमति नहीं है, क्योंकि इससे हितों का टकराव उत्पन्न होता है। BSE सीईओ राममूर्ति ने स्पष्ट किया कि यह सीमा केवल NSE पर नहीं, बल्कि सभी एक्सचेंजों पर लागू होती है।
BSE को 2017 में सेल्फ-लिस्टिंग की अनुमति क्यों नहीं मिली थी?
2017 में BSE ने अपने ही एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की अनुमति माँगी थी, लेकिन नियामक स्तर पर यह अनुमति नहीं दी गई। राममूर्ति ने इस उदाहरण का हवाला देते हुए बताया कि यह नीतिगत स्थिति तब से अब तक नहीं बदली है।
NSE ने DRHP में अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल न करने का क्या कारण बताया?
NSE ने BSE की कंप्लायंस टीम को बताया कि सेल्फ-ट्रेडिंग को लेकर आई मीडिया रिपोर्टें अटकलों पर आधारित और बेबुनियाद हैं। इसलिए वह इस विषय में DRHP में कोई नया अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल नहीं करेगा।
अगस्त 2026 में NSE और BSE का डेरिवेटिव्स टर्नओवर कितना रहा?
अगस्त 2026 में NSE का मासिक इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर ₹34.48 लाख करोड़ रहा, जो नवंबर 2023 के बाद सबसे कम है। BSE का टर्नओवर ₹32.2 लाख करोड़ रहा, जो जून 2025 के बाद का निचला स्तर है।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में क्या समस्या है?
BSE सीईओ राममूर्ति के अनुसार, CAS प्रणाली में पर्याप्त लिक्विडिटी न होने के कारण भागीदारी सीमित रही है। इसका सीधा असर इंडेक्स वॉल्यूम पर पड़ा है, जिसमें गिरावट दर्ज की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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