NSE के DRHP में खुलासा: को-लोकेशन और डार्क फाइबर विवाद अनसुलझे, ₹1,491.21 करोड़ के सेटलमेंट का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में स्वीकार किया है कि को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े दोनों विवाद अभी तक अनसुलझे हैं। एक्सचेंज ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ इन मामलों को निपटाने के लिए कुल ₹1,491.21 करोड़ के संशोधित सेटलमेंट प्रस्ताव रखे हैं। यह खुलासा DRHP के 'अनिवार्य कानूनी मामलों' खंड में किया गया है, जो सर्वोच्च न्यायालय, SEBI और अन्य विधिक मंचों के समक्ष लंबित कार्यवाहियों से संबंधित है।
डार्क फाइबर मामला: क्या है विवाद
SEBI ने आरोप लगाया था कि कुछ ट्रेडिंग सदस्यों को एक अनधिकृत सेवा प्रदाता के माध्यम से विशेष पॉइंट-टू-पॉइंट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्हें कथित तौर पर बाज़ार के अन्य प्रतिभागियों की तुलना में लेटेंसी लाभ मिला। अप्रैल 2019 में SEBI के एक पूर्णकालिक सदस्य ने NSE को ब्याज सहित ₹62.58 करोड़ वापस करने और एक्सचेंज के नेटवर्क आर्किटेक्चर का समय-समय पर ऑडिट कराने का निर्देश दिया।
जून 2022 में एक अलग कानूनी कार्यवाही के तहत SEBI ने ₹7 करोड़ का अतिरिक्त जुर्माना लगाया। बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने दोनों आदेश रद्द कर दिए, जिसके बाद SEBI ने इन निर्णयों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। अपीलें अभी लंबित हैं। इस बीच NSE ने जून 2025 में ₹222.66 करोड़ का सेटलमेंट प्रस्ताव दिया, जिसे मार्च 2026 में संशोधित कर ₹267.65 करोड़ कर दिया गया। सेटलमेंट आवेदन को अभी अंतिम स्वीकृति मिलनी बाकी है।
को-लोकेशन विवाद: आरोप और कानूनी सफर
दूसरा मामला NSE की 'टिक-बाय-टिक' आर्किटेक्चर के अंतर्गत संचालित को-लोकेशन सुविधा से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ ट्रेडिंग सदस्यों को प्राथमिकता के आधार पर पहले एक्सेस और तीव्र कनेक्टिविटी दी गई। अप्रैल 2019 में SEBI ने NSE को ब्याज सहित ₹624.89 करोड़ लौटाने का आदेश दिया और कुछ गैर-मौद्रिक निर्देश भी जारी किए। हालाँकि, नियामक ने यह भी माना कि NSE ने SEBI के धोखाधड़ी एवं अनुचित व्यापार प्रथाओं संबंधी नियमों का उल्लंघन नहीं किया था।
जनवरी 2023 में SAT ने धनवापसी के आदेश को पलट दिया और कहा कि NSE ने स्टॉक एक्सचेंज एवं क्लियरिंग कॉर्पोरेशन नियमों के मुख्य प्रावधानों का उल्लंघन नहीं किया। तथापि, SAT ने NSE को 'इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड' में ₹100 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया। एक अलग आदेश में SAT ने SEBI द्वारा लगाया गया ₹1 करोड़ का जुर्माना भी रद्द किया।
सेटलमेंट प्रस्ताव और वित्तीय स्थिति
SEBI ने SAT के दोनों आदेशों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। को-लोकेशन विवाद को सुलझाने के लिए NSE ने जून 2025 में ₹1,164.73 करोड़ के सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा, जिसे मार्च 2026 में बढ़ाकर ₹1,223.56 करोड़ कर दिया गया। DRHP के अनुसार, को-लोकेशन से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय की अपीलें और सेटलमेंट आवेदन अभी भी लंबित हैं।
दोनों मामलों — को-लोकेशन और डार्क फाइबर — के संशोधित सेटलमेंट प्रस्तावों की संयुक्त राशि ₹1,491.21 करोड़ है। हालाँकि, NSE का वास्तविक अतिरिक्त नकद बहिर्वाह इससे कम हो सकता है, क्योंकि एक्सचेंज पहले ही SEBI के पास एक बड़ी राशि जमा कर चुका है। अगस्त 2024 में जारी वित्तीय जानकारी के अनुसार, SEBI के पास जमा राशि लगभग ₹1,107 करोड़ थी।
आगे क्या होगा
इन विवादों का समाधान NSE के बहुप्रतीक्षित IPO की राह में एक अहम कदम माना जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय में लंबित अपीलों और SEBI की अंतिम स्वीकृति के बिना, सेटलमेंट प्रक्रिया अधर में है। बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि इन मामलों का शीघ्र निपटारा एक्सचेंज के सार्वजनिक निर्गम की समयसीमा को सीधे प्रभावित करेगा।