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एनएसई के डीआरएचपी में खुलासा: कश्मीरी लाल राणा के डीमैट खाते में गलती से पहुंचे ₹1.33 करोड़ के शेयर, FIR और दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा

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एनएसई के डीआरएचपी में खुलासा: कश्मीरी लाल राणा के डीमैट खाते में गलती से पहुंचे ₹1.33 करोड़ के शेयर, FIR और दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा

सारांश

NSE के IPO DRHP में सामने आया एक अनोखा विवाद — एक्सचेंज के 5,000 शेयर गलती से एक व्यक्ति के डीमैट खाते में पहुंचे, जिनमें से 3,685 कथित तौर पर ₹1.33 करोड़ में बेच दिए गए। अब FIR और दिल्ली हाईकोर्ट में ₹1.44 करोड़ की वसूली का मुकदमा लंबित है।

मुख्य बातें

NSE ने SEBI के समक्ष दाखिल DRHP में कश्मीरी लाल राणा के डीमैट खाते में गलती से जमा हुए शेयरों के विवाद का खुलासा किया।
दिसंबर 2023 में 5,000 NSE इक्विटी शेयर बिना किसी खरीद अनुरोध या भुगतान के राणा के खाते में स्थानांतरित हुए।
इनमें से 3,685 शेयर कथित तौर पर लगभग ₹1.33 करोड़ में बेचे जा चुके थे।
NSE ने जुलाई 2025 में मुंबई BKC पुलिस स्टेशन में BNS के तहत FIR दर्ज कराई।
NSE और नुवामा वेल्थ फाइनेंस ने मई 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय में ₹1.44 करोड़ की वसूली का दीवानी मुकदमा दायर किया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने शेष 1,315 शेयरों और 5,260 बोनस शेयरों की बिक्री पर अंतरिम रोक लगाई है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के समक्ष दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में एक संवेदनशील कानूनी विवाद का खुलासा किया है। एक्सचेंज का आरोप है कि दिसंबर 2023 में उसके 5,000 इक्विटी शेयर बिना किसी खरीद अनुरोध और बिना किसी भुगतान के कश्मीरी लाल राणा नामक व्यक्ति के डीमैट खाते में गलती से जमा हो गए। इस मामले में NSE ने पुलिस शिकायत दर्ज कराई है और दिल्ली उच्च न्यायालय में दीवानी मुकदमा भी दायर किया गया है।

मामले का मूल घटनाक्रम

DRHP में दर्ज विवरण के अनुसार, दिसंबर 2023 में NSE के 5,000 शेयर बिना किसी वैध लेनदेन के राणा के डीमैट खाते में स्थानांतरित हो गए। NSE का कथित आरोप है कि राणा को यह ज्ञात था कि ये शेयर उनके नहीं हैं, फिर भी उन्होंने उन्हें अपने पास रखा। इससे पहले कि एक्सचेंज इस त्रुटि को सुधार पाता, इनमें से 3,685 शेयर कथित तौर पर बेचे जा चुके थे, जिनकी बिक्री से लगभग ₹1.33 करोड़ प्राप्त हुए।

पुलिस FIR और कानूनी कार्रवाई

NSE ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से जुलाई 2025 में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई। यह शिकायत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत दर्ज की गई जो कथित आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से संबंधित हैं।

इसके अतिरिक्त, NSE और नुवामा वेल्थ फाइनेंस लिमिटेड ने मई 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय में एक दीवानी मुकदमा दायर किया। इस मुकदमे में शेयरों और उनकी बिक्री से प्राप्त राशि की वसूली की मांग की गई है।

न्यायालय में वसूली की मांग

वादियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय से लगभग ₹1.44 करोड़ की वसूली का आदेश देने की अपील की है, जो कथित तौर पर बेचे गए शेयरों की बिक्री से प्राप्त राशि के बराबर है। इसके साथ ही शेष बचे 1,315 शेयरों और उन पर आवंटित 5,260 बोनस शेयरों को वापस दिलाने की भी मांग की गई है।

मई 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए मामले के अंतिम निपटारे तक शेष शेयरों और बोनस शेयरों की बिक्री या हस्तांतरण पर रोक लगा दी। NSE ने DRHP में स्पष्ट किया है कि 'यह मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है।'

IPO प्रक्रिया पर संभावित असर

यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब NSE अपने बहुप्रतीक्षित IPO की तैयारी में जुटा है। SEBI के नियमों के अनुसार, कंपनियों को DRHP में सभी लंबित कानूनी विवादों का उल्लेख करना अनिवार्य है। गौरतलब है कि NSE का IPO वर्षों से चर्चा में रहा है और नियामकीय अनुमोदन की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुजर रहा है। इस मामले का अंतिम निपटारा IPO की समयसीमा को प्रभावित कर सकता है।

आगे की राह

दिल्ली उच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई तय होना बाकी है, जबकि BKC पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR की जांच जारी है। निवेशक और बाज़ार विशेषज्ञ इस मामले के घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए हैं, क्योंकि यह सीधे NSE की IPO प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 शेयर किसी तीसरे व्यक्ति के खाते में कैसे पहुंचे — और इस त्रुटि का पता चलने में इतना समय क्यों लगा कि तब तक शेयर बिक चुके थे। IPO से पहले इस तरह के विवाद का सार्वजनिक होना NSE की परिचालन पारदर्शिता की परीक्षा है; SEBI को यह सुनिश्चित करना होगा कि DRHP की स्वीकृति प्रक्रिया में इस मामले के निपटारे की स्थिति को पर्याप्त महत्व दिया जाए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NSE के DRHP में किस शेयर विवाद का खुलासा हुआ है?
NSE ने अपने IPO के लिए दाखिल DRHP में खुलासा किया है कि दिसंबर 2023 में उसके 5,000 इक्विटी शेयर गलती से कश्मीरी लाल राणा के डीमैट खाते में जमा हो गए थे। इनमें से 3,685 शेयर कथित तौर पर लगभग ₹1.33 करोड़ में बेच दिए गए।
NSE ने इस मामले में क्या कानूनी कदम उठाए हैं?
NSE ने जुलाई 2025 में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन में BNS की धाराओं के तहत FIR दर्ज कराई है। इसके अलावा NSE और नुवामा वेल्थ फाइनेंस लिमिटेड ने मई 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय में ₹1.44 करोड़ की वसूली का दीवानी मुकदमा भी दायर किया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या आदेश दिया है?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मई 2025 में एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए मामले के अंतिम निपटारे तक शेष 1,315 शेयरों और उन पर मिले 5,260 बोनस शेयरों की बिक्री या हस्तांतरण पर रोक लगा दी है। यह मामला अभी न्यायालय में लंबित है।
NSE और नुवामा वेल्थ ने कितनी रकम की वसूली की मांग की है?
दोनों वादियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में लगभग ₹1.44 करोड़ की वसूली की मांग की है, जो बेचे गए शेयरों की बिक्री से प्राप्त राशि के बराबर बताई गई है। इसके साथ ही शेष 1,315 शेयर और 5,260 बोनस शेयर वापस दिलाने की भी अपील की गई है।
इस विवाद का NSE के IPO पर क्या असर पड़ सकता है?
SEBI के नियमों के तहत कंपनियों को DRHP में सभी लंबित कानूनी विवाद दर्ज करने होते हैं, इसलिए NSE ने इसका खुलासा किया है। यह मामला अदालत में लंबित होने के कारण IPO की अनुमोदन प्रक्रिया और समयसीमा को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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