एनएसई के डीआरएचपी में खुलासा: कश्मीरी लाल राणा के डीमैट खाते में गलती से पहुंचे ₹1.33 करोड़ के शेयर, FIR और दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के समक्ष दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में एक संवेदनशील कानूनी विवाद का खुलासा किया है। एक्सचेंज का आरोप है कि दिसंबर 2023 में उसके 5,000 इक्विटी शेयर बिना किसी खरीद अनुरोध और बिना किसी भुगतान के कश्मीरी लाल राणा नामक व्यक्ति के डीमैट खाते में गलती से जमा हो गए। इस मामले में NSE ने पुलिस शिकायत दर्ज कराई है और दिल्ली उच्च न्यायालय में दीवानी मुकदमा भी दायर किया गया है।
मामले का मूल घटनाक्रम
DRHP में दर्ज विवरण के अनुसार, दिसंबर 2023 में NSE के 5,000 शेयर बिना किसी वैध लेनदेन के राणा के डीमैट खाते में स्थानांतरित हो गए। NSE का कथित आरोप है कि राणा को यह ज्ञात था कि ये शेयर उनके नहीं हैं, फिर भी उन्होंने उन्हें अपने पास रखा। इससे पहले कि एक्सचेंज इस त्रुटि को सुधार पाता, इनमें से 3,685 शेयर कथित तौर पर बेचे जा चुके थे, जिनकी बिक्री से लगभग ₹1.33 करोड़ प्राप्त हुए।
पुलिस FIR और कानूनी कार्रवाई
NSE ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से जुलाई 2025 में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई। यह शिकायत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत दर्ज की गई जो कथित आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से संबंधित हैं।
इसके अतिरिक्त, NSE और नुवामा वेल्थ फाइनेंस लिमिटेड ने मई 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय में एक दीवानी मुकदमा दायर किया। इस मुकदमे में शेयरों और उनकी बिक्री से प्राप्त राशि की वसूली की मांग की गई है।
न्यायालय में वसूली की मांग
वादियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय से लगभग ₹1.44 करोड़ की वसूली का आदेश देने की अपील की है, जो कथित तौर पर बेचे गए शेयरों की बिक्री से प्राप्त राशि के बराबर है। इसके साथ ही शेष बचे 1,315 शेयरों और उन पर आवंटित 5,260 बोनस शेयरों को वापस दिलाने की भी मांग की गई है।
मई 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए मामले के अंतिम निपटारे तक शेष शेयरों और बोनस शेयरों की बिक्री या हस्तांतरण पर रोक लगा दी। NSE ने DRHP में स्पष्ट किया है कि 'यह मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है।'
IPO प्रक्रिया पर संभावित असर
यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब NSE अपने बहुप्रतीक्षित IPO की तैयारी में जुटा है। SEBI के नियमों के अनुसार, कंपनियों को DRHP में सभी लंबित कानूनी विवादों का उल्लेख करना अनिवार्य है। गौरतलब है कि NSE का IPO वर्षों से चर्चा में रहा है और नियामकीय अनुमोदन की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुजर रहा है। इस मामले का अंतिम निपटारा IPO की समयसीमा को प्रभावित कर सकता है।
आगे की राह
दिल्ली उच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई तय होना बाकी है, जबकि BKC पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR की जांच जारी है। निवेशक और बाज़ार विशेषज्ञ इस मामले के घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए हैं, क्योंकि यह सीधे NSE की IPO प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा है।