महाराष्ट्र के 21 जिलों में सूखे जैसे हालात, शनिवार तक नोटिफिकेशन की उम्मीद: संजय निरुपम
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 24 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र के 21 जिलों में कम बारिश के चलते उत्पन्न सूखे जैसे हालात पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों की स्थिति का विस्तृत सर्वे करा रही है और शनिवार तक आधिकारिक सूखा अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी होने की संभावना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राहत कार्य नोटिफिकेशन के तुरंत बाद किसानों की अपेक्षाओं के अनुरूप शुरू किए जाएंगे।
सूखा सर्वे और सरकार की तैयारी
निरुपम के अनुसार राज्य के 21 जिलों में अपर्याप्त वर्षा के कारण खेती पर गहरा असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित सभी मंत्रियों को उनके संबंधित जिलों में जमीनी स्तर पर सर्वे के लिए भेजा गया है। सरकार खेत-खलिहान तक जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन कर रही है।
उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार शनिवार तक सूखा नोटिफिकेशन जारी होगा, जिसके बाद प्रभावित किसानों को राहत पहुँचाने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से आरंभ होगी। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कम मानसून वर्षा का यह मुद्दा कई वर्षों से किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनता रहा है।
राम मंदिर के नए नियमों पर निरुपम का रुख
राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ द्वारा बनाए गए नियमों पर निरुपम ने कहा कि ये कदम पारदर्शिता के लिहाज़ से ज़रूरी हैं। उन्होंने चंदे और चढ़ावे को लेकर सामने आए विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे मंदिर की छवि को नुकसान हुआ और श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत हुईं।
निरुपम ने कहा कि देशभर के श्रद्धालु भक्ति और श्रद्धा के साथ मंदिर में चढ़ावा अर्पित करते हैं, और उनकी अपेक्षा है कि इस धनराशि में किसी प्रकार की अनियमितता न हो। उनके अनुसार नए सीईओ को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे कर्मचारियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके और चढ़ावे में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
आईआईटी बॉम्बे छात्र मामले पर सतर्क रुख
आईआईटी बॉम्बे में एक छात्र की आत्महत्या के मामले पर निरुपम ने संयमित रुख अपनाते हुए कहा कि जाँच पूरी होने से पहले यह मान लेना उचित नहीं कि छात्र ने नकल की थी। उन्होंने बताया कि संस्थान की ओर से पहले नकल से जुड़ा एक नैरेटिव सामने आया, लेकिन बाद में कार्रवाई वापस ली गई और माफी भी माँगी गई, जिसके बाद छात्रों में आक्रोश फैला और पिछले करीब एक सप्ताह से धरना-प्रदर्शन जारी है।
निरुपम ने एक प्रोफेसर पर जाति विशेष के छात्रों को प्रताड़ित करने के आरोपों का भी उल्लेख किया और निष्पक्ष जाँच की माँग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों को जाति के आधार पर बाँटना अनुचित है, और जाँच के दौरान किसी भी रूप में नकल की प्रवृत्ति को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
संस्थान की छवि और संतुलन की अपील
निरुपम ने आईआईटी बॉम्बे को देश का प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थान बताते हुए कहा कि इस घटना के कारण पूरे संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों और छात्रों दोनों के हितों का संतुलन बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों पर अनुचित दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव और छात्र मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज़ हो रही है। मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जाँच पर सभी पक्षों की नज़रें टिकी हैं।