महाराष्ट्र में मानसून की बेरुखी: शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार को घेरा, 20 से ज़्यादा जिलों में सूखे की मार
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 5 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला, जब भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के अधिकांश हिस्सों से मानसून की आधिकारिक वापसी की घोषणा की। पार्टी ने चेतावनी दी कि राज्य एक गंभीर सूखे की कगार पर खड़ा है और लाखों किसान तत्काल राहत के बिना बर्बादी की ओर बढ़ रहे हैं।
मानसून की वापसी और सूखे का संकट
पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि बिना पर्याप्त बारिश के मानसून के चले जाने से महाराष्ट्र के 36 में से 20 से अधिक जिलों में वर्षा की भारी कमी दर्ज की गई है। संपादकीय के अनुसार, राज्य का आधे से ज़्यादा हिस्सा इस समय बुरी तरह सूखे की चपेट में है।
रिपोर्टों के अनुसार, मानसून के देर से आने के कारण शुरुआती बुआई बाधित हुई और लगभग दो महीने तक वर्षाविहीन रहने से बुआई की तमाम कोशिशें व्यर्थ हो गईं। इसके परिणामस्वरूप मराठवाड़ा, विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र में फसलें बड़े पैमाने पर बर्बाद हो गई हैं।
जिलेवार बारिश की कमी के आँकड़े
'सामना' के संपादकीय में जिलेवार आँकड़े प्रस्तुत किए गए। इनके अनुसार, सोलापुर में इस सीजन सबसे अधिक 58 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई। बीड में यह कमी 51 प्रतिशत, हिंगोली में 49 प्रतिशत, जालना में 48 प्रतिशत और अहिल्यानगर तथा धाराशिव दोनों में 46 प्रतिशत रही।
गौरतलब है कि तटीय जिला सिंधुदुर्ग, जो सामान्यतः भारी वर्षा के लिए जाना जाता है, वहाँ भी इस बार 36 प्रतिशत की कमी रही — जो इस संकट की व्यापकता को दर्शाता है।
प्रशासन पर आरोप: हरे खेत दिखाकर गुमराह करने का आरोप
ठाकरे गुट ने राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सूखाग्रस्त सोलापुर में स्थानीय अधिकारियों ने गार्डियन मिनिस्टर को जानबूझकर सिंचाई वाले हरे-भरे खेत का दौरा कराया, जबकि आसपास के क्षेत्रों में फसलें पूरी तरह सूख चुकी थीं। संपादकीय ने इसे पीड़ित किसानों के साथ 'क्रूर मज़ाक' करार दिया।
संपादकीय में यह भी कहा गया कि मानसून की वापसी के साथ ही वे मंत्री और जनप्रतिनिधि भी सचिवालय लौट गए, जो कुछ समय पहले फोटो खिंचवाने के लिए खेतों की मेड़ों पर नज़र आते थे — और किसान अब भी तत्काल राहत की बाट जोह रहे हैं।
असामान्य तापमान ने बढ़ाई मुश्किलें
संकट को और गहरा करने में असामान्य मौसम की भी अहम भूमिका रही। आमतौर पर अक्टूबर में महसूस होने वाली गर्मी इस बार अगस्त के मध्य में ही शुरू हो गई और राज्यभर में तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। 'सामना' के अनुसार, इस लगातार उमस भरी गर्मी ने चरागाह, कुएँ और स्थानीय जल स्रोत सुखा दिए, जिससे पीने के पानी और मवेशियों के चारे की भारी किल्लत पैदा हो गई है।
किसान आत्महत्याएँ और राजनीतिक जवाबदेही
संपादकीय में चेताया गया कि भारी आर्थिक तंगी के चलते विदर्भ और मराठवाड़ा में किसान आत्महत्याओं का एक नया दौर शुरू हो चुका है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने स्पष्ट कहा कि महज सूखा घोषित कर देने से सरकार अपनी ज़िम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाती — ज़मीनी स्तर पर ठोस राहत की दरकार है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में शासन करने वाली महायुति सरकार और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के बीच कृषि संकट को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। आगामी हफ्तों में राहत वितरण और सूखा सर्वेक्षण की प्रक्रिया ही यह तय करेगी कि सरकार किसानों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।