सूखा राहत के लिए आम नागरिक नहीं, बिचौलियों और ठेकेदारों से वसूली हो: शिवसेना (यूबीटी)
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस आग्रह की तीखी आलोचना की, जिसमें उन्होंने नागरिकों से निजी समारोहों में कटौती कर अपनी बचत सूखा राहत कोष में दान करने को कहा था। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में यह कहा गया कि महंगाई और आर्थिक संकट से पहले से पीड़ित जनता की जेब पर बोझ डालने के बजाय सरकार को भ्रष्ट ठेकेदारों, कमीशन-एजेंटों और राजनीतिक बिचौलियों पर शिकंजा कसना चाहिए।
किसान आत्महत्याएँ और कृषि संकट
संपादकीय में बताया गया कि परभणी, यवतमाल, सोलापुर और हिंगोली जिलों में गंभीर सूखे की मार झेल रहे कर्जदार किसानों में से चार किसानों ने मात्र दो दिनों के भीतर आत्महत्या कर ली। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार की ओर से तत्काल और सीधी सहायता नहीं मिली, तो सूखाग्रस्त क्षेत्र 'कब्रिस्तान' में तब्दील हो सकते हैं और इसकी पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री तथा उनके प्रशासन पर होगी।
बिचौलियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की माँग
ठाकरे गुट ने तर्क दिया कि शादी और नामकरण जैसे छोटे पारिवारिक समारोहों में कटौती करने की अपील असंवेदनशील है। संपादकीय के अनुसार, सरकार को आंतरिक भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और ठेकेदारों के कमीशन पर सख्ती कर राहत का धन जुटाना चाहिए।
पार्टी ने आरोप लगाया — 'राज्य सरकार कमीशन-एजेंटों और ठेकेदारों की सरकार बन गई है। हर तरफ लूट मची है। ठेकेदारों को सरकारी खजाने का पैसा देने और अपनी जेबें भरने के लिए गैर-जरूरी परियोजनाएं बनाई जा रही हैं। अगर मुख्यमंत्री इस लूट को भी रोक दें, तो इससे सूखा प्रभावित लोगों को फायदा होगा।'
बुनियादी ढाँचे में कथित वित्तीय अनियमितताएँ
संपादकीय में कथित तौर पर कोंकण क्षेत्र में तटीय भूमि की विवादास्पद बिक्री और शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे से जुड़े भारी वित्तीय लेन-देन का उल्लेख किया गया। आलोचकों का कहना है कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अक्सर ठेकेदारों के हित में दूसरी जगहों पर लगाया जाता है।
सूखा राहत के लिए सुझाए गए वैकल्पिक उपाय
पार्टी ने राज्य सरकार के सामने कई ठोस प्रस्ताव रखे। इनमें राजनीतिक सहयोगियों के लिए निर्धारित बकाया राशि को सीधे सूखा राहत कोष में स्थानांतरित करना, मुंबई के बड़े बिल्डरों, स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के डेवलपर्स और वरिष्ठ नौकरशाहों से अनिवार्य योगदान लेना शामिल है। इसके अलावा केंद्र सरकार से पीएम केयर फंड में से ₹2,000 करोड़ से ₹4,000 करोड़ की राशि महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र के लिए आवंटित करने की माँग भी की गई।
पार्टी ने यह भी कहा कि मंत्रियों द्वारा एक महीने का वेतन दान करने जैसे सांकेतिक कदम, सत्ताधारी नेताओं के पास उपलब्ध भारी संसाधनों को देखते हुए महज दिखावे से अधिक कुछ नहीं हैं।
राजनीतिक खर्च और दल-बदल पर निशाना
संपादकीय में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और हॉर्स-ट्रेडिंग पर भी तीखा प्रहार किया गया। सत्ताधारी गठबंधन से माँग की गई कि चुनाव प्रचार और दल-बदल के लिए रखे गए फंड को तत्काल प्रभाव से सूखाग्रस्त किसानों की मदद में लगाया जाए। शिवसेना (यूबीटी) ने नेतृत्व से आग्रह किया कि भ्रष्ट अधिकारियों, ठेकेदारों और राजनीतिक बिचौलियों की मिलीभगत तोड़कर राज्य के 11 करोड़ नागरिकों को वास्तविक राहत प्रदान की जाए।