14 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उद्धव ठाकरे का महायुति सरकार पर हमला: परीक्षा लीक, महंगाई और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उद्धव ठाकरे का महायुति सरकार पर हमला: परीक्षा लीक, महंगाई और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर सवाल

सारांश

गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर उद्धव ठाकरे के मुखपत्र 'सामना' ने महायुति सरकार को परीक्षा लीक, महंगाई, कृषि संकट और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर घेरा। संपादकीय में सरकार को ही महाराष्ट्र का सबसे बड़ा 'विघ्न' बताया गया — और भगवान गणेश से राज्य को बचाने की प्रार्थना की गई।

मुख्य बातें

शिवसेना (UBT) के मुखपत्र 'सामना' ने 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर महायुति सरकार पर कड़ा संपादकीय प्रकाशित किया।
MPSC समेत नेट और टीईटी के परीक्षा प्रश्नपत्र लीक पर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए गए।
चीनी, दूध, सीएनजी, एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को त्योहारी मौसम में आम जनता पर बोझ बताया गया।
अल नीनो के प्रभाव से खरीफ फसलों पर संकट और रबी मौसम के लिए सूखे की चेतावनी दी गई।
पुणे के कार्यकर्ता विद्यानंद बापट पर हमले का ज़िक्र; सरकार पर ध्वनि प्रदूषण विरोधियों को 'शहरी नक्सल' बताने का आरोप।
संपादकीय में महाराष्ट्र की प्रगतिशील राजनीतिक पहचान को धार्मिक चरमपंथ में धकेले जाने की चेतावनी दी गई।

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर तीखा प्रहार किया। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में 14 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक कड़े संपादकीय में ठाकरे खेमे ने आरोप लगाया कि राज्य इस समय मुद्रास्फीति, व्यवस्थागत भ्रष्टाचार, कृषि संकट और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की चपेट में है, और सत्तारूढ़ दल स्वयं ही महाराष्ट्र के लिए सबसे बड़ा 'विघ्न' बन चुका है।

महंगाई से आम जनता बेहाल

संपादकीय में त्योहारी मौसम से ठीक पहले आम नागरिकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को रेखांकित किया गया। चीनी, दूध, सीएनजी, घरेलू एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि का हवाला देते हुए कहा गया कि आम आदमी का त्योहारी बजट बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालांकि, संपादकीय में यह भी कहा गया कि इतनी मुश्किलों के बावजूद श्रद्धालु भगवान गणेश का स्वागत पूरे उत्साह और भक्ति से करेंगे।

परीक्षा लीक और युवाओं का टूटता भरोसा

ठाकरे खेमे ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के प्रश्नपत्र लीक मामले पर भी सरकार को घेरा। नेट और टीईटी में हुए घोटालों के बाद MPSC की परीक्षाएं भी रद्द करनी पड़ीं। सरकार द्वारा घोषित एसआईटी जांच और प्रशासनिक सुधारों के दावों को खोखला बताते हुए संपादकीय में सवाल किया गया कि हज़ारों महत्वाकांक्षी युवाओं के चकनाचूर हुए सपनों के लिए आखिर कौन जवाबदेह होगा।

किसान संकट और सूखे की आशंका

अल नीनो के गंभीर प्रभाव का हवाला देते हुए संपादकीय ने चेतावनी दी कि राज्य में सूखे की स्थिति और बिगड़ सकती है। खरीफ की फसलें झुलसे खेतों में नष्ट हो रही हैं और अपर्याप्त वर्षा अगले रबी मौसम पर भी संकट का साया डाल रही है। ग्रामीण आजीविका गंभीर खतरे में बताई गई है और किसानों की आत्महत्याओं का सिलसिला जारी रहने पर चिंता जताई गई।

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और ध्वनि प्रदूषण विवाद

संपादकीय में पुणे के सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट पर हुए हालिया हमले का ज़िक्र किया गया, जो सार्वजनिक समारोहों में उच्च ध्वनि वाले डीजे सिस्टम के विरोध के लिए जाने जाते हैं। ठाकरे खेमे के अनुसार, ध्वनि प्रदूषण की समस्या सुलझाने के बजाय सत्ताधारी दल ने कार्यकर्ता को 'शहरी नक्सल' और 'बाहरी' करार दिया, जबकि मुख्यमंत्री ने निर्णायक कार्रवाई के बजाय टालमटोल का रुख अपनाया। संपादकीय में यह भी आरोप लगाया गया कि धार्मिक चरमपंथ की छाया में महाराष्ट्र की प्रगतिशील पहचान धूमिल हो रही है।

क्या होगा आगे

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की सार्वजनिक गणेश उत्सव की ऐतिहासिक सामाजिक-राजनीतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए संपादकीय ने खेद जताया कि यह परंपरा अब कॉरपोरेट अधिग्रहण और राजनीतिक दिखावे की भेंट चढ़ रही है। शिवसेना (UBT) ने जनता से अपील की कि वे अपनी कठिनाइयों के वास्तविक कारणों को पहचानें। संपादकीय का समापन भगवान गणेश से जनता को विवेक प्रदान करने और राज्य की रक्षा की प्रार्थना के साथ हुआ — जो राजनीतिक संदेश को धार्मिक भावनाओं से जोड़ने का स्पष्ट प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक प्रहार है — जो परीक्षा लीक से लेकर कृषि संकट तक हर मोर्चे पर महायुति को घेरता है। यह ऐसे समय में आया है जब शिवसेना (UBT) विधानसभा चुनावी नतीजों के बाद अपनी ज़मीन पुनर्निर्मित कर रही है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि संपादकीय में उठाई गई समस्याएं — किसान आत्महत्याएं, परीक्षा भ्रष्टाचार, ध्वनि प्रदूषण — ऐसे मुद्दे हैं जो पिछली उद्धव सरकार के कार्यकाल में भी बने रहे। असली सवाल यह है कि क्या यह विपक्षी आवाज़ वैकल्पिक नीति-दृष्टि प्रस्तुत कर पाती है, या केवल सरकारी विफलताओं की सूची तक सीमित रहती है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उद्धव ठाकरे ने महायुति सरकार पर क्या आरोप लगाए?
उद्धव ठाकरे के मुखपत्र 'सामना' ने महायुति सरकार पर परीक्षा लीक, बेलगाम महंगाई, कृषि संकट और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने के आरोप लगाए। संपादकीय में सत्ताधारी दल को महाराष्ट्र का सबसे बड़ा 'विघ्न' बताया गया।
महाराष्ट्र में परीक्षा लीक का मामला क्या है?
महाराष्ट्र में नेट और टीईटी घोटालों के बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के प्रश्नपत्र भी लीक होने के कारण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। सरकार ने एसआईटी जांच की घोषणा की है, लेकिन ठाकरे खेमे ने इसे अपर्याप्त बताया है।
विद्यानंद बापट पर हमले का ज़िक्र 'सामना' में क्यों किया गया?
पुणे के कार्यकर्ता विद्यानंद बापट, जो सार्वजनिक समारोहों में उच्च ध्वनि वाले डीजे का विरोध करते हैं, उन पर हाल ही में हमला हुआ। 'सामना' ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ने उन्हें 'शहरी नक्सल' बताया और मुख्यमंत्री ने निर्णायक कार्रवाई नहीं की।
महाराष्ट्र में कृषि संकट कितना गंभीर है?
अल नीनो के प्रभाव के कारण खरीफ फसलें बर्बाद हो रही हैं और अपर्याप्त वर्षा से रबी मौसम भी संकट में है। 'सामना' के अनुसार किसानों की आत्महत्याएं जारी हैं और ग्रामीण आजीविका गंभीर खतरे में है।
गणेश चतुर्थी के मौके पर यह संपादकीय क्यों महत्वपूर्ण है?
लोकमान्य तिलक ने गणेश उत्सव को सामाजिक एकता और राजनीतिक जागरण के मंच के रूप में शुरू किया था। 'सामना' ने इस ऐतिहासिक संदर्भ का उपयोग करते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि उत्सव की मूल भावना कॉरपोरेट अधिग्रहण और राजनीतिक दिखावे में खो रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 1 साल पहले