केरल: CPI(M) बैठक में विजयन और गोविंदन पर उठे सवाल, कन्नूर प्रतिनिधियों ने की शीर्ष नेतृत्व की आलोचना
सारांश
मुख्य बातें
सीपीआई (एम) के परंपरागत गढ़ कन्नूर में ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। 14 सितंबर 2026 को कोझिकोड में आयोजित राज्य समिति की विस्तारित बैठक में प्रतिनिधियों ने पार्टी की चुनावी हार की जिम्मेदारी आम कार्यकर्ताओं और निचली समितियों पर डालने की कोशिश पर खुलकर एतराज जताया। बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और पार्टी के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन पर परोक्ष रूप से दबाव बना।
बैठक का घटनाक्रम
चर्चा के पहले दिन राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन द्वारा पेश किए गए सुधार रिपोर्ट के मसौदे को सबसे तीखी आलोचना कन्नूर के प्रतिनिधियों से मिली। उनका तर्क था कि पार्टी की विफलताओं का ठीकरा उन कार्यकर्ताओं पर नहीं फोड़ा जा सकता, जिनके हाथ में निर्णय लेने की कोई वास्तविक शक्ति नहीं थी।
इसके बाद कोल्लम जिले के प्रतिनिधियों ने भी इसी सुर में आलोचना की, जिससे स्पष्ट हुआ कि असंतोष केवल एक जिले तक सीमित नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद से सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) कोई भी बड़ा चुनाव नहीं जीत पाया है।
ड्राफ्ट रिपोर्ट पर सवाल
प्रतिनिधियों ने ड्राफ्ट रिपोर्ट की इस बात के लिए आलोचना की कि उसमें हार की अधिकांश जिम्मेदारी संगठन के निचले स्तरों पर डाली गई थी। रिपोर्ट में पय्यानूर में उम्मीदवार चयन की गलतियों का उल्लेख है, लेकिन तालिपारम्बा में मिली हार को उचित महत्व न दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए।
इसके अलावा, बातचीत के दौरान के.के. शैलजा को दूसरी सीट पर भेजने के फैसले और ए.एन. शमसीर की उम्मीदवारी को संभालने के तरीके पर भी असहमति जताई गई।
नेतृत्व की जवाबदेही पर जोर
कन्नूर के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पार्टी में नेताओं और आम कार्यकर्ताओं के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं। उनका कहना था कि नेतृत्व के करीबी लोगों का बचाव करने और दूसरों की आलोचना करने की प्रवृत्ति ने पार्टी की साख को नुकसान पहुँचाया है।
गौरतलब है कि ड्राफ्ट रिपोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) सहित केंद्रीय एजेंसियों की जाँच को पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में दर्शाया गया था, लेकिन प्रतिनिधियों के बीच इस तर्क को ज़्यादा सहानुभूति नहीं मिली। इसके बजाय, चर्चाओं से यह स्पष्ट संदेश उभरा कि सीपीआई (एम) का मौजूदा संकट काफी हद तक अंदरूनी है।
संगठनात्मक संकट पर चर्चा
बैठक में पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक के सिकुड़ने, सक्रिय सदस्यों की संख्या में गिरावट और जन-संगठनों के कमजोर होते समर्थन पर विशेष चिंता जताई गई। प्रतिनिधियों ने यह भी रेखांकित किया कि पार्टी नेता जनता से सीधे जुड़ने और अपने राजनीतिक रुख को प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने में नाकाम रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि लगातार हार से मिली चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया गया और मौजूदा संकट नेतृत्व की समय पर हस्तक्षेप न कर पाने का परिणाम है। यह देखने वाली बात होगी कि बैठक के अंत में पार्टी नेतृत्व इन सवालों का जवाब किस रूप में देता है।