केरल: सीपीआई (एम) बैठक में विजयन और गोविंदन पर उठे सवाल, कन्नूर प्रतिनिधियों ने नेतृत्व को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई (एम) — की राज्य समिति की विस्तारित बैठक में 14 सितंबर 2026 को पार्टी के भीतर गहरी असंतुष्टि खुलकर सामने आई। कोझिकोड में आयोजित इस बैठक में कन्नूर और कोल्लम के प्रतिनिधियों ने पार्टी की करारी चुनावी हार की जिम्मेदारी आम कार्यकर्ताओं पर डालने की कोशिश को सीधे चुनौती दी और परोक्ष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन तथा पार्टी राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन पर निशाना साधा।
मुख्य घटनाक्रम
बातचीत के पहले दिन की सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह रही कि आलोचना का सबसे तीखा स्वर कन्नूर से उठा — वही कन्नूर जो परंपरागत रूप से सीपीआई (एम) का अभेद्य गढ़ माना जाता है। प्रतिनिधियों ने एम.वी. गोविंदन द्वारा प्रस्तुत सुधार रिपोर्ट के मसौदे को सीधे कठघरे में खड़ा किया। उनका तर्क था कि जब फैसले लेने की असली शक्ति राज्य नेतृत्व के पास थी, तो नाकामियों का बोझ जमीनी कार्यकर्ताओं पर नहीं डाला जा सकता।
इसके तुरंत बाद कोल्लम के प्रतिनिधि भी आलोचना में शामिल हो गए, जिससे स्पष्ट हो गया कि यह नाराजगी किसी एक जिले तक सीमित नहीं, बल्कि राज्यव्यापी है।
ड्राफ्ट रिपोर्ट पर आपत्तियाँ
प्रतिनिधियों ने ड्राफ्ट रिपोर्ट में तालिपारम्बा में उम्मीदवार चयन से जुड़े विवाद का उल्लेख न होने पर भी गंभीर आपत्ति जताई। रिपोर्ट में पय्यानूर में मिली हार और उम्मीदवार चुनाव में हुई गलतियों का जिक्र था, लेकिन तालिपारम्बा की चर्चा से जानबूझकर बचा गया — यह चूक प्रतिनिधियों को खलने लगी।
बैठक में के.के. शैलजा को दूसरी सीट पर स्थानांतरित करने के फैसले और ए.एन. शमसीर की उम्मीदवारी को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए।
नेतृत्व की जवाबदेही पर बहस
कन्नूर के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पार्टी में नेताओं और सामान्य कार्यकर्ताओं के लिए अलग-अलग मानदंड लागू होते हैं। उनका कहना था कि नेतृत्व के करीबी लोगों को बचाने और बाकियों की आलोचना करने की प्रवृत्ति ने पार्टी की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँचाया है।
पार्टी के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की संसदीय महत्वाकांक्षाओं और लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान पनपी व्यक्ति-केंद्रित राजनीति की भी जमकर आलोचना हुई। प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि शीर्ष नेतृत्व पहले अपने फैसलों की जिम्मेदारी ले, फिर कार्यकर्ताओं से आत्मसुधार की अपेक्षा करे।
संगठनात्मक संकट की तस्वीर
बैठक में पार्टी के व्यापक संगठनात्मक संकट पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक के क्षरण, सक्रिय सदस्यों की घटती संख्या और जन-संगठनों से मिलने वाले समर्थन के कमजोर पड़ने की ओर ध्यान दिलाया। पार्टी नेताओं की आम जनता से सीधे संवाद करने और पार्टी के राजनीतिक रुख को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुँचाने में नाकामी को भी एक बड़ी कमज़ोरी बताया गया।
ड्राफ्ट रिपोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय एजेंसियों की जाँच को — जो विजयन और उनके परिवार के खिलाफ चल रही है — पार्टी की मुश्किलों का बाहरी कारण बताने की कोशिश की गई, लेकिन इस तर्क से प्रतिनिधियों में कोई विशेष सहानुभूति नहीं बनी। उलटे, चर्चाओं ने यह संकेत दिया कि सीपीआई (एम) का मौजूदा संकट मुख्यतः अंदरूनी है।
लगातार हार और आगे का रास्ता
गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद से सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) कोई भी चुनाव नहीं जीत सका है और हालिया विधानसभा चुनावों में उसे करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। प्रतिनिधियों ने कहा कि लगातार मिलती रही हार की चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया और मौजूदा संकट शीर्ष नेतृत्व की समय पर सुधारात्मक कार्रवाई न कर पाने का प्रत्यक्ष परिणाम है।
यह बैठक पार्टी के भीतर असंतोष के नए स्तर की गवाह बनी है — और आने वाले दिनों में विजयन-गोविंदन की जोड़ी की पकड़ कितनी मजबूत रह पाती है, यह देखना अहम होगा।