23 जुलाई 2026
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सीपीआईएम का बड़ा स्वीकारोक्ति: केरल हार के लिए विजयन और गोविंदन की राजनीतिक चूकें जिम्मेदार

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सीपीआईएम का बड़ा स्वीकारोक्ति: केरल हार के लिए विजयन और गोविंदन की राजनीतिक चूकें जिम्मेदार

सारांश

केरल चुनाव में हार के बाद सीपीआई(एम) ने पहली बार खुलकर माना कि पिनारयी विजयन की अहंकारी कार्यशैली और एमवी गोविंदन का नेतृत्व हार का कारण बने। पर जवाबदेही की माँग के बावजूद नेतृत्व वही रहा — यह आत्ममंथन है या महज़ औपचारिकता?

मुख्य बातें

सीपीआई(एम) की सचिवालय रिपोर्ट ने 8 जून को केरल विधानसभा हार के लिए कई राजनीतिक गलतियाँ स्वीकार कीं।
पिनारयी विजयन की अहंकारी कार्यशैली और एम.वी.
गोविंदन के नेतृत्व की पार्टी के भीतर व्यापक आलोचना हुई।
वेल्लापल्ली नटेसन से दूरी न बनाना और थालीपरम्बा में उम्मीदवार चयन की चूक को आधिकारिक रूप से स्वीकारा गया।
अय्यप्पा संगमम में योगी आदित्यनाथ का संदेश पढ़े जाने से उपजे विवाद को भी हार का कारण माना गया।
विशेष पूर्ण सत्र की माँग टाली गई; पार्टी ने सुधार के लिए तीन महीने का समय देने का विकल्प चुना।
विजयन को सर्वसम्मति से विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया — नेतृत्व में कोई बड़ा बदलाव नहीं।

केरल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] की राज्य इकाई ने 8 जून को एक असामान्य रूप से स्पष्ट आत्ममंथन करते हुए कई राजनीतिक गलतियों को औपचारिक रूप से स्वीकार किया है। पार्टी सचिवालय की समीक्षा रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन की कार्यशैली और राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के नेतृत्व को हार के प्रमुख कारणों में गिनाया गया है। राज्य समिति सोमवार को इस रिपोर्ट पर विचार करेगी।

सचिवालय रिपोर्ट में क्या स्वीकारा गया

सचिवालय की समीक्षा रिपोर्ट में माना गया है कि पार्टी ने एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन से उचित दूरी न बनाकर एक बड़ी रणनीतिक भूल की। इसके अलावा, थालीपरम्बा सीट पर उम्मीदवार चयन में गंभीर चूक को भी स्वीकार किया गया है।

रिपोर्ट में अय्यप्पा संगमम कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश पढ़े जाने से उपजे विवाद का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने कार्यक्रम की साख को नुकसान पहुँचाया और पार्टी को राजनीतिक रूप से कमज़ोर किया।

विजयन और गोविंदन पर आंतरिक आलोचना

पार्टी सूत्रों के अनुसार, क्षेत्रीय, जिला और राज्य स्तरीय बैठकों में बार-बार यह बात उठी कि हार का एक बड़ा कारण पिनारयी विजयन की कार्यशैली थी। कई सदस्यों ने इसे नेतृत्व से जुड़ी उनकी अहंकारी छवि बताया। राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के कामकाज के तरीके की भी आलोचना हुई और कार्यकर्ताओं व जनता से संवाद की कमी पर असंतोष व्यक्त किया गया।

गौरतलब है कि इन आलोचनाओं के बावजूद, रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि पिनारयी विजयन को विपक्ष का नेता (एलओपी) नियुक्त करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था।

नेतृत्व परिवर्तन की मांग और उसका हश्र

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि विजयन का शक्तिशाली राज्य सचिवालय में अभी भी पर्याप्त प्रभाव है, और इसी कारण व्यापक नेतृत्व समीक्षा की मांगों के बावजूद उन्हें शीर्ष पद पर बने रहने में सहायता मिली।

कई सदस्यों ने चुनावी हार की गहन समीक्षा के लिए विशेष राज्य पूर्ण सत्र बुलाने की माँग की थी। उनका तर्क था कि इस तरह की बैठक से विजयन और गोविंदन दोनों की भूमिकाओं की जाँच होती और जवाबदेही पर खुली बहस का रास्ता खुलता। हालाँकि, नेतृत्व ने इस माँग को सफलतापूर्वक टाल दिया।

आगे की राह: सुधार, पर नेतृत्व वही

पार्टी ने निचली समितियों में चर्चा का एक और दौर आयोजित करने और सुधारात्मक उपायों को लागू करने के लिए तीन महीने का समय देने का विकल्प चुना है। यह रणनीति सुधार की दिशा में एक संकेत देती है, लेकिन नेतृत्व में कोई बड़ा फेरबदल नहीं करती।

यह ऐसे समय में आया है जब केरल में वामपंथी आंदोलन अपनी ज़मीन फिर से हासिल करने की कोशिश में है। अगले तीन महीनों में पार्टी किस तरह के संगठनात्मक बदलाव लाती है, यह देखना निर्णायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना है नहीं — क्योंकि जिन नेताओं को हार का जिम्मेदार ठहराया गया, वे अभी भी शीर्ष पर काबिज हैं। विशेष पूर्ण सत्र की माँग को टालना और तीन महीने की 'सुधार प्रक्रिया' चुनना यह संकेत देता है कि पार्टी जवाबदेही से ज़्यादा स्थिरता को तरजीह दे रही है। केरल में वामपंथ की दीर्घकालिक चुनौती यह है कि संगठनात्मक लोकतंत्र और नेतृत्व की जवाबदेही के बिना आत्ममंथन महज़ एक रस्म बनकर रह जाता है। अगले तीन महीने यह तय करेंगे कि यह रिपोर्ट बदलाव की शुरुआत है या सिर्फ एक और दस्तावेज़ जो फाइलों में दब जाएगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीआई(एम) ने केरल चुनाव हार के लिए किन कारणों को स्वीकार किया है?
सीपीआई(एम) की सचिवालय रिपोर्ट में पिनारयी विजयन की अहंकारी कार्यशैली, एम.वी. गोविंदन के नेतृत्व की खामियाँ, वेल्लापल्ली नटेसन से दूरी न बनाना और थालीपरम्बा में उम्मीदवार चयन की चूक को हार के प्रमुख कारण बताया गया है। अय्यप्पा संगमम में योगी आदित्यनाथ का संदेश पढ़े जाने से उपजे विवाद को भी जिम्मेदार ठहराया गया है।
पिनारयी विजयन को विपक्ष का नेता क्यों बनाया गया जबकि उनकी आलोचना हो रही थी?
रिपोर्ट के अनुसार, विजयन को विपक्ष का नेता नियुक्त करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था। पार्टी सूत्रों का मानना है कि राज्य सचिवालय में उनके मजबूत प्रभाव के कारण नेतृत्व परिवर्तन की माँगें नहीं मानी जा सकीं।
सीपीआई(एम) में विशेष पूर्ण सत्र की माँग क्यों उठी और उसका क्या हुआ?
कई पार्टी सदस्यों ने विशेष राज्य पूर्ण सत्र बुलाने की माँग की थी ताकि विजयन और गोविंदन की भूमिकाओं की गहन जाँच हो सके। हालाँकि, नेतृत्व ने इस माँग को टाल दिया और इसके बजाय निचली समितियों में चर्चा और तीन महीने में सुधारात्मक उपाय लागू करने का विकल्प चुना।
अय्यप्पा संगमम विवाद ने सीपीआई(एम) को कैसे नुकसान पहुँचाया?
सचिवालय रिपोर्ट के अनुसार, अय्यप्पा संगमम कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश पढ़े जाने से कार्यक्रम का महत्व कम हुआ और पार्टी को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुँचा। यह घटना पार्टी की वैचारिक स्थिति के विरोधाभास के रूप में देखी गई।
सीपीआई(एम) आगे क्या सुधारात्मक कदम उठाएगी?
पार्टी ने निचली समितियों में चर्चा का एक और दौर आयोजित करने और तीन महीने में सुधारात्मक उपाय लागू करने का फैसला किया है। राज्य समिति सोमवार को सचिवालय की इस रिपोर्ट पर औपचारिक चर्चा करेगी, लेकिन नेतृत्व में कोई बड़ा बदलाव फिलहाल संभावित नहीं दिखता।
राष्ट्र प्रेस
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