टीईटी पेपर लीक: शिवसेना (यूबीटी) का आरोप — महाराष्ट्र बना पेपर लीक का गढ़, फडणवीस इस्तीफा दें
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 29 जून 2026 को भिवंडी में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के प्रश्नपत्र लीक मामले पर महाराष्ट्र की महायुति सरकार के विरुद्ध कड़ा हमला बोला। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में दावा किया गया कि राज्य अब देश में पेपर लीक का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है और जवाबदेही के अभाव में यह अवैध कारोबार बेरोकटोक जारी है।
मुख्य आरोप और संपादकीय का स्वर
'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि परीक्षा से महज 24 घंटे पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर खुलेआम वायरल हो गया, जो बिना 'सत्ता के मजबूत संरक्षण' के संभव नहीं था। संपादकीय के अनुसार, 'यह पेपर लीक माफिया, बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों का एक मजबूत और संगठित गिरोह है।'
पार्टी ने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक की जड़ें पुणे, छत्रपति संभाजीनगर, लातूर और नासिक तक फैली थीं, जबकि अब टीईटी घोटाले का केंद्र भिवंडी बन गया है। संपादकीय में यह भी कहा गया कि 'नीट पेपर लीक की कड़ियां भाजपा से जुड़ी हैं और टीईटी पेपर लीक के जिम्मेदार लोग भी उसी राजनीतिक तंत्र का हिस्सा हैं।'
फडणवीस और शिक्षा मंत्री पर निशाना
संपादकीय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को गृह मंत्री के रूप में भी पूरी तरह विफल करार दिया गया। पार्टी ने कहा कि 'गृह विभाग का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और भाजपा के हितों के लिए किया जा रहा है।' इसमें यह भी जोड़ा गया कि राज्य की आधी पुलिस फोर्स इस समय दलबदलू विधायकों और सांसदों की सुरक्षा में लगी है, न कि परीक्षा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में।
ठाकरे गुट ने मांग की कि 'ऐसी गंभीर स्थिति में महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री को एक दिन भी अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।' साथ ही फडणवीस से सवाल किया गया कि पेपर लीक के मामले बार-बार महाराष्ट्र में ही क्यों सामने आ रहे हैं।
युवाओं और शिक्षा व्यवस्था पर असर
संपादकीय में टीईटी को 'साधारण परीक्षा नहीं, बल्कि योग्य शिक्षक बनने की बुनियादी सीढ़ी' बताया गया। पार्टी का कहना है कि जिस चयन प्रक्रिया से भविष्य के शिक्षकों का चयन होना है, वही घोटालों और अनियमितताओं से ग्रस्त हो चुकी है।
संपादकीय के अनुसार, 'प्रशासन ने छात्रों को इतना असहाय और कमजोर बना दिया है कि उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा।' जब टीईटी का पेपर लीक होता है और परीक्षा रद्द होती है, तो अभ्यर्थी केवल निराशा में आह भरने के अलावा कुछ नहीं कर सकते। पार्टी ने इसे 'युवाओं के सपनों, उम्मीदों और आकांक्षाओं को लूटने की एक सुनियोजित साजिश' करार दिया।
बिहार-यूपी से तुलना और ऐतिहासिक संदर्भ
संपादकीय में कहा गया, 'बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य कभी सामूहिक नकल और सरकार प्रायोजित नकल के लिए बदनाम थे। महाराष्ट्र उनसे भी एक कदम आगे निकल गया है।' गौरतलब है कि महाराष्ट्र वही राज्य है जिसने भारत में शिक्षा और सामाजिक सुधार की नींव रखी थी। आलोचकों का कहना है कि अब वही राज्य संस्थागत स्तर पर पेपर लीक के संकट का सामना कर रहा है।
पार्टी ने व्यंग्य करते हुए कहा कि 'दल बदलने वाले विधायकों को कथित तौर पर 50-50 करोड़ रुपये मिलते हैं, जबकि पेपर लीक लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर देता है।' संपादकीय में यह भी कहा गया कि 'जो लोग राम मंदिर के दानपात्र तक लूट सकते हैं, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है?'
आगे क्या
शिवसेना (यूबीटी) ने मांग की है कि सरकार केवल 'जांच' के नाम पर समय न बिताए, बल्कि दोषियों को तत्काल सजा दिलाई जाए। पार्टी ने चेतावनी दी कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक पेपर लीक का अवैध कारोबार इसी तरह बिना किसी डर के चलता रहेगा। यह देखना होगा कि महायुति सरकार इस राजनीतिक दबाव के जवाब में कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।