14 सितंबर 2026
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पश्चिम बंगाल में डेंगू विस्फोट: 5,002 मामले, 29 नगर पालिकाएँ और 278 ग्राम पंचायतें हॉटस्पॉट घोषित

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पश्चिम बंगाल में डेंगू विस्फोट: 5,002 मामले, 29 नगर पालिकाएँ और 278 ग्राम पंचायतें हॉटस्पॉट घोषित

सारांश

पश्चिम बंगाल में एक महीने में डेंगू के मामले दोगुने हो गए — 2,500 से सीधे 5,002 तक। राज्य ने 29 नगर पालिकाएँ, 85 ब्लॉक और 278 पंचायतें हॉटस्पॉट घोषित कीं। सबसे बड़ी चिंता: मरीज़ों का डॉक्टर के पास जाने की बजाय खुद दवा लेना।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल में 11 सितंबर 2026 तक कुल 5,002 डेंगू मामले दर्ज, एक महीने में संख्या दोगुनी।
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने 29 नगर पालिकाओं , 85 कम्युनिटी ब्लॉक और 278 ग्राम पंचायतों को हॉटस्पॉट घोषित किया।
सर्वाधिक प्रभावित जिला मुर्शिदाबाद ( 1,072 मामले), इसके बाद कोलकाता ( 500 ) और उत्तर 24 परगना ( 450 )।
हॉटस्पॉट मानक: ग्राम पंचायत में 10+ मामले, ब्लॉक में 30+ मामले, नगर पालिका के अधिकांश वार्डों में 5+ मामले।
स्व-दवा की प्रवृत्ति विभाग की सबसे बड़ी चिंता; दो या अधिक दिन बुखार पर तुरंत ब्लड टेस्ट की अपील।
लार्विसाइड छिड़काव, घर-घर निगरानी और बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान जारी।

पश्चिम बंगाल में डेंगू का प्रकोप तेज़ी से बढ़ता जा रहा है — राज्य स्वास्थ्य विभाग के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार 11 सितंबर 2026 तक कुल 5,002 लोग संक्रमित हो चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने 29 नगर पालिकाओं, 85 कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक और 278 ग्राम पंचायतों को आधिकारिक रूप से हॉटस्पॉट घोषित किया है और इन क्षेत्रों में गहन निगरानी अभियान शुरू कर दिया है।

एक महीने में दोगुने मामले

चिंता की सबसे बड़ी वजह मामलों में आई तीव्र बढ़ोतरी है। स्वास्थ्य विभाग के आँकड़ों के अनुसार, अगस्त में 11 सितंबर तक संक्रमितों की संख्या 2,500 से कम थी। यानी महज एक महीने में 2,500 से अधिक नए मामले सामने आए हैं — संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के बाद मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनी हुई हैं।

जिलेवार आँकड़ों में मुर्शिदाबाद सबसे ऊपर है, जहाँ अब तक 1,072 मामले दर्ज हुए हैं। इसके बाद कोलकाता में 500 और उत्तर 24 परगना में 450 मामले हैं।

हॉटस्पॉट की पहचान का विशेष फॉर्मूला

राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हॉटस्पॉट चिह्नित करने के लिए एक स्पष्ट मानक तय किया गया है। उनके अनुसार, 'जिस ग्राम पंचायत में डेंगू के 10 या उससे अधिक मरीज़ होते हैं, उसे हॉटस्पॉट पंचायत माना जाता है। किसी कम्युनिटी ब्लॉक में 30 से अधिक मामले होने पर वह हॉटस्पॉट ब्लॉक बनता है। और जिस नगर पालिका के अधिकांश वार्डों में पाँच या अधिक संक्रमित हों, वह हॉटस्पॉट नगर पालिका घोषित की जाती है।'

इन चिह्नित इलाकों में स्वास्थ्य कर्मचारी गहन और रैंडम ब्लड सैंपल टेस्टिंग कर रहे हैं, क्योंकि पिछले महीने के अधिकांश डेंगू-पॉजिटिव केस इन्हीं क्षेत्रों से सामने आए थे।

स्व-दवा सबसे बड़ी चुनौती

अधिकारी ने बताया कि विभाग के सामने सबसे गंभीर समस्या यह है कि हॉटस्पॉट इलाकों में बड़ी संख्या में लोग दो या अधिक दिन बुखार रहने पर डॉक्टर से परामर्श लेने के बजाय खुद ही दवा ले लेते हैं। उनके शब्दों में, 'इससे संकट और गहरा होता है। हम लोगों से अपील कर रहे हैं कि दो या अधिक दिन बुखार रहने पर स्वयं दवा न लें — नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएँ या चिकित्सक से सलाह लें।'

घर-घर निगरानी और मच्छर-नियंत्रण

स्वास्थ्य कर्मचारी इन हॉटस्पॉट इलाकों में घर-घर जाकर जाँच और जागरूकता का काम कर रहे हैं। लोगों को सलाह दी जा रही है कि घर की पानी की टंकियों और सिस्टर्न को ढककर रखें, और यदि ढक्कन उपलब्ध न हो तो उन्हें मच्छरदानी या जाली से ढक दें। छत पर रखे गमलों और बेकार पड़े डिब्बों में पानी जमा न होने देने की विशेष सलाह दी जा रही है।

इसके अलावा, विभाग तालाबों, नालियों, पूलों, सूखी नहरों, बेकार कुओं और औद्योगिक परिसरों की भी निगरानी कर रहा है। सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत लार्विसाइड (लार्वा-नाशक दवाएँ) का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।

आगे क्या होगा

स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिया है कि हॉटस्पॉट की यह सूची गतिशील है और नए डेटा के अनुसार इसे अद्यतन किया जाएगा। गौरतलब है कि मानसून के बाद अक्टूबर तक डेंगू के मामले आमतौर पर चरम पर होते हैं, इसलिए आने वाले हफ्तों में और भी सतर्कता आवश्यक होगी। विभाग का ज़ोर अब सामुदायिक भागीदारी पर है ताकि स्व-दवा की प्रवृत्ति को रोका जा सके और समय पर परीक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की एक गहरी खामी को उजागर करता है — प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भरोसे की कमी। स्व-दवा की प्रवृत्ति तब पनपती है जब लोगों को लगता है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ या भरोसेमंद नहीं हैं। मुर्शिदाबाद जैसे ग्रामीण-बहुल जिले में सबसे अधिक मामले यह भी दर्शाते हैं कि शहरी-ग्रामीण स्वास्थ्य असमानता इस संकट को और गंभीर बना रही है। हॉटस्पॉट फॉर्मूला और लार्विसाइड अभियान सही दिशा में कदम हैं, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या विभाग अक्टूबर के चरम मौसम से पहले सामुदायिक विश्वास बहाल कर पाता है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में डेंगू की स्थिति अभी कितनी गंभीर है?
राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 11 सितंबर 2026 तक 5,002 लोग डेंगू से संक्रमित हो चुके हैं। अगस्त में इसी तारीख तक यह संख्या 2,500 से कम थी, यानी एक महीने में मामले दोगुने हो गए।
पश्चिम बंगाल में डेंगू हॉटस्पॉट किसे घोषित किया जाता है?
राज्य स्वास्थ्य विभाग के मानक के अनुसार, जिस ग्राम पंचायत में 10 या अधिक मामले हों, जिस ब्लॉक में 30 से अधिक मामले हों, और जिस नगर पालिका के अधिकांश वार्डों में 5 या अधिक मामले हों — उसे हॉटस्पॉट घोषित किया जाता है। फिलहाल 29 नगर पालिकाएँ, 85 ब्लॉक और 278 पंचायतें इस श्रेणी में हैं।
सबसे ज़्यादा डेंगू मामले किस जिले में हैं?
विभाग के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार मुर्शिदाबाद जिला सबसे अधिक प्रभावित है, जहाँ 1,072 मामले दर्ज हुए हैं। इसके बाद कोलकाता (500) और उत्तर 24 परगना (450) का स्थान है।
डेंगू के संदेह पर क्या करना चाहिए?
स्वास्थ्य विभाग की सलाह है कि दो या अधिक दिनों तक लगातार बुखार रहने पर खुद से दवा न लें। तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएँ और ब्लड टेस्ट कराएँ, क्योंकि स्व-दवा से स्थिति बिगड़ सकती है।
डेंगू रोकने के लिए घर पर क्या सावधानियाँ बरतें?
स्वास्थ्य कर्मचारी घर-घर जाकर सलाह दे रहे हैं कि पानी की टंकियों और सिस्टर्न को ढककर रखें, गमलों और बेकार डिब्बों में पानी जमा न होने दें। तालाबों, नालियों और खाली पड़े बर्तनों की नियमित सफाई करें।
राष्ट्र प्रेस
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