पश्चिम बंगाल में डेंगू विस्फोट: 5,002 मामले, 29 नगर पालिकाएँ और 278 ग्राम पंचायतें हॉटस्पॉट घोषित
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में डेंगू का प्रकोप तेज़ी से बढ़ता जा रहा है — राज्य स्वास्थ्य विभाग के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार 11 सितंबर 2026 तक कुल 5,002 लोग संक्रमित हो चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने 29 नगर पालिकाओं, 85 कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक और 278 ग्राम पंचायतों को आधिकारिक रूप से हॉटस्पॉट घोषित किया है और इन क्षेत्रों में गहन निगरानी अभियान शुरू कर दिया है।
एक महीने में दोगुने मामले
चिंता की सबसे बड़ी वजह मामलों में आई तीव्र बढ़ोतरी है। स्वास्थ्य विभाग के आँकड़ों के अनुसार, अगस्त में 11 सितंबर तक संक्रमितों की संख्या 2,500 से कम थी। यानी महज एक महीने में 2,500 से अधिक नए मामले सामने आए हैं — संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के बाद मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनी हुई हैं।
जिलेवार आँकड़ों में मुर्शिदाबाद सबसे ऊपर है, जहाँ अब तक 1,072 मामले दर्ज हुए हैं। इसके बाद कोलकाता में 500 और उत्तर 24 परगना में 450 मामले हैं।
हॉटस्पॉट की पहचान का विशेष फॉर्मूला
राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हॉटस्पॉट चिह्नित करने के लिए एक स्पष्ट मानक तय किया गया है। उनके अनुसार, 'जिस ग्राम पंचायत में डेंगू के 10 या उससे अधिक मरीज़ होते हैं, उसे हॉटस्पॉट पंचायत माना जाता है। किसी कम्युनिटी ब्लॉक में 30 से अधिक मामले होने पर वह हॉटस्पॉट ब्लॉक बनता है। और जिस नगर पालिका के अधिकांश वार्डों में पाँच या अधिक संक्रमित हों, वह हॉटस्पॉट नगर पालिका घोषित की जाती है।'
इन चिह्नित इलाकों में स्वास्थ्य कर्मचारी गहन और रैंडम ब्लड सैंपल टेस्टिंग कर रहे हैं, क्योंकि पिछले महीने के अधिकांश डेंगू-पॉजिटिव केस इन्हीं क्षेत्रों से सामने आए थे।
स्व-दवा सबसे बड़ी चुनौती
अधिकारी ने बताया कि विभाग के सामने सबसे गंभीर समस्या यह है कि हॉटस्पॉट इलाकों में बड़ी संख्या में लोग दो या अधिक दिन बुखार रहने पर डॉक्टर से परामर्श लेने के बजाय खुद ही दवा ले लेते हैं। उनके शब्दों में, 'इससे संकट और गहरा होता है। हम लोगों से अपील कर रहे हैं कि दो या अधिक दिन बुखार रहने पर स्वयं दवा न लें — नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएँ या चिकित्सक से सलाह लें।'
घर-घर निगरानी और मच्छर-नियंत्रण
स्वास्थ्य कर्मचारी इन हॉटस्पॉट इलाकों में घर-घर जाकर जाँच और जागरूकता का काम कर रहे हैं। लोगों को सलाह दी जा रही है कि घर की पानी की टंकियों और सिस्टर्न को ढककर रखें, और यदि ढक्कन उपलब्ध न हो तो उन्हें मच्छरदानी या जाली से ढक दें। छत पर रखे गमलों और बेकार पड़े डिब्बों में पानी जमा न होने देने की विशेष सलाह दी जा रही है।
इसके अलावा, विभाग तालाबों, नालियों, पूलों, सूखी नहरों, बेकार कुओं और औद्योगिक परिसरों की भी निगरानी कर रहा है। सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत लार्विसाइड (लार्वा-नाशक दवाएँ) का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।
आगे क्या होगा
स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिया है कि हॉटस्पॉट की यह सूची गतिशील है और नए डेटा के अनुसार इसे अद्यतन किया जाएगा। गौरतलब है कि मानसून के बाद अक्टूबर तक डेंगू के मामले आमतौर पर चरम पर होते हैं, इसलिए आने वाले हफ्तों में और भी सतर्कता आवश्यक होगी। विभाग का ज़ोर अब सामुदायिक भागीदारी पर है ताकि स्व-दवा की प्रवृत्ति को रोका जा सके और समय पर परीक्षण सुनिश्चित किया जा सके।