31 अगस्त 2026
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पश्चिम बंगाल में डेंगू का खतरा: पाँच जिले सबसे संवेदनशील, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दिए पारदर्शिता के निर्देश

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पश्चिम बंगाल में डेंगू का खतरा: पाँच जिले सबसे संवेदनशील, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दिए पारदर्शिता के निर्देश

सारांश

पश्चिम बंगाल में मॉनसून के बीच डेंगू ने पाँच जिलों को सबसे अधिक संवेदनशील बना दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूर्व सरकार पर आँकड़े छिपाने का आरोप लगाते हुए डॉक्टरों को पारदर्शी रिपोर्टिंग के सख्त निर्देश दिए हैं — यह स्वास्थ्य प्रशासन में जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने 31 अगस्त को कोलकाता , हावड़ा , उत्तर 24 परगना , दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद को डेंगू के सर्वाधिक जोखिम वाले जिले घोषित किया।
इन जिलों में डेंगू के साथ-साथ प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (मलेरिया का सबसे खतरनाक रूप) के मामले भी सामने आए हैं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सभी अस्पतालों को डेंगू-मलेरिया के मामले 'अज्ञात बुखार' की आड़ में न छिपाने के स्पष्ट निर्देश दिए।
अधिकारी ने पूर्व ममता बनर्जी सरकार पर डेंगू के आँकड़े कम करके दिखाने का आरोप लगाया।
मॉनसून के दौरान जलभराव और मौसम परिवर्तन को मच्छरजनित बीमारियों के प्रसार का प्रमुख कारण बताया गया है।

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने मॉनसून के बीच डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य के पाँच जिलोंकोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद — को सर्वाधिक जोखिम वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया है। अधिकारियों ने सोमवार, 31 अगस्त को यह जानकारी दी। लगातार बदलते मौसम और भारी बारिश के कारण इन जिलों में डेंगू तथा मलेरिया के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

किन जिलों में सबसे अधिक खतरा

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद में मौजूदा मॉनसून सीज़न के दौरान डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या सबसे अधिक रही है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे राज्य में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति ने मच्छरों के प्रजनन को बढ़ावा दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन्हीं जिलों से 'प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम' के मामले भी सामने आए हैं — जो मलेरिया का सर्वाधिक घातक रूप माना जाता है और जो किडनी को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू और फाल्सीपेरम मलेरिया का एक साथ प्रकोप स्वास्थ्य तंत्र पर दोहरा दबाव बनाता है।

मुख्यमंत्री के पारदर्शिता निर्देश

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सभी अस्पतालों के अधिकारियों और चिकित्सकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे डेंगू और मलेरिया के मामलों को सही नाम से दर्ज करें। उन्होंने कहा, "सभी संबंधित लोगों को बीमारी का सही नाम बताने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। डेंगू या मलेरिया के मामलों को 'अज्ञात बुखार' बताने की कोई ज़रूरत नहीं है।"

अधिकारी ने आगे कहा, "पिछली राज्य सरकार हमेशा प्रभावित लोगों या मरने वालों की संख्या कम करके बताती थी, और अस्पतालों के अधिकारियों व डॉक्टरों को डेंगू के मामलों को 'अज्ञात बुखार' के तौर पर रिपोर्ट करने के लिए मजबूर किया जाता था। लेकिन हम उनसे कुछ भी न छिपाने के लिए कह रहे हैं। अगर डेंगू है, तो निश्चित रूप से उसका इलाज किया जाएगा।"

पिछली सरकार पर आरोप

मुख्यमंत्री अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व वाली पूर्व ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाया कि उस दौर में डेंगू और मलेरिया के मामलों को जानबूझकर 'अज्ञात बुखार' के रूप में दर्ज कराया जाता था, ताकि असली आँकड़े सामने न आएँ। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हर मॉनसून सीज़न में डेंगू के मामले बड़ी संख्या में सामने आते हैं, और आँकड़ों की पारदर्शिता पर सवाल पहले भी उठते रहे हैं।

आम जनता पर असर

चिह्नित पाँचों जिले राज्य की कुल आबादी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। कोलकाता और हावड़ा जैसे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में डेंगू का फैलाव तेज़ी से हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे घरों में पानी जमा न होने दें और मच्छरदानी का उपयोग करें।

आगे क्या होगा

स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन पाँच संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी दल तैनात किए जाने की संभावना है। अधिकारियों के अनुसार, सटीक रिपोर्टिंग से न केवल मामलों का बेहतर प्रबंधन होगा, बल्कि संसाधनों का उचित वितरण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। राज्य सरकार की यह पहल मॉनसून के शेष हफ्तों में डेंगू नियंत्रण की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का भी है — और मुख्यमंत्री अधिकारी का यह बयान दोनों मोर्चों पर एक साथ खेलता है। सवाल यह है कि क्या नई सरकार वास्तव में सटीक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का तंत्र बनाएगी, या यह केवल पूर्ववर्ती सरकार पर राजनीतिक प्रहार तक सीमित रहेगा। भारत में मॉनसूनी बीमारियों के आँकड़ों की अल्प-रिपोर्टिंग एक राष्ट्रीय समस्या है — बंगाल इसका अपवाद नहीं। जब तक ज़िला स्तर पर स्वतंत्र सत्यापन तंत्र नहीं बनता, तब तक 'पारदर्शिता के निर्देश' केवल घोषणा बनकर रह सकते हैं।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में डेंगू के लिए कौन-से पाँच जिले सबसे संवेदनशील घोषित किए गए हैं?
स्वास्थ्य विभाग ने कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद को डेंगू के सर्वाधिक जोखिम वाले जिलों के रूप में चिह्नित किया है। मौजूदा मॉनसून सीज़न में इन जिलों में डेंगू के मामले और मौतें सबसे अधिक दर्ज हुई हैं।
प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम क्या है और यह खतरनाक क्यों है?
प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम मलेरिया का सबसे घातक रूप है, जो किडनी को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। पश्चिम बंगाल के चिह्नित पाँच जिलों में डेंगू के साथ-साथ इस प्रकार के मलेरिया के मामले भी सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य तंत्र पर दोहरा दबाव बन रहा है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने डॉक्टरों को क्या निर्देश दिए हैं?
मुख्यमंत्री अधिकारी ने सभी अस्पतालों के अधिकारियों और चिकित्सकों को निर्देश दिया है कि वे डेंगू और मलेरिया के मामलों को 'अज्ञात बुखार' बताकर न छिपाएँ, बल्कि बीमारी का सही नाम दर्ज करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सटीक रिपोर्टिंग से ही बेहतर इलाज और संसाधनों का उचित वितरण संभव है।
पूर्व ममता बनर्जी सरकार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
मुख्यमंत्री अधिकारी ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पूर्व सरकार के दौरान डेंगू और मलेरिया के मामलों को जानबूझकर 'अज्ञात बुखार' के रूप में दर्ज कराया जाता था और प्रभावित व मृत लोगों की संख्या कम करके बताई जाती थी। ये आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
डेंगू से बचाव के लिए आम नागरिक क्या करें?
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि घरों में, छत पर या आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों का प्रजनन स्थल बनता है। मच्छरदानी और मच्छर-रोधी उपायों का उपयोग करें और बुखार आने पर तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाँच कराएँ।
राष्ट्र प्रेस
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