पश्चिम बंगाल में डेंगू का खतरा: पाँच जिले सबसे संवेदनशील, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दिए पारदर्शिता के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने मॉनसून के बीच डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य के पाँच जिलों — कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद — को सर्वाधिक जोखिम वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया है। अधिकारियों ने सोमवार, 31 अगस्त को यह जानकारी दी। लगातार बदलते मौसम और भारी बारिश के कारण इन जिलों में डेंगू तथा मलेरिया के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
किन जिलों में सबसे अधिक खतरा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद में मौजूदा मॉनसून सीज़न के दौरान डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या सबसे अधिक रही है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे राज्य में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति ने मच्छरों के प्रजनन को बढ़ावा दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन्हीं जिलों से 'प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम' के मामले भी सामने आए हैं — जो मलेरिया का सर्वाधिक घातक रूप माना जाता है और जो किडनी को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू और फाल्सीपेरम मलेरिया का एक साथ प्रकोप स्वास्थ्य तंत्र पर दोहरा दबाव बनाता है।
मुख्यमंत्री के पारदर्शिता निर्देश
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सभी अस्पतालों के अधिकारियों और चिकित्सकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे डेंगू और मलेरिया के मामलों को सही नाम से दर्ज करें। उन्होंने कहा, "सभी संबंधित लोगों को बीमारी का सही नाम बताने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। डेंगू या मलेरिया के मामलों को 'अज्ञात बुखार' बताने की कोई ज़रूरत नहीं है।"
अधिकारी ने आगे कहा, "पिछली राज्य सरकार हमेशा प्रभावित लोगों या मरने वालों की संख्या कम करके बताती थी, और अस्पतालों के अधिकारियों व डॉक्टरों को डेंगू के मामलों को 'अज्ञात बुखार' के तौर पर रिपोर्ट करने के लिए मजबूर किया जाता था। लेकिन हम उनसे कुछ भी न छिपाने के लिए कह रहे हैं। अगर डेंगू है, तो निश्चित रूप से उसका इलाज किया जाएगा।"
पिछली सरकार पर आरोप
मुख्यमंत्री अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व वाली पूर्व ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाया कि उस दौर में डेंगू और मलेरिया के मामलों को जानबूझकर 'अज्ञात बुखार' के रूप में दर्ज कराया जाता था, ताकि असली आँकड़े सामने न आएँ। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हर मॉनसून सीज़न में डेंगू के मामले बड़ी संख्या में सामने आते हैं, और आँकड़ों की पारदर्शिता पर सवाल पहले भी उठते रहे हैं।
आम जनता पर असर
चिह्नित पाँचों जिले राज्य की कुल आबादी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। कोलकाता और हावड़ा जैसे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में डेंगू का फैलाव तेज़ी से हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे घरों में पानी जमा न होने दें और मच्छरदानी का उपयोग करें।
आगे क्या होगा
स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन पाँच संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी दल तैनात किए जाने की संभावना है। अधिकारियों के अनुसार, सटीक रिपोर्टिंग से न केवल मामलों का बेहतर प्रबंधन होगा, बल्कि संसाधनों का उचित वितरण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। राज्य सरकार की यह पहल मॉनसून के शेष हफ्तों में डेंगू नियंत्रण की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।