बिश्केक में PM मोदी-पाशिनयान मुलाकात: रक्षा, फार्मा और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान से द्विपक्षीय बैठक की। दोपहर लगभग 2 बजे हुई इस मुलाकात में रक्षा, अर्थव्यवस्था, फार्मा, विज्ञान-तकनीक, संस्कृति और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में क्या हुआ
विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक्स पर पोस्ट कर बैठक की जानकारी साझा की। मंत्रालय के अनुसार दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार के साथ-साथ पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति सहित क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी अपने-अपने दृष्टिकोण साझा किए।
यह बैठक एससीओ समिट के इतर आयोजित हुई, जो भारत की उस कूटनीतिक परंपरा के अनुरूप है जिसमें बहुपक्षीय मंचों का उपयोग द्विपक्षीय संवाद के लिए भी किया जाता है।
आर्मेनिया से संवाद का महत्व
यूरेशिया और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं — ऐसे में भारत के लिए आर्मेनिया के साथ संपर्क बनाए रखना रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि भारत हाल के वर्षों में आर्मेनिया को रक्षा उपकरण आपूर्ति के क्षेत्र में एक उभरते भागीदार के रूप में सामने आया है।
यह बैठक भारत की व्यापक मध्य एशिया कूटनीति का हिस्सा है, जिसमें इस क्षेत्र के देशों के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।
बिश्केक में मोदी का व्यस्त कार्यक्रम
किर्गिस्तान दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह बिश्केक में महात्मा गांधी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर दिन की शुरुआत की। इसके बाद पाशिनयान से मुलाकात हुई।
कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर बाद किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के साथ राष्ट्रपति कार्यालय में द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। इस बैठक में मध्य एशिया की बदलती सुरक्षा स्थिति, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है। भारत और किर्गिस्तान के बीच रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से मैत्रीपूर्ण सहयोग रहा है।
मोदी-पुतिन मुलाकात पर सबकी नज़र
दिन की सबसे चर्चित बैठक शाम 6 बजे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रस्तावित है। भारत-रूस संबंध रक्षा से आगे बढ़कर ऊर्जा, व्यापार, निवेश, परमाणु सहयोग और रणनीतिक साझेदारी तक फैले हैं, इसलिए इस बैठक को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
वैश्विक भू-राजनीतिक दबावों के बीच मोदी-पुतिन की यह मुलाकात भारत की 'स्वतंत्र विदेश नीति' की दिशा को रेखांकित करती है, जो पश्चिमी देशों की आलोचना के बावजूद रूस के साथ संवाद बनाए रखती है।