31 अगस्त 2026
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बिश्केक में PM मोदी-पाशिनयान मुलाकात: रक्षा, फार्मा और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा

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बिश्केक में PM मोदी-पाशिनयान मुलाकात: रक्षा, फार्मा और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा

सारांश

बिश्केक में SCO समिट के इतर PM मोदी का कूटनीतिक दिन — आर्मेनिया के PM पाशिनयान से रक्षा और फार्मा सहयोग पर चर्चा, किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जापारोव से वार्ता और शाम को पुतिन से अहम मुलाकात — भारत की बहुआयामी विदेश नीति का जीवंत प्रदर्शन।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में आर्मेनिया के PM निकोल पाशिनयान से SCO समिट के इतर द्विपक्षीय बैठक की।
बैठक में रक्षा, फार्मा, विज्ञान-तकनीक, संस्कृति और शिक्षा में सहयोग विस्तार पर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया सहित क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार साझा किए।
किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव से द्विपक्षीय वार्ता दोपहर बाद प्रस्तावित है।
शाम 6 बजे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बहुप्रतीक्षित मुलाकात निर्धारित है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान से द्विपक्षीय बैठक की। दोपहर लगभग 2 बजे हुई इस मुलाकात में रक्षा, अर्थव्यवस्था, फार्मा, विज्ञान-तकनीक, संस्कृति और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में क्या हुआ

विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक्स पर पोस्ट कर बैठक की जानकारी साझा की। मंत्रालय के अनुसार दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार के साथ-साथ पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति सहित क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी अपने-अपने दृष्टिकोण साझा किए।

यह बैठक एससीओ समिट के इतर आयोजित हुई, जो भारत की उस कूटनीतिक परंपरा के अनुरूप है जिसमें बहुपक्षीय मंचों का उपयोग द्विपक्षीय संवाद के लिए भी किया जाता है।

आर्मेनिया से संवाद का महत्व

यूरेशिया और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं — ऐसे में भारत के लिए आर्मेनिया के साथ संपर्क बनाए रखना रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि भारत हाल के वर्षों में आर्मेनिया को रक्षा उपकरण आपूर्ति के क्षेत्र में एक उभरते भागीदार के रूप में सामने आया है।

यह बैठक भारत की व्यापक मध्य एशिया कूटनीति का हिस्सा है, जिसमें इस क्षेत्र के देशों के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।

बिश्केक में मोदी का व्यस्त कार्यक्रम

किर्गिस्तान दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह बिश्केक में महात्मा गांधी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर दिन की शुरुआत की। इसके बाद पाशिनयान से मुलाकात हुई।

कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर बाद किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के साथ राष्ट्रपति कार्यालय में द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। इस बैठक में मध्य एशिया की बदलती सुरक्षा स्थिति, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है। भारत और किर्गिस्तान के बीच रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से मैत्रीपूर्ण सहयोग रहा है।

मोदी-पुतिन मुलाकात पर सबकी नज़र

दिन की सबसे चर्चित बैठक शाम 6 बजे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रस्तावित है। भारत-रूस संबंध रक्षा से आगे बढ़कर ऊर्जा, व्यापार, निवेश, परमाणु सहयोग और रणनीतिक साझेदारी तक फैले हैं, इसलिए इस बैठक को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

वैश्विक भू-राजनीतिक दबावों के बीच मोदी-पुतिन की यह मुलाकात भारत की 'स्वतंत्र विदेश नीति' की दिशा को रेखांकित करती है, जो पश्चिमी देशों की आलोचना के बावजूद रूस के साथ संवाद बनाए रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किर्गिस्तान और रूस से संवाद साधती है — तीनों के परस्पर जटिल संबंध हैं। आर्मेनिया को रक्षा आपूर्ति और पुतिन से बातचीत, दोनों एक साथ करना पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति की परीक्षा है। असली सवाल यह है कि इन द्विपक्षीय संवादों से ठोस समझौते निकलते हैं या ये केवल कूटनीतिक सक्रियता का प्रदर्शन बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिश्केक में PM मोदी और आर्मेनिया के PM पाशिनयान की बैठक में क्या हुआ?
31 अगस्त को SCO समिट के इतर हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा, फार्मा, विज्ञान-तकनीक, संस्कृति और शिक्षा में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। पश्चिम एशिया समेत क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए गए।
PM मोदी बिश्केक में किन नेताओं से मिले या मिलने वाले हैं?
31 अगस्त को मोदी ने आर्मेनिया के PM निकोल पाशिनयान से मुलाकात की। इसके अलावा किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव से दोपहर बाद और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से शाम 6 बजे बैठक प्रस्तावित है।
भारत-आर्मेनिया संबंधों में यह बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत हाल के वर्षों में आर्मेनिया को रक्षा उपकरण आपूर्ति में एक उभरते भागीदार के रूप में सामने आया है। यूरेशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच यह बैठक दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद को और मज़बूत करती है।
मोदी-पुतिन बिश्केक बैठक का क्या महत्व है?
शाम 6 बजे प्रस्तावित यह बैठक ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, परमाणु सहयोग और रणनीतिक साझेदारी जैसे व्यापक द्विपक्षीय एजेंडे को आगे बढ़ाएगी। वैश्विक दबावों के बीच यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का प्रतीक मानी जा रही है।
SCO समिट 2026 कहाँ और कब हो रहा है?
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का यह शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित हो रहा है। PM मोदी 31 अगस्त को दौरे के दूसरे दिन कई द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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