30 अगस्त 2026
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ताशकंद में PM मोदी का औपचारिक स्वागत, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव से द्विपक्षीय वार्ता आज

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ताशकंद में PM मोदी का औपचारिक स्वागत, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव से द्विपक्षीय वार्ता आज

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा महज शिष्टाचार नहीं — यह मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक पकड़ मजबूत करने का ठोस कदम है। व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी एजेंडे पर हैं, और योग कूटनीति ने सांस्कृतिक सेतु का काम किया।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 30 अगस्त को ताशकंद में राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने औपचारिक स्वागत किया।
दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी पर चर्चा निर्धारित।
वार्ता का केंद्र विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 के साझा विकास लक्ष्य।
उज्बेकिस्तान के 52 योग साधकों के विशेष सत्र का मोदी ने अवलोकन किया; योग फेडरेशन ऑफ उज्बेकिस्तान के 6 सदस्य भी शामिल।
यह मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है; भारतीय समुदाय ने राखी बाँधकर किया भव्य स्वागत।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रविवार, 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में औपचारिक स्वागत किया गया। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने मोदी की अगवानी की और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया। यह मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच गहराते द्विपक्षीय संबंधों को रेखांकित करती है।

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता का एजेंडा

दिन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता निर्धारित है। दोनों नेता विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 के साझा विकास लक्ष्यों को गति देने पर केंद्रित चर्चा करेंगे। रवाना होने से पूर्व जारी बयान में मोदी ने कहा, 'हाल के वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी में काफी प्रगति हुई है। मैं राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ अपनी बातचीत को लेकर उत्साहित हूं।'

मोदी ने स्पष्ट किया कि वार्ता में व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा, ऊर्जा और दोनों देशों के साझा विकास विजन पर विस्तार से चर्चा होगी। गौरतलब है कि यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब भारत मध्य एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को व्यापक बनाने की दिशा में सक्रिय है।

ताशकंद में योग की सांस्कृतिक छाप

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक विशेष योग सत्र का अवलोकन किया, जिसमें उज्बेकिस्तान के 52 योग साधकों ने भाग लिया। मोदी ने इस सत्र की झलकियाँ अपने एक्स अकाउंट पर साझा करते हुए लिखा, 'उज्बेकिस्तान योग पसंद करता है!' वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, 'नमस्ते। आप सभी ने आज बहुत शानदार योग प्रदर्शन किया है। यहां हर उम्र के लोग मौजूद हैं। उज्बेकिस्तान को योग से जोड़ने के लिए मैं अपने मित्र राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करता हूं।'

सत्र में योग फेडरेशन ऑफ उज्बेकिस्तान के 6 सदस्य भी शामिल थे, जिन्होंने जून 2026 में अहमदाबाद में आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैम्पियनशिप में उज्बेकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था। इस सत्र ने यात्रा में एक विशिष्ट सांस्कृतिक आयाम जोड़ा।

भारतीय समुदाय का भव्य स्वागत

ताशकंद में बसे भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री मोदी का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। लोगों ने 'मोदी मोदी', 'वंदे मातरम्' और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। समुदाय की कुछ महिलाओं ने मोदी को राखी भी बाँधी और कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

ताशकंद पहुँचने के बाद मोदी ने एक्स पर लिखा, 'राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने ताशकंद में मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके इस विशेष सम्मान के लिए मैं उनका आभारी हूं। यह मेरी उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है, जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों की गहराई और लगातार बढ़ती गति को दर्शाती है।'

यात्रा का महत्व और आगे की राह

प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को दो दिवसीय यात्रा पर उज्बेकिस्तान पहुँचे थे। यह यात्रा भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के अंतर्गत मध्य एशियाई देशों के साथ संबंधों को नई ऊँचाई देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। वार्ता के परिणाम भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी की अगली दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि रणनीतिक विस्तार का क्षेत्र मान रहा है। विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 को साझा ढाँचे में पिरोना कूटनीतिक चतुराई है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि व्यापार और निवेश के वादे ठोस समझौतों में कितनी जल्दी तब्दील होते हैं। योग कूटनीति सॉफ्ट पावर का प्रभावी उपकरण है, पर मध्य एशिया में चीन और रूस की गहरी आर्थिक मौजूदगी के बीच भारत को कनेक्टिविटी और व्यापार मार्गों पर ठोस प्रगति दिखानी होगी।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस दो दिवसीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करना है, जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी प्रमुख एजेंडे हैं। दोनों देश विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 के साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा करेंगे।
मोदी की उज्बेकिस्तान यह कौन सी यात्रा है?
यह प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है। मोदी ने स्वयं एक्स पर लिखा कि यह यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की गहराई और लगातार बढ़ती गति को दर्शाती है।
ताशकंद में योग सत्र में क्या हुआ?
उज्बेकिस्तान के 52 योग साधकों ने एक विशेष सत्र में भाग लिया, जिसका प्रधानमंत्री मोदी ने अवलोकन किया। इसमें योग फेडरेशन ऑफ उज्बेकिस्तान के 6 सदस्य भी थे, जिन्होंने जून 2026 में अहमदाबाद में आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैम्पियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व किया था।
भारत-उज्बेकिस्तान वार्ता में किन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित होगा?
वार्ता में व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा सहयोग और ऊर्जा क्षेत्र प्रमुख विषय हैं। इसके साथ ही दोनों देशों के दीर्घकालिक विकास विजन — विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 — को साझा रूपरेखा में आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होगी।
ताशकंद में भारतीय समुदाय ने मोदी का स्वागत कैसे किया?
उज्बेकिस्तान में बसे भारतीय समुदाय ने 'मोदी मोदी', 'वंदे मातरम्' और 'भारत माता की जय' के नारों के साथ भव्य स्वागत किया। कुछ महिलाओं ने प्रधानमंत्री को राखी भी बाँधी और कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
राष्ट्र प्रेस
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