30 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता बयान पर अयोध्या के संत बोले — यह संघ नहीं, निजी विचार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता बयान पर अयोध्या के संत बोले — यह संघ नहीं, निजी विचार

सारांश

RSS प्रमुख मोहन भागवत का मुस्लिम समावेश वाला बयान अयोध्या के संतों को रास नहीं आया। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने इसे संघ का नहीं, बल्कि भागवत का निजी विचार बताया और सनातन धर्म के विरुद्ध करार दिया। महंत राजू दास ने आंशिक सहमति जताते हुए कट्टरपंथ को बर्दाश्त न करने की बात कही।

मुख्य बातें

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि मुसलमानों को भारत में न रहने देने की सोच हिंदू धर्म नहीं है।
तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने अयोध्या से इसे भागवत का निजी बयान बताया, संघ का आधिकारिक रुख नहीं।
महंत राजू दास ने बयान में आंशिक सहमति जताई — राष्ट्रप्रेमी और संविधान-समर्थक मुसलमानों के संदर्भ में।
महंत राजू दास ने कांग्रेस पर धर्म के आधार पर देश-विभाजन का आरोप लगाया।
एक अन्य संत ने बयान को 'भावनात्मक' बताते हुए सनातन परंपरा की मानवतावादी भूमिका पर जोर दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता संबंधी बयान पर अयोध्या के प्रमुख संतों ने 30 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया दी है। संतों का कहना है कि यह बयान RSS के संगठनात्मक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि भागवत का व्यक्तिगत विचार है। इस विवाद ने हिंदुत्व विचारधारा के भीतर मुस्लिम समावेश के प्रश्न को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

संतों की प्रमुख प्रतिक्रियाएँ

तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या धाम से कहा, 'आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि यह सोचना कि मुसलमानों को भारत में नहीं रहना चाहिए, हिंदू धर्म नहीं है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि यह बयान संघ का नहीं, बल्कि मोहन भागवत का निजी बयान है। यह सनातन धर्म, राष्ट्र और मानवता के खिलाफ है।'

परमहंस आचार्य ने आगे कहा कि यदि सांस्कृतिक आत्मसमर्पण की यही नीति होती, तो देश का विभाजन न हुआ होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस व्यक्तिगत बयान को संगठन की आधिकारिक नीति न समझा जाए।

महंत राजू दास का संतुलित रुख

महंत राजू दास ने भागवत के बयान में एक सीमित सहमति जताई। उन्होंने कहा, 'संघ प्रमुख की ओर से सही कहा गया है कि मुसलमान के बिना देश अधूरा है — लेकिन यह बात उन मुसलमानों के लिए है जिन्हें राष्ट्र से प्रेम है और संविधान से लगाव है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग देश के विभाजन की बात करते हैं या संविधान को नहीं मानते, उनके लिए यह बात लागू नहीं होती।

महंत राजू दास ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उनके अनुसार, 'धर्म के आधार पर देश का बंटवारा करके कांग्रेस ने महापाप किया था और हिंदुस्तान को धर्मशाला बना दिया।' उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदुस्तानी हैं।

एक अन्य संत का दृष्टिकोण

एक अन्य संत ने भागवत के बयान को 'भावनात्मक' करार देते हुए उसका सम्मान करने की बात कही। उनका कहना था कि भारतीय सनातन परंपरा मानवता को अपना अभिन्न हिस्सा मानती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की धर्मनिरपेक्षता की नींव सनातन संस्कृति और परंपरा में है, और हिंदुत्व को अपनी विचारधारा पर दृढ़ रहना चाहिए।

विवाद का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भागवत के किसी बयान ने हिंदुत्व संगठनों के भीतर असहमति उत्पन्न की हो। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब देशभर में सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय पहचान को लेकर व्यापक बहस जारी है। संतों की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि हिंदुत्व विचारधारा के भीतर मुस्लिम समावेश के प्रश्न पर एकमत नहीं है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि RSS इन असहमतियों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसके कट्टर समर्थक किसी भी 'नरमी' को विचारधारात्मक विचलन मानते हैं। संतों का यह कहना कि यह 'निजी बयान' है, दरअसल संगठन को जवाबदेही से मुक्त करने की एक परिचित रणनीति है। असली सवाल यह है कि क्या RSS इस बयान से खुद को दूर करेगा या इसे एक व्यापक आउटरीच का हिस्सा बनाएगा — दोनों ही स्थितियाँ संगठन की दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत देंगी।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर क्या कहा था?
मोहन भागवत ने कहा था कि यह सोचना कि मुसलमानों को भारत में नहीं रहना चाहिए, हिंदू धर्म नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों के बिना देश अधूरा है।
अयोध्या के संतों ने भागवत के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने इसे RSS का नहीं, बल्कि भागवत का निजी बयान बताया और इसे सनातन धर्म, राष्ट्र व मानवता के विरुद्ध करार दिया। महंत राजू दास ने आंशिक सहमति जताते हुए कट्टरपंथ को अस्वीकार्य बताया।
क्या RSS ने भागवत के बयान को अपना आधिकारिक रुख माना है?
अयोध्या के संतों के अनुसार यह बयान संघ का आधिकारिक रुख नहीं है। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्पष्ट कहा कि इसे संगठन की नीति न समझा जाए।
महंत राजू दास ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
महंत राजू दास ने कहा कि धर्म के आधार पर देश का बंटवारा करके कांग्रेस ने महापाप किया था और हिंदुस्तान को धर्मशाला बना दिया।
इस विवाद का व्यापक राजनीतिक महत्व क्या है?
यह विवाद हिंदुत्व विचारधारा के भीतर मुस्लिम समावेश को लेकर गहरी असहमति को उजागर करता है। संतों की प्रतिक्रिया दर्शाती है कि RSS के करीबी धार्मिक नेता भी भागवत के इस बयान से सहमत नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 घंटे पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले