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क्या संघ भारत का सबसे बड़ा संगठन है, समाज को जोड़ने की कोशिश स्वागतयोग्य है?

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क्या संघ भारत का सबसे बड़ा संगठन है, समाज को जोड़ने की कोशिश स्वागतयोग्य है?

सारांश

आइए जानते हैं कैसे मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने डॉ. मोहन भागवत के समर्थन में अपनी बात रखी। क्या संघ वास्तव में भारतीय समाज को एकजुट करने की दिशा में कार्य कर रहा है?

मुख्य बातें

संघ का समाज को जोड़ने का प्रयास स्वागत योग्य है।
मोहन भागवत की विचारधारा सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है।
हर समुदाय को मिलकर रहना चाहिए।
हिंदू-मुस्लिम तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।
आपसी भाईचारे और सहयोग की आवश्यकता है।

बरेली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरआरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के हालिया वक्तव्य और लेख ने कई मुस्लिम संगठनों की आलोचना का कारण बना, लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उनके पक्ष में आवाज उठाई है।

उन्होंने कहा कि संघ भारत का सबसे बड़ा संगठन है और इसके समाज को एकजुट करने के प्रयासों का स्वागत किया जाना चाहिए। मौलाना रजवी ने बताया कि डॉ. भागवत एक महान व्यक्तित्व और विद्वान हैं, जो समय-समय पर ऐसे विचार प्रस्तुत करते हैं जो देश में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि भागवत ने पहले भी कहा था कि हर मस्जिद के नीचे मंदिर मत खोजें और हाल ही में दिल्ली के विज्ञान भवन में दोहराया कि हर जगह शिवलिंग मत खोजें। मौलाना के अनुसार, इस तरह की सोच समाज में सहयोग और सभी धर्मों के साथ चलने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख की सकारात्मक सोच हिंदू-मुस्लिम तनाव को कम करने में सहायक होगी।

रजवी ने कहा कि उपद्रव फैलाने वाले संगठनों पर अब नियंत्रण लगेगा और सौहार्दहानिकारक है। नफरत और टकराव से न तो व्यक्ति, न समाज और न ही देश आगे बढ़ सकता है। सभी समुदायों को मिलकर रहना होगा। उन्होंने हाल के वर्षों की घटनाओं का उल्लेख किया, जिसमें कई जगह मस्जिदों, मदरसों और मजारों को असामाजिक तत्वों ने निशाना बनाया।

संघ प्रमुख के विचारों से मुसलमानों में यह उम्मीद जगी है कि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि देश की भलाई आपसी भाईचारे और सहयोग से ही संभव है। यदि भागवत जी के संदेश को गंभीरता से लिया जाए, तो भारत की एकता और तरक्की और मजबूत होगी।

--- राष्ट्र प्रेस

विकेटी/केआर

संपादकीय दृष्टिकोण

एक सकारात्मक संकेत है कि हम सब मिलकर एक बेहतर समाज की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संघ की भूमिका क्या है?
संघ भारतीय समाज को एकजुट करने और सहयोग को बढ़ावा देने का कार्य करता है।
मौलाना शहाबुद्दीन का संघ के प्रति क्या दृष्टिकोण है?
मौलाना शहाबुद्दीन ने संघ के प्रयासों का समर्थन किया है और इसे समाज को जोड़ने का माध्यम माना है।
क्या संघ का दृष्टिकोण हिंदू-मुस्लिम संबंधों को सुधार सकता है?
हां, संघ की सकारात्मक सोच हिंदू-मुस्लिम संबंधों में सुधार कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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