इकबाल अंसारी ने मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता बयान का समर्थन किया, बोले — 'यही भारत की असली पहचान'
सारांश
मुख्य बातें
बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने 30 अगस्त को अयोध्या में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता संबंधी बयान का खुलकर समर्थन किया। अंसारी ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम भाईचारा ही भारत की वास्तविक पहचान है और इसी एकता से देश प्रगति करेगा।
इकबाल अंसारी का बयान
अंसारी ने कहा, 'भारत देश और दुनिया भर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच इस भाईचारे और आपसी स्नेह के लिए जाना जाता है। अच्छे कर्म भी होने चाहिए और धर्म का सम्मान भी। मोहन भागवत ने आज जो कहा है, वह सही है। अगर हमारे देश में हिंदू-मुस्लिम भाईचारा बना रहता है, तो राष्ट्र प्रगति करेगा।'
उन्होंने आगे कहा कि लोगों का सम्मान उनके कर्मों से होता है। उन्होंने गीता और रामायण का हवाला देते हुए कहा कि ईश्वर लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं — 'जैसा बोएंगे, वैसा काटेंगे।' अंसारी ने सभी नागरिकों से हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने और देश की प्रगति, विकास एवं रोज़गार पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।
भागवत का न्यूयॉर्क में संबोधन
दरअसल, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित 'वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी' कार्यक्रम में 30 देशों के 180 से अधिक प्रतिभागियों को संबोधित किया था। इस कार्यक्रम में उनसे RSS के मुसलमानों के प्रति नज़रिए पर सवाल पूछे गए।
भागवत ने 2018 में दिल्ली में मुस्लिम प्रतिभागियों के साथ हुई एक बातचीत को याद किया, जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या हिंदू राष्ट्र की अवधारणा के तहत मुसलमानों को भारत से बाहर किया जाएगा। इस पर भागवत ने कहा था, 'नहीं। वह हिंदू नहीं है। अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा।'
उन्होंने आगे कहा, 'अगर आप खुद को हिंदू कहना चाहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही ओर ले जाते हैं। और हर इंसान की एक गरिमा है। इंसानों में कोई भेद नहीं है।'
बयान का सामाजिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देश में सांप्रदायिक सद्भाव को लेकर सार्वजनिक विमर्श तेज़ है। गौरतलब है कि इकबाल अंसारी बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष के प्रमुख वादियों में से एक रहे हैं — उनका RSS प्रमुख के बयान का समर्थन करना इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि वे उस ऐतिहासिक विवाद के केंद्र में रहे जिसने दशकों तक देश की राजनीति को प्रभावित किया।
आगे की दिशा
अंसारी के इस बयान को सामाजिक एकता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब ऐतिहासिक विवादों से जुड़े व्यक्ति सार्वजनिक रूप से सद्भाव की बात करते हैं, तो इसका व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। भागवत के अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिए गए इस बयान और अंसारी के समर्थन से यह संदेश और मज़बूत हुआ है कि विविधता में एकता ही भारत की नींव है।