30 अगस्त 2026
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इकबाल अंसारी ने मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता बयान का समर्थन किया, बोले — 'यही भारत की असली पहचान'

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इकबाल अंसारी ने मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता बयान का समर्थन किया, बोले — 'यही भारत की असली पहचान'

सारांश

बाबरी मस्जिद विवाद के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता बयान का समर्थन किया। भागवत ने न्यूयॉर्क में 30 देशों के 180+ प्रतिभागियों से कहा — जो हिंदू मुसलमानों को बाहर चाहे, वह हिंदू नहीं। अंसारी बोले — यही भाईचारा भारत की असली पहचान है।

मुख्य बातें

बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने 30 अगस्त को RSS प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता बयान का समर्थन किया।
अंसारी ने कहा — 'हिंदू-मुस्लिम भाईचारा बना रहे तो राष्ट्र प्रगति करेगा।' भागवत ने न्यूयॉर्क के 'वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी' कार्यक्रम में 30 देशों के 180 से अधिक प्रतिभागियों को संबोधित किया।
भागवत ने स्पष्ट किया — जो हिंदू मुसलमानों को भारत से बाहर चाहे, 'वह हिंदू नहीं रहेगा।' भागवत ने 2018 की दिल्ली बातचीत का हवाला देते हुए कहा — 'हर इंसान की एक गरिमा है, इंसानों में कोई भेद नहीं।'

बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने 30 अगस्त को अयोध्या में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता संबंधी बयान का खुलकर समर्थन किया। अंसारी ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम भाईचारा ही भारत की वास्तविक पहचान है और इसी एकता से देश प्रगति करेगा।

इकबाल अंसारी का बयान

अंसारी ने कहा, 'भारत देश और दुनिया भर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच इस भाईचारे और आपसी स्नेह के लिए जाना जाता है। अच्छे कर्म भी होने चाहिए और धर्म का सम्मान भी। मोहन भागवत ने आज जो कहा है, वह सही है। अगर हमारे देश में हिंदू-मुस्लिम भाईचारा बना रहता है, तो राष्ट्र प्रगति करेगा।'

उन्होंने आगे कहा कि लोगों का सम्मान उनके कर्मों से होता है। उन्होंने गीता और रामायण का हवाला देते हुए कहा कि ईश्वर लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं — 'जैसा बोएंगे, वैसा काटेंगे।' अंसारी ने सभी नागरिकों से हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने और देश की प्रगति, विकास एवं रोज़गार पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।

भागवत का न्यूयॉर्क में संबोधन

दरअसल, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित 'वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी' कार्यक्रम में 30 देशों के 180 से अधिक प्रतिभागियों को संबोधित किया था। इस कार्यक्रम में उनसे RSS के मुसलमानों के प्रति नज़रिए पर सवाल पूछे गए।

भागवत ने 2018 में दिल्ली में मुस्लिम प्रतिभागियों के साथ हुई एक बातचीत को याद किया, जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या हिंदू राष्ट्र की अवधारणा के तहत मुसलमानों को भारत से बाहर किया जाएगा। इस पर भागवत ने कहा था, 'नहीं। वह हिंदू नहीं है। अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा।'

उन्होंने आगे कहा, 'अगर आप खुद को हिंदू कहना चाहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही ओर ले जाते हैं। और हर इंसान की एक गरिमा है। इंसानों में कोई भेद नहीं है।'

बयान का सामाजिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देश में सांप्रदायिक सद्भाव को लेकर सार्वजनिक विमर्श तेज़ है। गौरतलब है कि इकबाल अंसारी बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष के प्रमुख वादियों में से एक रहे हैं — उनका RSS प्रमुख के बयान का समर्थन करना इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि वे उस ऐतिहासिक विवाद के केंद्र में रहे जिसने दशकों तक देश की राजनीति को प्रभावित किया।

आगे की दिशा

अंसारी के इस बयान को सामाजिक एकता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब ऐतिहासिक विवादों से जुड़े व्यक्ति सार्वजनिक रूप से सद्भाव की बात करते हैं, तो इसका व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। भागवत के अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिए गए इस बयान और अंसारी के समर्थन से यह संदेश और मज़बूत हुआ है कि विविधता में एकता ही भारत की नींव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आलोचक यह भी पूछते हैं कि क्या यह वैश्विक मंच के लिए कूटनीतिक भाषा है या संगठन की ज़मीनी नीति में वास्तविक बदलाव। अंसारी जैसे व्यक्ति का समर्थन इस बयान को विश्वसनीयता देता है, पर इसका असर तभी टिकाऊ होगा जब यह विमर्श स्थानीय स्तर पर भी उतरे।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इकबाल अंसारी ने मोहन भागवत के किस बयान का समर्थन किया?
इकबाल अंसारी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का समर्थन किया जिसमें भागवत ने कहा कि जो हिंदू मुसलमानों को भारत से बाहर चाहे, वह हिंदू नहीं रहेगा। अंसारी ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम भाईचारा ही भारत की पहचान है और इसी से राष्ट्र प्रगति करेगा।
मोहन भागवत ने 'वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी' कार्यक्रम में क्या कहा?
भागवत ने न्यूयॉर्क में 30 देशों के 180 से अधिक प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर इंसान की एक गरिमा है और इंसानों में कोई भेद नहीं है। उन्होंने 2018 की दिल्ली बातचीत का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा में मुसलमानों को बाहर करने की कोई जगह नहीं।
इकबाल अंसारी कौन हैं और उनका बयान क्यों अहम है?
इकबाल अंसारी बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष के प्रमुख पूर्व वादी रहे हैं। उस ऐतिहासिक विवाद के केंद्र में रहे व्यक्ति का RSS प्रमुख के बयान का समर्थन करना सांप्रदायिक सद्भाव की दृष्टि से उल्लेखनीय माना जा रहा है।
भागवत ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर पहले भी बयान दिए हैं?
हाँ, भागवत ने 2018 में दिल्ली में मुस्लिम प्रतिभागियों के साथ हुई बातचीत में भी यह स्पष्ट किया था कि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा में मुसलमानों के लिए पूरी जगह है। न्यूयॉर्क के कार्यक्रम में उन्होंने उसी बातचीत को दोहराते हुए अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट किया।
अंसारी ने देश की प्रगति के लिए क्या संदेश दिया?
अंसारी ने कहा कि सभी नागरिकों को हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देना चाहिए और देश की प्रगति, विकास एवं रोज़गार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने गीता और रामायण का हवाला देते हुए कर्म को सर्वोपरि बताया।
राष्ट्र प्रेस
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