भागवत के न्यूयॉर्क भाषण पर विपक्ष का तीखा हमला: 'यह संदेश RSS-BJP कार्यकर्ताओं को दें'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा न्यूयॉर्क में आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस' कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम एकता पर दिए गए भाषण को लेकर विपक्षी दलों ने 30 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया जताई। कांग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) तक — सभी दलों के नेताओं ने एकसुर में कहा कि भागवत को यह संदेश भारत में अपने ही संगठन और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं तक पहुँचाना चाहिए।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, 'वे बदले हुए लहजे में भाषण देकर लौटे हैं। उन्हें उस जगह बोलने की इजाजत नहीं मिली जहां वे बोलना चाहते थे, इसलिए उन्होंने एक छोटे से कमरे में अपनी बात कही और लोग उन्हें सुनने भी नहीं आए।' उन्होंने आगे कहा कि भारत का संविधान लिंग, धर्म, जाति और भाषा के भेदभाव के बिना सभी को समानता की गारंटी देता है।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने सीधा सवाल उठाया, 'वे अमेरिका में क्यों भाषण देते हैं? उनको यह भाषण भाजपा और संघ के सभी कार्यकर्ताओं को देना चाहिए। उनके इस भाषण की आवश्यकता देश में है।' राजपूत ने यह भी आरोप लगाया कि RSS देश को बचाने की बजाय बिगाड़ने का काम कर रहा है।
कांग्रेस नेता उदित राज ने भागवत पर 'दोहरे चरित्र' का आरोप लगाते हुए कहा कि जब भारत में 80 करोड़ से अधिक लोग गरीब हैं, तब न्यूयॉर्क जाकर गरीबी दूर करने की बात करना विरोधाभासी है। उन्होंने RSS पर चुनावी राजनीति में झूठ का सहारा लेने का भी आरोप लगाया।
सपा और टीएमसी की राय
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद हरेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि भागवत को यह निर्देश सबसे पहले BJP के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मोहन भागवत को भी उनके काम और आचरण की समीक्षा करनी चाहिए।'
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद सौगत रॉय ने अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाते हुए कहा, 'यह अच्छी बात है। हम सभी चाहते हैं कि भारत में एकता और विविधता बनी रहे। लेकिन मुझे नहीं पता कि मोहन भागवत ने जो कहा है, उस पर वे सच में यकीन करते हैं या नहीं।'
DMK का संवैधानिक तर्क
DMK नेता टी.के.एस. इलांगोवन ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि हर भारतीय नागरिक को अपनी पसंद का धर्म मानने, उसका पालन करने और प्रचार-प्रसार करने का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा, 'उन्हें इन संवैधानिक अधिकारों की कोई परवाह नहीं है।' इलांगोवन ने भागवत के रवैये को 'असभ्य' बताया।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के 'यूनिवर्सल वननेस' कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक समरसता पर जोर दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्ष का तर्क है कि विदेश में दिया गया यह संदेश तब तक अर्थपूर्ण नहीं होगा जब तक इसे जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया जाता।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि RSS और BJP इन आलोचनाओं का जवाब किस रूप में देते हैं और क्या भागवत के विदेश में दिए बयान देश में नीतिगत या संगठनात्मक बदलाव की दिशा में कोई संकेत देते हैं।