PM मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा: राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने ताशकंद एयरपोर्ट पर किया विशेष स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अगस्त की शाम ताशकंद पहुँचकर उज्बेकिस्तान की अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा का आगाज़ किया। एक विशेष राजनयिक संकेत के रूप में, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव स्वयं हवाई अड्डे पर उनके स्वागत के लिए उपस्थित रहे — एक कदम जिसे दोनों देशों के बीच पिछले 12 वर्षों में गहरी हुई द्विपक्षीय मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है। यह मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है।
यात्रा का एजेंडा और मुख्य चर्चाएँ
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। इस वार्ता में विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 के साझा विकास विजन को आगे बढ़ाने पर केंद्रित होगी। व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा — ये चार क्षेत्र वार्ता के प्रमुख स्तंभ बताए जा रहे हैं।
अपने प्रस्थान वक्तव्य में मोदी ने कहा, 'हाल के वर्षों में भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मैं व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा में हमारे सहयोग को और गहरा करने और विकसित भारत और यंगी उज्बेकिस्तान के हमारे साझा विजन को आगे बढ़ाने पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ अपनी चर्चा को लेकर उत्सुक हूँ।'
सांस्कृतिक संबंधों को सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में स्थित शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा करेंगे। उन्होंने इस स्थल को 'भारत और उज्बेकिस्तान को जोड़ने वाले घनिष्ठ सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों को सम्मान' बताया। यह कदम केवल राजनयिक नहीं, बल्कि सभ्यतागत निरंतरता की स्वीकृति भी है।
उज्बेक जनता में उत्साह
मोदी के आगमन से पहले ताशकंद में उत्साह का माहौल था। एक उज्बेक महिला ने कहा, 'भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत है। हम उज्बेक लोग आपके आगमन की खबर सुनकर बहुत खुश हैं। हम चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बढ़ते रहें। जय हिंद, जय भारत, जय उज्बेकिस्तान।' यह भावना दर्शाती है कि भारत की छवि मध्य एशिया में सकारात्मक रूप से स्थापित हो रही है।
पिछली यात्राओं का संदर्भ
मोदी इससे पहले 2015 में उज्बेकिस्तान और अन्य मध्य एशियाई देशों के दौरे पर गए थे। इसके बाद 2016 और 2022 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के अवसर पर वह ताशकंद आए। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने 2018 में भारत की राजकीय यात्रा की थी और 2019 में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में भी भाग लिया था।
आगे का कार्यक्रम: बिश्केक और SCO शिखर सम्मेलन
ताशकंद यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी, किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक रवाना होंगे। वहाँ वे SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित 26वें SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह यात्रा भारत की मध्य एशिया नीति के लिए एक महत्वपूर्ण राजनयिक पड़ाव साबित हो सकती है।