जम्मू में रिटायर्ड नायब सूबेदार की चाइनीज माझे से गला कटकर मौत, प्रतिबंध के बावजूद बिक्री जारी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू के रिंग रोड के पास 31 अगस्त 2026 की देर शाम एक दर्दनाक हादसे में सेवानिवृत्त नायब सूबेदार लखविंदर सिंह की चाइनीज माझे की धारदार डोर से गला कट जाने के कारण मौत हो गई। वे बाइक पर सवार होकर बारी ब्राह्मणा स्थित अपनी कार्यस्थल से आरएसपुरा में अपने घर लौट रहे थे, जब यह हादसा हुआ।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
अधिकारियों के अनुसार, लखविंदर सिंह बिश्नाह इलाके से बाइक पर निकले थे और बारी ब्राह्मणा की एक औद्योगिक इकाई में निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में अपनी ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहे थे। रास्ते में चाइनीज माझे की डोर उनके गले में आ गई, जिससे गहरा घाव हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें तत्काल नज़दीकी अस्पताल पहुँचाया, लेकिन चोटों की गंभीरता के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
प्रतिबंध के बावजूद बिक्री जारी
उल्लेखनीय है कि अधिकारियों ने चाइनीज माझे की बिक्री और उपयोग पर पहले ही प्रतिबंध लगा रखा है। हाल के हफ्तों में जम्मू भर में कई दुकानदारों को इस प्रतिबंधित सामग्री का अवैध कारोबार करने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया है। इसके बावजूद यह घातक हादसा यह सवाल उठाता है कि प्रतिबंध का क्रियान्वयन कितना प्रभावी रहा है। स्थानीय निवासी अब प्रतिबंधित धागे के विक्रेताओं और उपयोगकर्ताओं के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई और जाँच
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। दोषियों की पहचान कर उन्हें सजा दिलाने के लिए जाँच जारी है। यह घटना एक ऐसे समय में सामने आई है जब प्रशासन पहले से ही इस प्रतिबंधित धागे के खिलाफ अभियान चला रहा है।
पूर्व सैनिकों की सुरक्षा और कल्याण
जम्मू-कश्मीर सरकार ने स्थानीय पुलिस और जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के समन्वय से केंद्रशासित प्रदेश में 4,000 पूर्व सैनिक स्वयंसेवकों की तैनाती को मंजूरी दी है, जो गैर-लड़ाकू स्थिर सुरक्षा कर्तव्यों और बिजली स्टेशनों तथा पुलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की रक्षा में सहयोग देंगे। जम्मू जिले में पूर्व सैनिकों को जिला सैनिक कल्याण कार्यालय (ZSWO), जम्मू द्वारा कल्याण, दस्तावेज़ीकरण और पुनर्रोजगार संबंधी सहायता प्रदान की जाती है।
आगे क्या होगा
इस हादसे के बाद चाइनीज माझे के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई और तेज होने की उम्मीद है। पूर्व सैनिकों के संगठन और स्थानीय निवासी मिलकर प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं कि प्रतिबंध को कागज़ों से निकालकर ज़मीन पर उतारा जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएँ न दोहराई जाएँ।