गौरव भाटिया का राहुल गांधी पर हमला: 'दलित-पिछड़ा विरोधी नेता' का आरोप, पंजाब हड़ताल पर भी निशाना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने 31 अगस्त को नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। भाटिया ने दावा किया कि राहुल गांधी से अधिक गैर-जिम्मेदार, दलित और पिछड़ा विरोधी नेता भारत में न हुआ है और न होगा। उनका यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया जब राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक कार्यक्रम में कथित शुद्धिकरण के मुद्दे को दलित विरोधी करार दिया था।
खड़गे के 'अपमान' पर भाटिया का पलटवार
भाटिया ने कहा कि राहुल गांधी खड़गे के अपमान की बात करते हैं, जबकि असली अपमान तो उनके अपने परिवार ने किया है। उन्होंने याद दिलाया कि जब प्रियंका गांधी वाड्रा नामांकन दाखिल करने गई थीं, तब कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे दूसरी पंक्ति में बैठे थे और दरवाजे पर अंदर आने की गुहार लगा रहे थे। भाटिया ने तर्क दिया कि यदि यह अपमान नहीं है, तो फिर अपमान किसे कहते हैं।
भाटिया ने यह भी कहा कि खड़गे ने स्वयं अपने अपमान की बात रखी थी, लेकिन राहुल गांधी करीब तीन सप्ताह तक चुप रहे और उन्होंने इस मामले की कोई सुध नहीं ली। उनके अनुसार, राहुल गांधी के पास विदेश यात्राओं के लिए समय है, परंतु दलित या पिछड़े समाज के किसी व्यक्ति की शिकायत पर वे गंभीरता नहीं दिखाते।
उदित राज के बयानों पर सवाल
भाटिया ने कांग्रेस नेता उदित राज के दो विवादास्पद बयानों का हवाला दिया। पहला, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के संदर्भ में उदित राज का कथित बयान — 'कोविंद जी, आप समाज के लिए कलंक हैं' — और दूसरा, अनुसूचित जनजाति से आने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बारे में उनका कथित पोस्ट — 'इनके जैसा राष्ट्रपति किसी देश को न मिले, चमचागिरी की भी हद है।' भाटिया ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी ने इन दोनों बयानों पर एक शब्द भी क्यों नहीं बोला।
भाटिया ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी ओबीसी की बात करते हैं, लेकिन जब ओबीसी आयोग के गठन का प्रश्न उठा, तब कांग्रेस की सरकारें इसे क्रियान्वित नहीं कर पाईं। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी राज्य चुनावों में कांग्रेस की स्थिति कमज़ोर होगी, इसीलिए पार्टी इस समय 'ओछी राजनीति' पर उतर आई है।
पंजाब सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर निशाना
प्रेस वार्ता के दूसरे हिस्से में भाटिया ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि पंजाब के 23 जिलों में करीब 3 लाख सरकारी कर्मचारी महा हड़ताल पर हैं, और उनके साथ लगभग 3.5 लाख पेंशनधारक भी एकजुटता दिखा रहे हैं।
भाटिया के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने कर्मचारियों के नियमितीकरण, महंगाई भत्ते (DA) के भुगतान और पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने के वादे किए थे, लेकिन इनमें से कोई भी पूरा नहीं हुआ। उन्होंने 29 अगस्त 2026 के एक कथित सरकारी आदेश का उल्लेख किया, जिसमें प्रदर्शनकारियों की सूची बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।
लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों पर सवाल
भाटिया ने भगवंत मान सरकार के उस रुख की आलोचना की, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि हड़ताल वापस होने से पहले वे बातचीत नहीं करेंगे। भाटिया ने इसे लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध बताया और कहा कि एक मुख्यमंत्री को प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए, न कि दबाव बनाना चाहिए।
उन्होंने अरविंद केजरीवाल को भी घेरते हुए कहा कि मफलर के पीछे छिपने से जवाबदेही नहीं टलेगी। भाटिया ने आरोप लगाया कि AAP सरकार ने पंजाब का सरकारी खजाना खाली कर दिया है और संवैधानिक दायित्वों को निभाने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता इस सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए तैयार है।