क्या मल्लिकार्जुन खड़गे एक परिवार के कठपुतली बन गए हैं? : गौरव वल्लभ
सारांश
Key Takeaways
- मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर भाजपा का पलटवार
- राज्य सरकारें संविधान के अनुसार कार्य करती हैं
- कठपुतली संस्कृति पर कटाक्ष
नई दिल्ली, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के 'कठपुतली' संबंधी बयान पर भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति खुद एक परिवार की कठपुतली की तरह कार्य करता है, उसे दूसरों को कठपुतली कहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे, जो कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, खुलकर यह कहते हैं कि सभी महत्वपूर्ण निर्णय 'सुप्रीम कमांड' द्वारा लिए जाते हैं। ऐसे में वे दूसरों को कठपुतली क्यों बताते हैं।
गौरव वल्लभ ने स्पष्ट किया कि भारत में सभी राज्य सरकारें संविधान के अनुसार काम करती हैं। हर राज्यपाल और राज्य सरकार संविधान को बनाए रखने की शपथ लेकर कार्यरत हैं। कोई भी राज्यपाल राज्य सरकार का कठपुतली नहीं बनेगा। खड़गे कठपुतली बन सकते हैं, लेकिन राज्यपाल ने शपथ ली है कि वह राज्य सरकार का कठपुतली नहीं बनेगा।
खड़गे पर कटाक्ष करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि कठपुतली संस्कृति आपकी और आपकी पार्टी की है। खड़गे एक परिवार की कठपुतली बने हुए हैं।
गौरव वल्लभ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव में हार का बहाना पहले से ही ढूंढ रहे हैं, जबकि चुनाव अभी शुरू नहीं हुए हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के तथाकथित गठबंधन सहयोगी अब ईवीएम और एसआईआर को चुनाव में हारने से पहले ढाल बना रहे हैं। हारने पर परिवार के सदस्यों का क्या उत्तर देंगे, इसकी तैयारी कर रहे हैं।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि बिहार चुनाव से पहले तेजस्वी यादव और बंगाल चुनाव से ठीक 8 महीने पहले ममता बनर्जी ने भी यही किया था। ऐसे तैयारी डीएमके भी कर सकती है। हारने से पहले ब्लेम गेम शुरू कर देते हैं। अखिलेश यादव यह नहीं सोचते कि यूपी के लोग समाजवादी पार्टी को क्यों नकार रहे हैं। हार का ठीकरा किसी और पर फोड़ने की आदत से बाज आइए।
तेजस्वी यादव को राजद का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर गौरव वल्लभ ने कहा कि लालू यादव अपने परिवार को एक नहीं कर पाए, वे अपने बेटे को नई जिम्मेदारी दे रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि जो परिवार को संभाल नहीं पा रहा है, वह प्रदेश को कैसा नेतृत्व देगा।