राधामोहन सिंह का 57 साल का राजनीतिक सफर: जनसंघ से केंद्रीय कृषि मंत्री तक, पूर्वी चंपारण से 7 बार जीत
सारांश
मुख्य बातें
राधामोहन सिंह — बिहार की राजनीति में 57 वर्षों से अधिक समय से सक्रिय एक ऐसे नेता, जिन्होंने जनसंघ के दौर से लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद तक का सफर तय किया। पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) लोकसभा सीट से 7 बार संसद पहुँचे सिंह को पार्टी में संगठन के प्रति अटूट समर्पण के लिए जाना जाता है। 1 सितंबर 2025 को अपना जन्मदिन मना रहे सिंह का जीवन बिहार की ग्रामीण राजनीति और किसान-हितों के इर्द-गिर्द बुना गया है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
राधामोहन सिंह का जन्म 1 सितंबर 1949 को बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के नरहा पानापुर गाँव में हुआ था। उन्होंने मोतिहारी के एमएस कॉलेज से स्नातक (बीए) की शिक्षा पूरी की। किशोरावस्था से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए और स्वयंसेवक के रूप में संगठन की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वयं सिंह कहते हैं कि उनके जीवन की सफलता का श्रेय आरएसएस को जाता है — किशोरावस्था में संघ से मिली प्रेरणा ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया।
उनका विवाह शांति देवी से हुआ है और परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। राजनीतिक व्यस्तताओं के बावजूद वे अपनी जड़ों से जुड़े रहे और खेती-किसानी से नाता बनाए रखा।
संसदीय करियर: सात जीत, एक सीट
सिंह पहली बार 1989 में 9वीं लोकसभा के लिए मोतिहारी सीट से चुने गए, जहाँ उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की दिग्गज नेता कमला मिश्रा मधुकर को 78,000 से अधिक मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। इसके बाद उन्होंने 1996, 1999, 2009, 2014, 2019 और 2024 के आम चुनावों में भी पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) सीट से जीत दर्ज की। वर्तमान में वे 18वीं लोकसभा के सदस्य हैं।
गौरतलब है कि यह सीट दशकों से सिंह की राजनीतिक पहचान का पर्याय बन चुकी है — एक ऐसी निरंतरता जो बिहार की बदलती राजनीतिक हवाओं में भी अटूट रही।
केंद्रीय मंत्री के रूप में कृषि क्षेत्र में योगदान
2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बनने पर सिंह को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री का दायित्व सौंपा गया, जो उन्होंने 2019 तक निभाया। उनके कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में अनेक योजनाएँ प्रारंभ की गईं। किसानों और ग्रामीण भारत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उनके इस विश्वास से उपजती है कि किसानों और गाँवों को सशक्त बनाने से ही राष्ट्र समृद्ध होगा।
संगठन में भूमिकाएँ और पार्टी में स्थान
सिंह ने BJP की बिहार इकाई के अध्यक्ष (2006–2009) के रूप में पार्टी को राज्य में मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद वे BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (2020–2023) भी रहे। इसके अतिरिक्त वे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रभारी व सह-प्रभारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। गरीबों और दलितों के उत्थान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को पार्टी के भीतर व्यापक सराहना मिलती है।
57 साल की विरासत
जनसंघ से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले राधामोहन सिंह आज BJP के उन चुनिंदा नेताओं में हैं जो पार्टी के पूर्व-अवतार से लेकर वर्तमान तक सक्रिय हैं। उनका सफर बिहार की जमीनी राजनीति, संगठन के प्रति अनुशासन और किसान-केंद्रित सोच का संगम है। आने वाले समय में वे 18वीं लोकसभा में पूर्वी चंपारण की आवाज़ बने रहेंगे।