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दिग्विजय सिंह का राज्यसभा में 12 साल का सफर पूरा, 1,010 सवालों से संसद में बनाई पहचान

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दिग्विजय सिंह का राज्यसभा में 12 साल का सफर पूरा, 1,010 सवालों से संसद में बनाई पहचान

सारांश

12 साल, दो कार्यकाल और 1,010 सवाल — दिग्विजय सिंह का राज्यसभा सफर 21 जून को खत्म हुआ। किसानों से लेकर मणिपुर संकट तक, उन्होंने संसदीय मंच को जवाबदेही का हथियार बनाया। अब सवाल है — आगे क्या?

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का राज्यसभा में लगातार दूसरा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हुआ, कुल 12 वर्ष का संसदीय सफर पूरा।
उन्होंने 12 वर्षों में शासन, कृषि, शिक्षा, आंतरिक सुरक्षा और संवैधानिक मुद्दों पर 1,010 प्रश्न उठाए।
वे शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे।
गृह मामले, वित्त, कॉर्पोरेट मामले और शहरी विकास समितियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और 1977 से कांग्रेस के सक्रिय नेता रहे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का राज्यसभा में लगातार दूसरा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया, जिसके साथ उनका 12 वर्षों का संसदीय सफर पूरा हुआ। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा, कृषि और सामाजिक कल्याण सहित विभिन्न मुद्दों पर सदन में सक्रिय भूमिका निभाई।

संसदीय प्रदर्शन: 1,010 सवाल, 12 साल

दिग्विजय सिंह के निजी सचिव ओपी शर्मा के अनुसार, सिंह ने अपने पूरे कार्यकाल में शासन, जन कल्याण, कृषि, शिक्षा, आंतरिक सुरक्षा और संवैधानिक विषयों से संबंधित 1,010 प्रश्न उच्च सदन में उठाए। शर्मा ने कहा कि सिंह ने हमेशा संसदीय मंचों का उपयोग आम नागरिकों — किसानों, छात्रों और मजदूरों — की आवाज़ बुलंद करने के लिए किया।

यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब विपक्षी सांसदों की संसदीय सक्रियता पर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं। गौरतलब है कि राज्यसभा में प्रश्नकाल को लोकतांत्रिक जवाबदेही का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है।

समिति कार्य और विशेष योगदान

सदन की बहसों से परे, दिग्विजय सिंह गृह मामले, वित्त, कॉर्पोरेट मामले और शहरी विकास से जुड़ी संसदीय समितियों के सक्रिय सदस्य रहे। वे नियम समिति, विशेषाधिकार समिति और कई चुनिंदा जाँच समितियों में भी शामिल थे।

शर्मा ने विशेष रूप से शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल का उल्लेख किया। इसके अलावा, जब मणिपुर में बड़े पैमाने पर हिंसा हो रही थी, तब सिंह ने समिति के समक्ष औपचारिक रूप से इस संकट और उसके मानवीय प्रभाव पर ध्यान दिलाने का प्रयास किया था।

राजनीतिक करियर: पाँच दशकों का अनुभव

1977 से कांग्रेस से जुड़े दिग्विजय सिंह का राजनीतिक सफर विधानसभा से लेकर संसद तक फैला हुआ है। वे पाँच बार विधायक रहे और मध्य प्रदेश सरकार में कृषि, सिंचाई तथा मत्स्य पालन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। 1993 से 2003 तक वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और इसके बाद लोकसभा में राज्य का प्रतिनिधित्व किया। 2014 में वे पहली बार राज्यसभा पहुँचे और 2020 में दूसरी बार निर्वाचित हुए।

आगे क्या

कार्यकाल समाप्त होने के साथ यह चर्चा तेज़ हो गई है कि दिग्विजय सिंह अपनी राजनीतिक सक्रियता किस रूप में जारी रखेंगे। 77 वर्षीय इस नेता के भविष्य की भूमिका पर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

010 सवालों का आँकड़ा प्रभावशाली लगता है, लेकिन असली मापदंड यह है कि इनमें से कितने सवालों ने नीतिगत बदलाव या सरकारी जवाबदेही को वास्तव में प्रभावित किया। दिग्विजय सिंह की संसदीय सक्रियता निर्विवाद है, परंतु उनकी विरासत विवादास्पद भी रही — मणिपुर जैसे मुद्दों पर समिति में आवाज़ उठाना और सदन के बाहर की राजनीतिक भूमिका, दोनों एक साथ चलती रहीं। यह भी उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने उन्हें तीसरा कार्यकाल नहीं दिया — यह पार्टी की आंतरिक प्राथमिकताओं का संकेत है जिस पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः मौन रहती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल कब और कैसे समाप्त हुआ?
दिग्विजय सिंह का राज्यसभा में लगातार दूसरा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हुआ, जिससे उनका कुल 12 वर्षों का संसदीय सफर पूरा हो गया। वे 2014 में पहली बार और 2020 में दूसरी बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।
दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में कितने सवाल उठाए?
उनके निजी सचिव ओपी शर्मा के अनुसार, दिग्विजय सिंह ने 12 वर्षों में शासन, कृषि, शिक्षा, आंतरिक सुरक्षा और संवैधानिक मुद्दों पर कुल 1,010 प्रश्न उठाए। ये प्रश्न किसानों, छात्रों और मजदूरों सहित आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित थे।
दिग्विजय सिंह किन संसदीय समितियों में शामिल रहे?
वे गृह मामले, वित्त, कॉर्पोरेट मामले और शहरी विकास से जुड़ी समितियों के सदस्य रहे। इसके अलावा वे शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष भी रहे।
दिग्विजय सिंह का राजनीतिक करियर कैसा रहा है?
1977 से कांग्रेस से जुड़े दिग्विजय सिंह पाँच बार विधायक रहे और 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद लोकसभा में राज्य का प्रतिनिधित्व किया और 2014 में राज्यसभा पहुँचे।
मणिपुर हिंसा पर दिग्विजय सिंह ने संसद में क्या किया?
मणिपुर में बड़े पैमाने पर हिंसा के दौरान दिग्विजय सिंह ने संसदीय समिति के समक्ष औपचारिक रूप से इस संकट और उसके मानवीय प्रभाव पर ध्यान दिलाने का प्रयास किया। उनके निजी सचिव के अनुसार, उनका मानना था कि संसदीय समितियों को इस संकट पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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