दिग्विजय सिंह ने राजनीति में बने रहने का किया ऐलान, कांग्रेस के प्रति प्रतिबद्धता जताई
सारांश
Key Takeaways
- दिग्विजय सिंह ने राजनीति में बने रहने का संकल्प लिया।
- किसानों के मुद्दों पर जोर दिया, खासकर बासमती चावल के जीआई टैग पर।
- कांग्रेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
भोपाल, ८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों के बीच दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि वह राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे और भविष्य में भी इंडियन नेशनल कांग्रेस के लिए कार्य करते रहेंगे।
भोपाल में रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने खुद इंडियन नेशनल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से अनुरोध किया था कि उन्हें तीसरी बार राज्य सभा के लिए उम्मीदवार न बनाया जाए।
दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि इस निर्णय को उनकी सक्रिय राजनीति से संन्यास के रूप में नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे पूर्ण रूप से कांग्रेस के प्रति समर्पित हैं और पहले की तरह ही मध्य प्रदेश में पार्टी के लिए कार्य करते रहेंगे।
उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाया। खासतौर पर उन्होंने राज्य के बासमती चावल को जीआई टैग न मिलने पर सरकार पर सवाल उठाए।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि राज्यसभा का चुनाव न लड़ने का मतलब यह नहीं है कि वे पार्टी की गतिविधियों या जनसेवा से दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे हमेशा की तरह प्रदेश में सक्रिय रहेंगे और आखिरी सांस तक जनता और पार्टी के लिए लड़ते रहेंगे।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में हर साल लगभग २७ लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का उत्पादन होता है, जिससे करीब एक लाख किसानों को लाभ होता है।
उन्होंने कहा कि कभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सामान्य चावल से तीन गुना अधिक कीमत पाने वाला यह बासमती अब प्रतिस्पर्धा में पीछे हो गया है, क्योंकि इसे एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी का जीआई टैग नहीं मिला है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बासमती के लिए जीआई टैग वाले जिलों की संख्या ३ से बढ़ाकर ४८ कर दी गई है, जिससे वहां के किसानों को वैश्विक बाजार में बड़ा फायदा मिल रहा है।
उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत कदम उठाकर मध्य प्रदेश के किसानों के हितों की रक्षा करे और राज्य के बासमती चावल को फिर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम दर्जा दिलाए।