30 जुलाई 2026
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रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की आर्मेनिया के जनरल स्टाफ प्रमुख से मुलाकात, सैन्य सहयोग और आधुनिक रक्षा उपकरणों पर चर्चा

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रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की आर्मेनिया के जनरल स्टाफ प्रमुख से मुलाकात, सैन्य सहयोग और आधुनिक रक्षा उपकरणों पर चर्चा

सारांश

भारत-आर्मेनिया रक्षा संबंध अब केवल औपचारिकता नहीं रहे — रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सीडीएस जनरल अनिल चौहान की लेफ्टिनेंट जनरल एडवर्ड अस्रयान के साथ बैठकें, गार्ड ऑफ ऑनर और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि — ये सब मिलकर एक गहरी रणनीतिक साझेदारी की तस्वीर पेश करते हैं।

मुख्य बातें

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 29 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में आर्मेनिया के लेफ्टिनेंट जनरल एडवर्ड अस्रयान से मुलाकात की।
वार्ता में सैन्य प्रशिक्षण , क्षमता विकास और आधुनिक रक्षा उपकरणों की आपूर्ति पर चर्चा हुई।
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने भी लेफ्टिनेंट जनरल अस्रयान के साथ विस्तृत बातचीत की।
लेफ्टिनेंट जनरल अस्रयान को गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया।
उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर 'इटरनल फ्लेम' पर पुष्पांजलि अर्पित की।
दोनों देशों ने सैन्य हार्डवेयर में संयुक्त उपक्रमों की संभावनाओं पर विचार किया।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 29 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में आर्मेनिया के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एडवर्ड अस्रयान के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता विकास और आधुनिक रक्षा उपकरणों की आपूर्ति जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रित चर्चा हुई। यह बैठक भारत-आर्मेनिया रक्षा संबंधों को एक नए और ठोस स्तर पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बैठक का मुख्य एजेंडा

वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने सैन्य सहयोग के विस्तार के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। विशेष रूप से सैन्य प्रशिक्षण, सेनाओं की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने और उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करने के मुद्दों पर फोकस किया गया। भारत ने इस अवसर पर एक विश्वसनीय रक्षा साझेदार के रूप में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और आर्मेनिया को उन्नत रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने में सहयोग का भरोसा दिलाया।

सीडीएस जनरल अनिल चौहान की भूमिका

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने भी लेफ्टिनेंट जनरल एडवर्ड अस्रयान के साथ विस्तृत चर्चा की। नई दिल्ली में आगमन पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर औपचारिक रूप से सम्मानित किया गया, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों और परस्पर सम्मान का प्रतीक है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा निर्यात नीति को सक्रिय रूप से विस्तार दे रहा है।

संयुक्त उपक्रमों की संभावनाएँ

बैठक में दोनों देशों ने सैन्य हार्डवेयर के विकास में संयुक्त उपक्रमों की संभावनाओं पर भी विचार किया। गौरतलब है कि आर्मेनिया पिछले कुछ वर्षों में भारत से रक्षा उपकरण खरीदने वाले प्रमुख देशों में उभरा है। दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि वे नई तकनीक और आधुनिक रक्षा प्रणालियों के क्षेत्र में मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि

इस दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल एडवर्ड अस्रयान ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का भी दौरा किया। वहाँ उन्होंने 'इटरनल फ्लेम' पर पुष्पांजलि अर्पित कर भारतीय सशस्त्र बलों के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह भाव-भरा कदम दोनों देशों के बीच साझा मूल्यों, गहरी मित्रता और परस्पर सम्मान को रेखांकित करता है।

आगे की राह

यह वार्ता इस बात का संकेत है कि भारत और आर्मेनिया एक मजबूत, पारस्परिक रूप से लाभकारी रणनीतिक साझेदारी की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। भविष्य में दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में और अधिक ठोस समझौतों और सहयोग की उम्मीद की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब आर्मेनिया पारंपरिक रूप से रूसी हथियारों पर निर्भर रहा है और अब विविधीकरण की ओर बढ़ रहा है। भारत के लिए यह न केवल रक्षा निर्यात का अवसर है, बल्कि दक्षिण काकेशस क्षेत्र में रणनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने का भी मौका है। हालाँकि, संयुक्त उपक्रमों की 'संभावनाओं पर विचार' और वास्तविक समझौतों के बीच की दूरी अभी स्पष्ट नहीं है। असली परीक्षा तब होगी जब ये बातचीत ठोस अनुबंधों और सत्यापन-योग्य रक्षा सहयोग में तब्दील हो।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और आर्मेनिया के लेफ्टिनेंट जनरल एडवर्ड अस्रयान की बैठक में क्या हुआ?
29 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता विकास और आधुनिक रक्षा उपकरणों की आपूर्ति पर चर्चा हुई। भारत ने आर्मेनिया को उन्नत रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
आर्मेनिया पिछले कुछ वर्षों में भारत से रक्षा उपकरण खरीदने वाले प्रमुख देशों में उभरा है और वह अपनी रक्षा आपूर्ति में विविधता लाना चाहता है। भारत के लिए यह रक्षा निर्यात बढ़ाने और दक्षिण काकेशस क्षेत्र में रणनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने का अवसर है।
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने इस दौरे में क्या भूमिका निभाई?
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने लेफ्टिनेंट जनरल एडवर्ड अस्रयान के साथ अलग से विस्तृत चर्चा की। यह बैठक दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय सैन्य संवाद को दर्शाती है।
लेफ्टिनेंट जनरल एडवर्ड अस्रयान ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर क्या किया?
उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर 'इटरनल फ्लेम' पर पुष्पांजलि अर्पित कर भारतीय सशस्त्र बलों के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह भाव-भरा कदम दोनों देशों के साझा मूल्यों और परस्पर सम्मान का प्रतीक है।
भारत-आर्मेनिया रक्षा संबंधों में आगे क्या होने की उम्मीद है?
दोनों देशों ने सैन्य हार्डवेयर विकास में संयुक्त उपक्रमों की संभावनाओं पर विचार किया है। भविष्य में ठोस रक्षा समझौतों और नई तकनीक के क्षेत्र में और गहरे सहयोग की उम्मीद जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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