आदित्य ठाकरे का पश्चिम बंगाल चुनावों पर तीखा हमला, लोकतंत्र और संघीय ढाँचे पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
Key Takeaways
- आदित्य ठाकरे ने 29 अप्रैल 2026 को 'एक्स' पर पोस्ट कर पश्चिम बंगाल चुनावों में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए।
- उनके अनुसार लाखों मतदाताओं को कथित तौर पर उनके मताधिकार से वंचित किया गया।
- ठाकरे ने चुनाव आयोग को पक्षपातपूर्ण और केंद्रीय बलों की तैनाती को भय का माहौल बनाने वाला बताया।
- 'सहकारी संघवाद' के सिद्धांत का उल्लंघन बताते हुए केंद्र-राज्य संतुलन पर सवाल उठाए।
- ठाकरे ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक छवि से जुड़ा मामला करार दिया।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने 29 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल में चल रही चुनावी प्रक्रिया को लेकर कड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए और लोगों से अपील की कि वे निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक दृष्टि से बंगाल में हो रही घटनाओं का मूल्यांकन करें। ठाकरे के अनुसार, यह मामला केवल किसी एक नेता या दल का नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक आदर्शों और संघीय ढाँचे की रक्षा से जुड़ा है।
मुख्य आरोप और बयान
ठाकरे ने अपनी पोस्ट में लिखा कि बंगाल का गौरव इस समय चुनाव जीतने की लालच भरी ताकत के सामने चुनौती बनकर खड़ा है। उनका कथित आरोप है कि राज्य के नागरिकों को परेशान किया गया और लाखों मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया गया। उन्होंने कहा कि यह सब उस देश में हो रहा है, जो कभी खुद को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहने पर गर्व करता था।
चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों पर निशाना
ठाकरे ने चुनाव आयोग को पक्षपातपूर्ण करार देते हुए आरोप लगाया कि बंगालियों को डराने-धमकाने की कोशिश की गई और उन्हें दबाव में रखकर एक विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुँचाने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार, केंद्रीय बलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर मतदाताओं के बीच भय का माहौल बनाया गया। ठाकरे ने यह भी कहा कि इन बलों को उन क्षेत्रों से हटाया गया जहाँ देश की सुरक्षा और अशांत इलाकों में शांति बनाए रखने की वास्तविक जरूरत थी।
संघीय ढाँचे और सहकारी संघवाद पर जोर
संघीय व्यवस्था का उल्लेख करते हुए ठाकरे ने 'सहकारी संघवाद' के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत में राज्यों और केंद्र के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है, लेकिन मौजूदा हालात में इस सिद्धांत का उल्लंघन होता दिख रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर पहले से ही सवाल उठाते रहे हैं।
लोकतंत्र पर व्यापक चिंता
ठाकरे ने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया के संचालन से यह संकेत मिलता है कि भारतीय लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उनके मुताबिक, यह डर और नफरत के सहारे किसी राज्य पर कब्जा करने का एक संस्थागत प्रयास प्रतीत होता है, जिसमें विभिन्न संस्थाओं, केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों का कथित दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक छवि से भी जोड़ा।
बंगाल की जनता से अपील
अपने बयान के अंत में ठाकरे ने उम्मीद जताई कि बंगाल की जनता इस कथित लालच और खतरे का करारा जवाब देगी। उन्होंने इसे बंगाल के सम्मान, उसके गौरव और भारत के लोकतांत्रिक आदर्शों से जुड़ा मामला बताया। गौरतलब है कि बंगाल में चुनावी हिंसा और बाहरी हस्तक्षेप के आरोप हर चुनाव चक्र में उठते रहे हैं — यह बयान उसी दीर्घकालिक विवाद की नई कड़ी है।