उद्धव ठाकरे के चुनाव न लड़ने के बाद कांग्रेस महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में उतारेगी अपना उम्मीदवार

Click to start listening
उद्धव ठाकरे के चुनाव न लड़ने के बाद कांग्रेस महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में उतारेगी अपना उम्मीदवार

सारांश

उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव से हटने के बाद MVA गठबंधन में खुली दरार — कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया। 46 विधायकों वाले गठबंधन में क्रॉस-वोटिंग का खतरा, और 12 मई की परीक्षा से पहले सहयोगियों के बीच तनाव चरम पर।

Key Takeaways

  • कांग्रेस ने 12 मई के महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में अपना स्वतंत्र उम्मीदवार उतारने की घोषणा की।
  • उद्धव ठाकरे ने 13 मई को कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव न लड़ने का फैसला किया; शिवसेना (यूबीटी) ने अंबादास दानवे को उम्मीदवार बनाया।
  • MPCC अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दानवे की उम्मीदवारी पर कड़ी नाराज़गी जताई।
  • MVA के पास कुल 46 विधायक हैं; 9 सीटों के लिए जीत का कोटा 29 वोट है।
  • नामांकन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल; पर्यवेक्षकों ने क्रॉस-वोटिंग के खतरे की चेतावनी दी।
  • BJP पहले ही 5 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है; NCP के उम्मीदवार की घोषणा बुधवार देर शाम अपेक्षित थी।

महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) द्वारा अंबादास दानवे को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन में दरारें साफ़ दिखने लगी हैं। कांग्रेस ने अब 12 मई को होने वाले इस चुनाव में अपना स्वतंत्र उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है, खासकर तब जब शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने 13 मई को अपना मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव न लड़ने का फैसला किया है।

कांग्रेस का रुख और हर्षवर्धन सपकाल की घोषणा

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने स्पष्ट किया है कि पार्टी विधान परिषद चुनाव में अपना उम्मीदवार ज़रूर उतारेगी। सपकाल ने शिवसेना (यूबीटी) द्वारा उद्धव ठाकरे की जगह अंबादास दानवे को प्रत्याशी बनाए जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही सपकाल और राज्य कांग्रेस विधानसभा दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने घोषणा की थी कि यदि उद्धव ठाकरे चुनाव लड़ते हैं तो कांग्रेस उनका समर्थन करेगी और अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।

उद्धव ठाकरे को MVA का 'निर्विवाद चेहरा' बताने वाले सपकाल अब नाराज़

हाल ही में हुई एक बैठक के बाद सपकाल ने उद्धव ठाकरे को महा विकास अघाड़ी का निर्विवाद चेहरा घोषित करते हुए कहा था कि गठबंधन तभी आगे बढ़ेगा जब ठाकरे इसका नेतृत्व करेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि ठाकरे का विधान परिषद में जाना पूरे गठबंधन के लिए खुशी की बात होगी। अब उद्धव के चुनाव से हटने और दानवे की उम्मीदवारी के बाद कांग्रेस का रुख पूरी तरह बदल गया है, जो MVA की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े करता है।

सीटों का गणित और चुनावी कोटा

9 सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में जीत के लिए 29 वोट का कोटा निर्धारित है। वर्तमान में MVA के पास कुल 46 विधायक हैं — शिवसेना (यूबीटी) के 20, कांग्रेस के 16 और एनसीपी (एसपी) के 10। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है। इस गणित के आधार पर MVA अधिकतम एक सीट जीतने की स्थिति में है, लेकिन यदि वोट बँटे तो वह भी खतरे में पड़ सकती है।

विपक्षी खेमे में तैयारियाँ

सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की ओर से भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहले ही 5 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) ने अभी तक अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने बुधवार सुबह उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की अध्यक्षता में कोर कमेटी की बैठक कर कुछ नामों को शॉर्टलिस्ट किया; बुधवार देर शाम तक NCP के उम्मीदवार की घोषणा की उम्मीद थी।

क्रॉस-वोटिंग का खतरा और आगे की राह

पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि कांग्रेस अपने रुख पर अडिग रहती है, तो शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) को क्रॉस-वोटिंग से बचाने के लिए अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखना होगा। यह ऐसे समय में आया है जब MVA पहले से ही नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों में भारी हार के बाद खुद को पुनर्गठित करने की कोशिश में है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के उम्मीदवार की घोषणा और MVA के भीतर बातचीत की दिशा यह तय करेगी कि गठबंधन इस संकट से कैसे उबरता है।

Point of View

बल्कि सुविधाजनक समझौतों पर टिका है। नवंबर 2024 की विधानसभा हार के बाद MVA के पुनर्गठन की कोशिशें पहले से ही कमज़ोर थीं; यह ताज़ा दरार उस प्रक्रिया को और पीछे धकेलती है। असली सवाल यह है कि क्या 46 विधायकों वाला गठबंधन बिना साझा उम्मीदवार के क्रॉस-वोटिंग रोक पाएगा — और यदि नहीं रोक पाया, तो इसकी राजनीतिक कीमत सबसे ज़्यादा कांग्रेस को चुकानी पड़ सकती है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव 2025 कब होगा?
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव 12 मई 2025 को निर्धारित है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है और कुल 9 सीटों के लिए मतदान होगा।
उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद चुनाव क्यों नहीं लड़ने का फैसला किया?
उद्धव ठाकरे का विधान परिषद में मौजूदा कार्यकाल 13 मई को समाप्त हो रहा है और उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। शिवसेना (यूबीटी) ने उनकी जगह पूर्व नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे को उम्मीदवार घोषित किया है।
कांग्रेस MVA उम्मीदवार का समर्थन करने की बजाय अपना प्रत्याशी क्यों उतार रही है?
कांग्रेस ने पहले कहा था कि वह उद्धव ठाकरे का समर्थन करेगी, लेकिन ठाकरे के हटने और अंबादास दानवे की उम्मीदवारी से MPCC अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल नाराज़ हैं। इसके बाद कांग्रेस ने स्वतंत्र उम्मीदवार उतारने का फैसला किया।
MVA गठबंधन के पास कितने विधायक हैं और क्या वे एक सीट जीत सकते हैं?
MVA के पास कुल 46 विधायक हैं — शिवसेना (यूबीटी) के 20, कांग्रेस के 16 और एनसीपी (एसपी) के 10। 9 सीटों के लिए जीत का कोटा 29 वोट है, इसलिए MVA गणित के आधार पर एक सीट जीत सकता है, लेकिन क्रॉस-वोटिंग का खतरा बना हुआ है।
क्रॉस-वोटिंग का MVA पर क्या असर पड़ सकता है?
पर्यवेक्षकों के अनुसार यदि कांग्रेस अलग उम्मीदवार उतारती है तो MVA के वोट बँट सकते हैं। शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) को अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखना होगा, अन्यथा गठबंधन अपनी संभावित सीट भी गँवा सकता है।
Nation Press