25 सितंबर 2026
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इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने आईआईटी दिल्ली में सुनाई भारत के अंतरिक्ष सफर की कहानी

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इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने आईआईटी दिल्ली में सुनाई भारत के अंतरिक्ष सफर की कहानी

सारांश

एक समय जिस देश को रॉकेट के लिए दुनिया से उपकरण माँगने पड़ते थे, आज वह दूसरे देशों के उपग्रह व्यावसायिक रूप से अंतरिक्ष में भेज रहा है। इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने आईआईटी दिल्ली में यह सफर बयान किया — चंद्रयान-3 से लेकर 2040 के चंद्र मानव मिशन तक।

मुख्य बातें

नारायणन ने 25 सितंबर 2026 को आईआईटी दिल्ली में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
भारत ने क्रायोजेनिक तकनीक देने से इनकार के बाद तीन स्वदेशी क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणालियाँ विकसित कीं।
23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 की सफलता के साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में उतरने वाला पहला देश बना।
भारत अंतरिक्ष में स्पेस डॉकिंग की क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन चुका है।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 तक और शेष मॉड्यूल 2035 तक प्रक्षेपित करने की योजना है।
भारत ने 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजने का लक्ष्य रखा है; चंद्रयान-4, चंद्रयान-5 और शुक्र मिशन भी प्रस्तावित हैं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने 25 सितंबर 2026 को आईआईटी दिल्ली में 'भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम: चुनौतियां और आगे की राह' विषय पर व्याख्यान देते हुए देश के अंतरिक्ष सफर की विस्तृत कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे एक समय उपकरणों के लिए दुनिया के दरवाज़े खटखटाने वाला भारत आज दूसरे देशों के उपग्रहों को व्यावसायिक आधार पर अंतरिक्ष में प्रक्षेपित कर रहा है।

शुरुआती चुनौतियाँ और तकनीकी आत्मनिर्भरता

डॉ. नारायणन ने बताया कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव वर्ष 1962 में रखी गई थी, जब देश खाद्य सुरक्षा और साक्षरता जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा था। नवंबर 1963 में थुंबा से भारत का पहला रॉकेट प्रक्षेपित किया गया और उस समय रॉकेट बनाने के लिए विभिन्न देशों से उपकरण जुटाने पड़े थे।

गौरतलब है कि 1990 के दशक की शुरुआत में कुछ देशों ने भारत को क्रायोजेनिक प्रणोदन तकनीक देने से मना कर दिया था। इस तकनीकी बहिष्कार को भारत ने चुनौती की तरह स्वीकार किया। डॉ. नारायणन ने कहा, 'जब दुनिया ने हमें यह तकनीक देने से इनकार कर दिया, तो हमने इसे खुद विकसित करने का फैसला किया। आज मैं आपको बता सकता हूँ कि हमने पूरी तरह अपने दम पर तीन क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणालियाँ विकसित की हैं।'

चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक उपलब्धि

इसरो अध्यक्ष ने 23 अगस्त 2023 को हुई चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का ऐतिहासिक अध्याय बताया। उन्होंने कहा, '23 अगस्त 2023 भारत के लिए ऐतिहासिक दिन था। चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाले पहले तीन देशों के बाद भारत चौथा देश बना और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बना।'

इसके अलावा डॉ. नारायणन ने बताया कि भारत अंतरिक्ष में दो यानों को सफलतापूर्वक जोड़ने — यानी स्पेस डॉकिंग — की क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश भी बन चुका है। चंद्रमा पर जल अणुओं की खोज और पहली ही कोशिश में मंगल की कक्षा में पहुँचने जैसी उपलब्धियाँ भी उन्होंने गिनाईं।

गगनयान से भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तक की योजनाएँ

भविष्य की योजनाओं की बात करते हुए डॉ. नारायणन ने बताया कि भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम फिलहाल अपनी पहली मानवरहित उड़ान की दिशा में काम कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को परियोजना की मंजूरी मिल चुकी है और इसे 2028 तक प्रक्षेपित करने की योजना है। 2035 तक स्टेशन के अन्य मॉड्यूल जोड़े जाने का लक्ष्य है।

चंद्रयान-4 का उद्देश्य चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाना है, जो भारत के चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम को एक नए चरण में ले जाएगा। इसके अतिरिक्त चंद्रयान-5 और शुक्र ग्रह के लिए भी मिशन प्रस्तावित हैं। भारत ने वर्ष 2040 तक चंद्रमा पर मानव को उतारने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका

यह व्याख्यान ऐसे समय में आया है जब भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ रही है और देश अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। डॉ. नारायणन के अनुसार तकनीकी आत्मनिर्भरता की यह यात्रा आने वाले दशक में और अधिक ऊँचाइयाँ छूने वाली है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दशकों की नीतिगत निरंतरता का परिणाम हैं। असली परीक्षा अब है: गगनयान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 का चंद्र मानव मिशन — ये सभी एक साथ क्रियान्वित करना बजट, मानव संसाधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की माँग करते हैं, जिन पर अभी तक पर्याप्त सार्वजनिक विमर्श नहीं हुआ है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने आईआईटी दिल्ली में क्या कहा?
डॉ. नारायणन ने 25 सितंबर 2026 को आईआईटी दिल्ली में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर चंद्रयान-3 की सफलता, स्पेस डॉकिंग और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजने के लक्ष्य सहित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और गगनयान मिशन का भी उल्लेख किया।
चंद्रयान-3 की सफलता क्यों ऐतिहासिक मानी जाती है?
23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग की, जिससे भारत चंद्रमा पर उतरने वाला चौथा देश और दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में उतरने वाला पहला देश बना। यह उपलब्धि भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करती है।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन कब तक तैयार होगा?
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को परियोजना की मंजूरी मिल चुकी है और इसे 2028 तक प्रक्षेपित करने की योजना है। इसके बाद 2035 तक अन्य मॉड्यूल जोड़कर स्टेशन को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
भारत ने क्रायोजेनिक तकनीक कैसे हासिल की?
1990 के दशक की शुरुआत में कुछ देशों ने भारत को क्रायोजेनिक प्रणोदन तकनीक देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद भारत ने स्वदेशी रूप से इस तकनीक को विकसित किया और आज तीन पूर्णतः स्वदेशी क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणालियाँ तैयार की जा चुकी हैं।
गगनयान मिशन और भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशन क्या हैं?
गगनयान के तहत भारत फिलहाल पहली मानवरहित उड़ान पर काम कर रहा है, जो देश की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता विकसित करेगी। आगे चंद्रयान-4 (चंद्रमा से नमूने लाना), चंद्रयान-5, शुक्र मिशन और 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजने जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएँ हैं।
राष्ट्र प्रेस
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