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तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस अहमदाबाद में: इसरो चीफ नारायणन बोले — चंद्रयान-3 ने दक्षिणी ध्रुव पर रचा इतिहास

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तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस अहमदाबाद में: इसरो चीफ नारायणन बोले — चंद्रयान-3 ने दक्षिणी ध्रुव पर रचा इतिहास

सारांश

चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट-लैंडिंग की दूसरी वर्षगाँठ पर अहमदाबाद ने पहली बार राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की मेज़बानी की। इसरो चीफ डॉ. नारायणन ने भारत को दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला दुनिया का पहला देश बताते हुए निजी क्षेत्र की भागीदारी से अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को कई गुना बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

मुख्य बातें

23 अगस्त 2025 को इसरो स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद में तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया गया — पहली बार अहमदाबाद में।
नारायणन ने कहा कि 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सॉफ्ट-लैंडिंग कर भारत को विश्व का पहला और एकमात्र देश बनाया।
इस वर्ष की थीम — 'नवाचार, सहयोग और वैश्विक नेतृत्व' — के साथ निजी क्षेत्र व स्टार्ट-अप्स की भागीदारी पर ज़ोर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि इसरो की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ी है और सैटेलाइट निर्माण व लॉन्च में लगने वाला समय घटा है।
गुजरात मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि राज्य में 2006 से विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग के तहत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सहित छह वर्टिकल सक्रिय हैं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद में 23 अगस्त 2025 को तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर इसरो चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और गुजरात सरकार के मंत्री अर्जुन मोढवाडिया उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि यह पहला अवसर था जब राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का आयोजन अहमदाबाद में हुआ — इससे पहले के दोनों कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित किए गए थे।

चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक उपलब्धि

इसरो चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने मीडिया से बातचीत में कहा, "23 अगस्त 2023 मदर इंडिया के लिए एक ऐतिहासिक दिन था। हमने चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सॉफ्ट-लैंड कराया और भारत दक्षिणी ध्रुव के पास सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला विश्व का एकमात्र और पहला देश बना।" उन्होंने बताया कि इसी उपलब्धि के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री ने 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित किया था।

इस वर्ष के आयोजन की थीम — 'नवाचार, सहयोग और अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व' — को डॉ. नारायणन ने अत्यंत सार्थक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सलाह पर यह कार्यक्रम अब दिल्ली तक सीमित न रखकर पूरे देश में ले जाया जा रहा है, ताकि अंतरिक्ष के लाभ आम नागरिक तक पहुँच सकें।

अंतरिक्ष इकोसिस्टम और निजी क्षेत्र की भागीदारी

डॉ. नारायणन ने अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के विस्तार पर ज़ोर देते हुए कहा कि सरकारी नीति के अनुरूप देश में अंतरिक्ष इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया, "इसरो हैंड-होल्ड करेगा, इन-स्पेस ऑथराइज़ करेगा, और हम स्टार्ट-अप्स, कंपनियों तथा निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष गतिविधियों में बड़े पैमाने पर भाग लेने में सक्षम बना रहे हैं, जिससे अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था कई गुना बढ़ेगी।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पेलोड, सैटेलाइट, लॉन्च व्हीकल और ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर — ये सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं और इनका समन्वित विकास ज़रूरी है।

जल सुरक्षा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि 140 करोड़ नागरिकों के देश के लिए अंतरिक्ष-आधारित जल प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय के साथ इसरो के सहयोग का भी उल्लेख किया और बताया कि भारत जल्द ही बड़े पैमाने पर डेटा जारी करके एक नया इतिहास रचेगा।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कार्यक्रम में कहा कि इसरो की कार्यक्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने मीडिया से कहा, "इसरो का काम का बोझ कम नहीं हुआ है, बल्कि काम करने की क्षमता कई गुना बढ़ गई है। अब सैटेलाइट बनाने, पेलोड विकसित करने या सैटेलाइट लॉन्च करने में लगने वाला समय कई गुना कम हो गया है।"

उन्होंने शिव शक्ति पॉइंट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत के कदम रखने की उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया और कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अंतरिक्ष विज्ञान के निजीकरण के माध्यम से भारत के लिए अपार संभावनाएँ खुल गई हैं।

गुजरात मंत्री अर्जुन मोढवाडिया का वक्तव्य

गुजरात सरकार के मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि इसरो, अहमदाबाद और डॉ. विक्रम साराभाई भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की आधारशिला हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात में 2006 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना की गई थी, जिसके अंतर्गत अब छह वर्टिकल हैं — जिनमें से एक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी है। उन्होंने यह भी कहा कि अहमदाबाद का स्पेस एप्लीकेशन सेंटर देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

आगे की राह

यह आयोजन इस बात का संकेत है कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब केवल सरकारी प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहेगा — निजी क्षेत्र, स्टार्ट-अप्स और आम नागरिक भी इस यात्रा के भागीदार बनेंगे। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद गगनयान मिशन और अन्य महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के साथ भारत वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में अपनी पहचान और मज़बूत करने की दिशा में अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और विक्रम साराभाई की धरती को प्रतीकात्मक रूप से केंद्र में रखना चाहता है। निजी क्षेत्र की भागीदारी की बात हर मंच पर होती है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि इन-स्पेस का नियामकीय ढाँचा कितनी तेज़ी से स्टार्ट-अप्स को व्यावसायिक लॉन्च तक पहुँचाता है। चंद्रयान-3 की सफलता गर्व का स्रोत है, किंतु गगनयान की समयसीमा और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के ठोस आँकड़े अभी भी जवाबदेही की माँग करते हैं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस क्यों मनाया जाता है और इसकी शुरुआत कब हुई?
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस प्रत्येक वर्ष 23 अगस्त को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 2023 में चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंडिंग की थी। प्रधानमंत्री ने उस उपलब्धि के बाद इस तिथि को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित किया था।
2025 का राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस अहमदाबाद में क्यों आयोजित हुआ?
इसरो चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर यह कार्यक्रम अब पूरे देश में ले जाया जा रहा है ताकि अंतरिक्ष के फायदे आम नागरिक तक पहुँचें। इससे पहले के दोनों आयोजन नई दिल्ली में हुए थे; 2025 में पहली बार अहमदाबाद के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर को मेज़बानी मिली।
चंद्रयान-3 की उपलब्धि क्या थी जो इसे ऐतिहासिक बनाती है?
चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट 'शिव शक्ति पॉइंट' पर सॉफ्ट-लैंडिंग की थी। इसरो चीफ के अनुसार, भारत दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंड करने वाला विश्व का एकमात्र और पहला देश है।
इसरो अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी कैसे बढ़ा रहा है?
इसरो चेयरमैन के अनुसार, इसरो हैंड-होल्डिंग करेगा और इन-स्पेस ऑथराइज़ेशन देगा, जिससे स्टार्ट-अप्स, कंपनियाँ और निजी क्षेत्र बड़े पैमाने पर अंतरिक्ष गतिविधियों में भाग ले सकें। इसका लक्ष्य भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को कई गुना बढ़ाना है।
गुजरात का अंतरिक्ष कार्यक्रम से क्या संबंध है?
अहमदाबाद भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का ऐतिहासिक केंद्र है, क्योंकि इसरो की स्थापना डॉ. विक्रम साराभाई ने यहीं से की थी। गुजरात मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के अनुसार, राज्य में 2006 से विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग के तहत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सहित छह वर्टिकल सक्रिय हैं।
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