पटना सैटेलाइट टाउनशिप भूमि अधिग्रहण: जदयू नेता श्याम रजक बोले — किसानों के भरोसे बिना विकास अधूरा
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने 25 अगस्त 2026 को पटना में सैटेलाइट टाउनशिप के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में निकाले गए किसानों के मार्च पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास परियोजना की सफलता के लिए किसानों का विश्वास और सहयोग अनिवार्य शर्त है।
भूमि अधिग्रहण पर जदयू की स्थिति
रजक ने कहा, 'मेरा मानना है कि सरकार ने जो फैसला लिया है, वह सही है या गलत, यह अलग बात है। लेकिन ज्यादा बेहतर होता अगर यह फैसला किसानों को भरोसे में लेकर लिया जाता।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण किसानों के मन में यह संशय बना हुआ है कि सरकार का यह कदम उनके हित में है या उनके विरुद्ध। उनके अनुसार, लोगों को इस विषय में स्पष्ट और पूरी जानकारी मिलनी चाहिए।
विकास और किसान अधिकारों का संतुलन
रजक ने स्पष्ट किया कि जनता विकास कार्यों का पूर्ण समर्थन करती है, किंतु इसके साथ-साथ किसानों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और उनकी संपत्ति पर मौलिक अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। उन्होंने कहा, 'किसानों के सहयोग से ही विकास का काम हो सकता है। विकास के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और उनकी संपत्ति की भी रक्षा होनी चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में बड़े बुनियादी ढाँचा प्रकल्पों के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान समुदाय में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर कड़ी आपत्ति
महाराष्ट्र में ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के प्रस्ताव पर रजक ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'सभी को भाषाई आजादी है और भाषा को लेकर किसी पर भी जबरदस्ती नहीं थोपी जा सकती। महाराष्ट्र में जिस तरह से यह बात कही गई है, वह बिल्कुल अनुचित है — इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए।' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मराठी भाषा का सम्मान होना चाहिए और महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों को मराठी सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना उचित है, परंतु मातृभाषा का अपमान या उसे किनारे करना किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब फैसले पर सतर्क टिप्पणी
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश पर — जिसमें हिजाब को स्कूल यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं माना गया — रजक ने न्यायिक मर्यादा का पालन करते हुए सीधी टिप्पणी से परहेज किया। उन्होंने कहा, 'हम कोर्ट के आदेश पर टिप्पणी नहीं कर सकते। हालांकि, यह उचित होगा कि ऐसे आदेश लोगों की धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए पारित किए जाएँ।'
न्यायपालिका में लंबित मामलों पर चिंता
रजक ने न्यायिक प्रणाली में मामलों के अत्यधिक लंबित रहने पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय से लेकर निचली अदालतों तक करोड़ों मामले लंबित हैं और न्याय की प्रतीक्षा में कई लोगों की मृत्यु तक हो जाती है। उनके अनुसार, 'अदालतों और जजों को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जो सालों से परेशान हैं और मामलों को जल्द से जल्द निपटाने पर ध्यान देना चाहिए। सिर्फ कुछ मुद्दों को ज्यादा प्राथमिकता देकर अलग तरह का माहौल बनाना सही नहीं लगता।' गौरतलब है कि न्यायिक सुधार और मामलों के त्वरित निपटारे की माँग लंबे समय से राजनीतिक और नागरिक समाज दोनों स्तरों पर उठती रही है।