मेटे फ्रेडरिक्सन का प्लास्टिक सर्जन को जवाब: 'नाक नहीं, ज़रूरी मुद्दों पर बात करें'
सारांश
मुख्य बातें
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने 25 अगस्त को इंस्टाग्राम पर एक प्लास्टिक सर्जन की अनचाही सलाह का करारा जवाब दिया, जिसमें उन्हें अपनी नाक पर मौजूद निशान को ठीक कराने का सुझाव दिया गया था। 48 वर्षीय फ्रेडरिक्सन ने स्पष्ट किया कि वह अपने शरीर और रूप-रंग से पूरी तरह संतुष्ट हैं और किसी पुरुष प्लास्टिक सर्जन की राय की उन्हें कोई आवश्यकता नहीं है।
क्या था पूरा मामला
एक प्लास्टिक सर्जन ने इंस्टाग्राम के ज़रिये फ्रेडरिक्सन को उनकी नाक पर मौजूद 'छोटे से निशान' को ठीक कराने की पेशकश की थी। प्रधानमंत्री ने सोमवार को उस संदेश का स्क्रीनशॉट अपनी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल पर साझा किया, हालाँकि उन्होंने सर्जन की पहचान सार्वजनिक नहीं की।
फ्रेडरिक्सन ने बताया कि पिछले कई वर्षों में उन्हें अपनी शक्ल-सूरत को लेकर लगातार टिप्पणियाँ और सलाहें मिलती रही हैं — कभी दाँतों पर, कभी बालों पर, तो कभी नाक के निशान पर। यहाँ तक कि उन्हें बोटॉक्स कराने का भी सुझाव दिया जा चुका है।
प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया
फ्रेडरिक्सन ने अपने पोस्ट में लिखा, 'मैं दूसरों के रूप-रंग को लेकर अपनी राय नहीं देती और मुझसे भी ऐसी ही अपेक्षा रखती हूँ। करीब 50 वर्ष की उम्र की एक महिला के रूप में मैं अपने शरीर को लेकर पूरी तरह सहज हूँ।'
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि वे उनसे संपर्क करना चाहते हैं तो बातचीत किसी अधिक महत्वपूर्ण विषय पर हो — 'उनकी नाक पर नहीं।'
महिला नेताओं पर टिप्पणी का व्यापक सवाल
फ्रेडरिक्सन ने इस प्रसंग को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को अक्सर उनके काम और नीतियों के बजाय रूप-रंग के आधार पर परखा जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में महिला राजनेताओं के प्रति ऑनलाइन उत्पीड़न की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
उन्होंने ऐसी टिप्पणियों से परेशान होने वाले लोगों के प्रति भी एकजुटता जताई और कहा कि हर व्यक्ति के शरीर में 'परफेक्ट इम्परफेक्शन' होते हैं, जो उन्हें खास बनाते हैं।
फ्रेडरिक्सन: राजनीतिक पहचान
मेटे फ्रेडरिक्सन 2019 से डेनमार्क की प्रधानमंत्री हैं और देश की दूसरी महिला प्रधानमंत्री हैं। वह यूक्रेन के समर्थन में अपने कड़े रुख और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर की गई टिप्पणियों के विरोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रही हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी महिला राष्ट्राध्यक्ष को उनकी उपस्थिति पर इस तरह की अवांछित सलाह का सामना करना पड़ा हो।
इस घटना ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में महिला नेतृत्व तथा सार्वजनिक जीवन में शारीरिक टिप्पणियों के मुद्दे पर चर्चा और तेज़ होने की संभावना है।