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दीया मिर्जा का स्पष्टीकरण: 'पितृसत्ता और जलवायु संकट' बयान पर बोलीं — निशाना व्यवस्था पर था, पुरुषों पर नहीं

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दीया मिर्जा का स्पष्टीकरण: 'पितृसत्ता और जलवायु संकट' बयान पर बोलीं — निशाना व्यवस्था पर था, पुरुषों पर नहीं

सारांश

दीया मिर्जा का पितृसत्ता और जलवायु परिवर्तन वाला बयान सोशल मीडिया पर तूफान ले आया। अब उन्होंने इंस्टाग्राम पर स्पष्ट किया — निशाना पुरुषों पर नहीं, उन व्यवस्थाओं पर था जो संसाधनों के दोहन को बढ़ावा देती हैं और देखभाल के मूल्यों को हाशिये पर रखती हैं।

मुख्य बातें

दीया मिर्जा ने 16 जून 2026 को इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर अपने विवादित बयान पर सफाई दी।
विवाद की शुरुआत सोहा अली खान के पॉडकास्ट 'ऑल अबाउट हर' में दिए बयान से हुई, जिसमें उन्होंने पितृसत्ता को जलवायु परिवर्तन की जड़ बताया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय व्यक्तिगत आरोप नहीं, बल्कि संरचनागत व्यवस्थाओं की आलोचना था।
पर्यावरण विशेषज्ञ आरती कुमार राव के साथ पॉडकास्ट में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई थी।
दीया मिर्जा ने रेखांकित किया कि महिलाएं और वंचित समुदाय जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सबसे पहले झेलते हैं, फिर भी नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी सीमित है।

अभिनेत्री और पर्यावरण कार्यकर्ता दीया मिर्जा ने 16 जून 2026 को इंस्टाग्राम पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए अपने उस बयान पर सफाई दी, जिसमें उन्होंने पितृसत्तात्मक व्यवस्था को जलवायु परिवर्तन की जड़ बताया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि उन संरचनागत व्यवस्थाओं की ओर ध्यान खींचना था जो पर्यावरण के दोहन को बढ़ावा देती हैं।

विवाद की शुरुआत कहाँ से हुई

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दीया मिर्जा ने अभिनेत्री सोहा अली खान के पॉडकास्ट 'ऑल अबाउट हर' में कहा कि पितृसत्ता ही जलवायु परिवर्तन की वजह है और पुरुषों ने इसे बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में जो उथल-पुथल मची है उसके लिए वे पूरी तरह जिम्मेदार हैं। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ आईं और कई उपयोगकर्ताओं ने इसे समस्त पुरुषों पर ढोल मढ़ने की कोशिश के रूप में देखा। देखते-देखते यह बयान ट्रोलिंग और व्यापक बहस का केंद्र बन गया।

दीया मिर्जा का स्पष्टीकरण

विवाद गहराने पर दीया मिर्जा ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'चूँकि इस विषय पर बहुत से लोग चर्चा कर रहे हैं, इसलिए इसे जितना सरल हो सके, उतना स्पष्ट करना ज़रूरी है। मैं अपने इस बयान पर कायम हूँ कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था ने जलवायु संकट को जन्म दिया है।' उन्होंने आगे लिखा कि जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि असमानता का भी संकट है। उनके अनुसार, 'सदियों से पितृसत्तात्मक व्यवस्थाओं ने सत्ता को कुछ हाथों में केंद्रित रखा, देखभाल और संरक्षण की बजाय संसाधनों के दोहन को प्राथमिकता दी, और प्रकृति को ऐसी चीज़ों के रूप में देखा जिनका उपयोग किया जा सकता है, न कि जिनकी रक्षा की जानी चाहिए।'

उन्होंने पॉडकास्ट में पर्यावरण विशेषज्ञ आरती कुमार राव के साथ की गई चर्चा का भी हवाला दिया और कहा कि उस एपिसोड में उन्होंने समझाया था कि शोषण और नियंत्रण पर आधारित आर्थिक ढाँचे किस तरह जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देते हैं।

महिलाओं और वंचित समुदायों पर असर

दीया मिर्जा ने अपनी पोस्ट में रेखांकित किया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव सबसे पहले महिलाओं और लड़कियों, खासकर कमजोर और वंचित समुदायों में रहने वाली, पर पड़ते हैं। उन्होंने लिखा कि पानी की कमी, भोजन की असुरक्षा, विस्थापन और आजीविका के नुकसान जैसी समस्याएँ सबसे पहले इन्हीं तबकों को प्रभावित करती हैं। इसके बावजूद पर्यावरण संबंधी नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी अत्यंत सीमित है।

व्यवस्था पर सवाल, न्याय की माँग

अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में ज़ोर देकर कहा कि जलवायु संकट से निपटने की बात करते समय न्याय की भी बात होनी चाहिए। उनके शब्दों में, 'हमें उन व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने होंगे जो लगातार संसाधनों के दोहन और अत्यधिक उपभोग को बढ़ावा देती हैं, जबकि देखभाल, सहयोग और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को कम महत्व देती हैं।' उन्होंने अंत में लिखा कि एक टिकाऊ भविष्य के लिए प्रभुत्व और नियंत्रण पर आधारित व्यवस्थाओं से आगे बढ़कर समानता, करुणा और हर जीवन के सम्मान पर आधारित व्यवस्था की ओर जाना होगा।

आगे क्या

दीया मिर्जा लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की सद्भावना दूत के रूप में पर्यावरण जागरूकता के लिए काम करती रही हैं। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन और लैंगिक असमानता को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस तेज़ हो रही है। उनकी इस सफाई के बाद बहस किस दिशा में जाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उस पर चर्चा की बजाय ट्रोलिंग हावी हो गई। असली सवाल यह है कि क्या भारत में जलवायु नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं — यह पहलू इस पूरी बहस में लगभग गायब रहा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीया मिर्जा का विवादित बयान क्या था?
दीया मिर्जा ने सोहा अली खान के पॉडकास्ट 'ऑल अबाउट हर' में कहा था कि पितृसत्ता ही जलवायु परिवर्तन की वजह है और पुरुषों ने इसे बढ़ावा दिया है। इस बयान को कई लोगों ने समस्त पुरुषों पर आरोप के रूप में देखा, जिससे सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई।
दीया मिर्जा ने अपने बयान पर सफाई क्यों दी?
सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना और ट्रोलिंग के बाद दीया मिर्जा ने 16 जून 2026 को इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि उनका आशय किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं था। उन्होंने कहा कि वे पितृसत्तात्मक व्यवस्थाओं की आलोचना कर रही थीं, न कि व्यक्तिगत रूप से पुरुषों को दोषी ठहरा रही थीं।
दीया मिर्जा पितृसत्ता और जलवायु परिवर्तन को कैसे जोड़ती हैं?
उनके अनुसार सदियों से पितृसत्तात्मक व्यवस्थाओं ने संसाधनों के दोहन को प्राथमिकता दी और प्रकृति को उपभोग की वस्तु माना। इन्हीं व्यवस्थाओं से बने आर्थिक ढाँचे जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देते हैं।
जलवायु परिवर्तन का महिलाओं पर क्या असर पड़ता है?
दीया मिर्जा के अनुसार महिलाएं और लड़कियाँ, खासकर वंचित समुदायों में, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव सबसे पहले झेलती हैं — पानी की कमी, भोजन की असुरक्षा, विस्थापन और आजीविका के नुकसान के रूप में। इसके बावजूद पर्यावरण नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी बेहद कम है।
दीया मिर्जा पर्यावरण के क्षेत्र में क्या काम करती हैं?
दीया मिर्जा लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की सद्भावना दूत के रूप में पर्यावरण जागरूकता के लिए सक्रिय हैं। वे जलवायु परिवर्तन, वन संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली पर नियमित रूप से अपनी राय सार्वजनिक मंचों पर रखती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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