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विश्व पर्यावरण दिवस 2026: दीया मिर्जा बोलीं — 'जो पर्यावरण के साथ हो रहा है, वही हमारे साथ भी'

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विश्व पर्यावरण दिवस 2026: दीया मिर्जा बोलीं — 'जो पर्यावरण के साथ हो रहा है, वही हमारे साथ भी'

सारांश

विश्व पर्यावरण दिवस पर दीया मिर्जा का संदेश महज़ एक सेलेब्रिटी बयान नहीं था — यह बीएमसी के क्लाइमेट बजट 2026-27 की पृष्ठभूमि में आया एक सामाजिक चेतावनी था। उनका सार: पर्यावरण का संकट हमारा अपना संकट है, और बदलाव व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी से शुरू होता है।

मुख्य बातें

दीया मिर्जा ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस पर मुंबई में बीएमसी के कार्यक्रम में शिरकत की।
बीएमसी ने इस अवसर पर क्लाइमेट बजट 2026-27 जारी किया।
दीया मिर्जा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, जीवनशैली और सामाजिक न्याय का भी संकट है।
उन्होंने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को बंद करने की विशेष अपील की।
उनका संदेश: 'जो पर्यावरण के साथ हो रहा है, वही हमारे साथ भी हो रहा है ' — व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी ज़रूरी है।

बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में स्पष्ट शब्दों में कहा कि जलवायु परिवर्तन अब महज पर्यावरण का सवाल नहीं रहा — यह सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य, जीवनशैली और सामाजिक न्याय से जुड़ चुका है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे छोटे-छोटे दैनिक बदलावों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।

बीएमसी के क्लाइमेट बजट कार्यक्रम में हुईं शामिल

बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के मौके पर अपना क्लाइमेट बजट 2026-27 जारी किया। इस कार्यक्रम में दीया मिर्जा विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा, 'कार्यक्रम के दौरान जलवायु परिवर्तन और उसके सामाजिक प्रभावों पर गहन चर्चा हुई। क्लाइमेट चेंज केवल मौसम का बदलाव नहीं है — इसका असर समाज के हर वर्ग पर पड़ता है। खासतौर पर कमज़ोर और संसाधनों की कमी से जूझ रहे लोगों पर इसका प्रभाव कहीं अधिक गहरा होता है।'

सामूहिक प्रयास की ज़रूरत पर ज़ोर

दीया मिर्जा ने इस बात पर बल दिया कि जलवायु संकट से अकेले सरकारें नहीं निपट सकतीं। उनके अनुसार, 'इस बड़ी चुनौती से पार पाने के लिए समाज, प्रशासन, उद्योग और आम नागरिकों को एकजुट होकर काम करना होगा। अगर हम वास्तव में अपने क्लाइमेट गोल्स हासिल करना चाहते हैं, तो सामूहिक प्रयास के अलावा कोई विकल्प नहीं है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत के कई बड़े शहर भीषण गर्मी और जल संकट से जूझ रहे हैं।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर जलवायु का असर

अभिनेत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर अब हर व्यक्ति रोज़ महसूस कर रहा है। 'बढ़ती गर्मी, पानी की कमी, खराब होती हवा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ अब हर शहर और हर परिवार की चिंता बन चुकी हैं। अब केवल चर्चा करने का नहीं, बल्कि समाधान अपनाने का समय है।' गौरतलब है कि भारत में वायु प्रदूषण और अनियमित मानसून की समस्याएँ पिछले एक दशक में काफी गहरी हुई हैं।

सिंगल-यूज़ प्लास्टिक छोड़ने की अपील

दीया मिर्जा ने कार्यक्रम में व्यावहारिक उपाय भी सुझाए। उन्होंने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल को बंद करने पर विशेष ज़ोर दिया। उनके शब्दों में, 'अगर लोग प्लास्टिक की बोतलों या सिंगल-यूज़ प्रोडक्ट्स का उपयोग कम करें, तो पर्यावरण पर इसका बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अगर मेरी इस आदत से हज़ारों प्लास्टिक की बोतलों को पर्यावरण में जाने से रोका जा सकता है, तो सोचिए करोड़ों लोगों के ऐसा करने से कितना बड़ा बदलाव आ सकता है। पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी से होती है — क्योंकि जो पर्यावरण के साथ हो रहा है, वही हमारे साथ भी हो रहा है।'

पर्यावरण की आवाज़ बनी दीया मिर्जा

दीया मिर्जा लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर सक्रिय रही हैं और संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम की सद्भावना दूत के रूप में भी काम कर चुकी हैं। उनकी यह अपील ऐसे वक्त में महत्त्वपूर्ण है जब बीएमसी जैसी नगर निकाय संस्थाएँ जलवायु बजट जैसे ठोस कदम उठा रही हैं। आने वाले महीनों में इस बजट के तहत शहरी हरियाली, जल प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बीएमसी का 'क्लाइमेट बजट' कागज़ पर कितना और ज़मीन पर कितना है — मुंबई जो हर मानसून में बाढ़ झेलती है, वहाँ जलवायु बजट की घोषणा और उसका क्रियान्वयन दो अलग-अलग कहानियाँ रही हैं। सेलेब्रिटी समर्थन जागरूकता बढ़ाता है, पर नागरिक दबाव और जवाबदेही तंत्र के बिना यह महज़ एक फोटो-ऑप बनकर रह जाता है। व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी ज़रूरी है, लेकिन संरचनागत बदलाव — उद्योगों पर नियंत्रण, शहरी नियोजन, सार्वजनिक परिवहन — उससे कहीं अधिक निर्णायक हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीया मिर्जा ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर क्या कहा?
दीया मिर्जा ने 5 जून 2026 को मुंबई में बीएमसी के क्लाइमेट बजट कार्यक्रम में कहा कि जलवायु परिवर्तन केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, जीवनशैली और सामाजिक न्याय का संकट है। उन्होंने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक छोड़ने और व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी अपनाने की अपील की।
बीएमसी का क्लाइमेट बजट 2026-27 क्या है?
बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर अपना क्लाइमेट बजट 2026-27 जारी किया, जो शहर में जलवायु संबंधी उपायों — जैसे शहरी हरियाली, जल प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण — के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता दर्शाता है।
जलवायु परिवर्तन का सबसे ज़्यादा असर किन लोगों पर पड़ता है?
दीया मिर्जा के अनुसार, जलवायु परिवर्तन का सबसे गहरा असर कमज़ोर और संसाधनों की कमी से जूझ रहे लोगों पर पड़ता है। बढ़ती गर्मी, पानी की कमी और वायु प्रदूषण जैसी समस्याएँ उन वर्गों को सबसे पहले प्रभावित करती हैं जिनके पास इनसे बचने के साधन नहीं हैं।
आम लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या कर सकते हैं?
दीया मिर्जा ने सुझाया कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक और प्लास्टिक बोतलों का उपयोग बंद करना एक प्रभावशाली शुरुआत है। उनका तर्क है कि करोड़ों लोग यदि ऐसे छोटे बदलाव अपनाएँ, तो पर्यावरण पर इसका सामूहिक असर बहुत बड़ा हो सकता है।
दीया मिर्जा पर्यावरण के क्षेत्र में क्यों जानी जाती हैं?
दीया मिर्जा लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण की सक्रिय समर्थक रही हैं और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की सद्भावना दूत के रूप में कार्य कर चुकी हैं। वे नियमित रूप से जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और टिकाऊ जीवनशैली पर जन-जागरूकता अभियानों में भाग लेती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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