डीआर कांगो का 180-दिवसीय इबोला रिस्पॉन्स प्लान लॉन्च, ₹10,900 करोड़ से अधिक की फंडिंग की माँग
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने 5 सितंबर 2026 को इबोला महामारी से निपटने के लिए एक अद्यतन 180-दिवसीय बहु-क्षेत्रीय रिस्पॉन्स प्लान औपचारिक रूप से जारी किया। इस योजना को पूरी तरह लागू करने के लिए 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर की अंतरराष्ट्रीय फंडिंग की माँग की गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) और अन्य साझेदारों के सहयोग से तैयार यह प्लान अगले छह महीनों के लिए एक ऑपरेशनल रोडमैप के रूप में काम करेगा।
मौजूदा स्थिति: आँकड़े और प्रसार
अफ्रीका के लिए WHO के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार, 2 सितंबर 2026 तक बुंडीबुग्यो वायरस के कारण फैले इस प्रकोप में 6,342 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और 3,072 मौतें हो चुकी हैं। यह प्रकोप डीआरसी के छह प्रांतों के 60 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक फैल चुका है। मई में आधिकारिक रूप से घोषित यह प्रकोप डीआरसी के इतिहास में अब तक का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला इबोला प्रकोप बन गया है।
सबसे बड़ी चिंता: समुदाय में हो रही मौतें
स्वास्थ्य अधिकारी इस बात से विशेष रूप से चिंतित हैं कि अधिकांश मौतें स्वास्थ्य केंद्रों से बाहर, सीधे समुदाय में हो रही हैं। कई मृतक ऐसे लोग हैं जिन्हें पहले संपर्क (contact) के रूप में चिह्नित नहीं किया गया था और जो उपचार तक पहुँचने से पहले ही दम तोड़ गए।
डीआरसी में WHO की कार्यकारी प्रतिनिधि ऐनी एंसिया ने कहा, 'हर मामला जो बहुत देर से पता चलता है, हर संपर्क जो छूट जाता है, और संसाधन जुटाने में हर देरी से जानें जाती हैं।'
सरकार और साझेदारों की प्रतिक्रिया
डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने स्पष्ट किया कि इस प्रकोप को रोकने के लिए केवल स्वास्थ्य क्षेत्र से परे जाकर — समुदाय, सरकारी एजेंसियों, सहयोगियों और दानकर्ताओं को मिलाकर — एक समन्वित प्रयास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार कांगो के हर नागरिक की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
डीआरसी में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर डेमियन मामा ने इबोला प्रतिक्रिया को व्यापक मानवीय कार्यों में शामिल करने और पर्याप्त, लचीली तथा अनुमानित फंडिंग की आवश्यकता पर जोर दिया।
Africa CDC की भूमिका और आगे की राह
Africa CDC ने राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अभियान को निरंतर समर्थन देने का वादा किया है, जिसमें संसाधन जुटाना, साझेदारों के बीच समन्वय और समुदाय की सक्रिय भागीदारी शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्वास्थ्य वित्तपोषण पर दबाव बढ़ रहा है और कई दाता देश अपने सहायता बजट में कटौती कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 180-दिवसीय योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि फंडिंग कितनी तेज़ी से और किस रूप में आती है — और क्या समुदाय-स्तरीय निगरानी तंत्र को पर्याप्त रूप से मज़बूत किया जा सकता है।