डीआरसी में इबोला का सबसे तेज़ प्रकोप: 3,442 संक्रमित, 1,521 मौतें, हर 20 दिन में दोगुने मामले
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का मौजूदा प्रकोप देश के इतिहास का सबसे तेज़ी से फैलने वाला संकट बन चुका है। 1 अगस्त 2026 तक 3,442 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है और 1,521 लोगों की जान जा चुकी है — यानी मृत्यु दर लगभग 45 प्रतिशत है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि मामले हर 20 दिन में दोगुने हो रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
कांगो सरकार ने इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई 2026 को की थी। तब से बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का यह वायरस देश में पहले आए सभी 16 इबोला प्रकोपों की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से फैला है। संक्रमण के मामले अब 2018-20 के उस बड़े प्रकोप के आँकड़ों के करीब पहुँच चुके हैं, जब 3,470 लोग संक्रमित हुए थे।
डीआरसी के जनसंपर्क विभाग की रिपोर्ट के अनुसार यह संक्रमण अब पूर्वी कांगो के पाँच प्रांतों तक फैल चुका है। इन क्षेत्रों में वर्षों से जारी हिंसा और असुरक्षा के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले से ही भारी दबाव है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र ने गुरुवार को कहा कि डीआरसी में बीमारी तेज़ी से फैल रही है और मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। संगठन इस स्थिति से निपटने में मदद कर रहा है, लेकिन उसने आगाह किया है कि यह महामारी पहले से ही गंभीर मानवीय संकट को और बदतर बना रही है। बुनिया और रवामपारा जैसे स्वास्थ्य क्षेत्रों में हर सप्ताह 100 से 150 नए संक्रमित सामने आ रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और राहत उपाय
संक्रमण की रफ्तार थामने के लिए कांगो सरकार ने निगरानी व्यवस्था को मज़बूत किया है, 20 से अधिक इबोला उपचार केंद्र स्थापित किए हैं और स्थानीय स्तर पर जाँच प्रयोगशालाएँ बनाई हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि इबोला के मामूली लक्षण दिखाई देने पर भी तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुँचें।
हाल ही में अपने यहाँ इबोला प्रकोप समाप्त होने की घोषणा करने वाले युगांडा ने भी कांगो की मदद के लिए विशेषज्ञों की टीम भेजी है। ये विशेषज्ञ विशेष रूप से सीमावर्ती टचोमिया और कासेनी क्षेत्रों में कांगो के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर संक्रमण रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
वैक्सीन परीक्षण की स्थिति
जुलाई 2026 की शुरुआत में बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ विकसित नई वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू हुआ है। इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई मानक इलाज उपलब्ध नहीं है। 15 जुलाई तक लगभग 20 स्वयंसेवकों को इस परीक्षण में शामिल किया जा चुका था। वैज्ञानिकों के अनुसार परीक्षण पूरा होने में लगभग चार महीने लग सकते हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संक्रमण की रफ्तार नहीं थमी, तो यह प्रकोप कांगो के इतिहास का सबसे भयावह इबोला संकट बन सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वी कांगो पहले से ही सशस्त्र संघर्ष, विस्थापन और कुपोषण की मार झेल रहा है — जो संक्रमण नियंत्रण को और कठिन बनाता है।