कांगो में इबोला का प्रकोप: पुष्ट मामले 689, मृतक 139; तीन प्रांतों के 29 स्वास्थ्य क्षेत्र प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है — स्वास्थ्य अधिकारियों की नवीनतम स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 689 हो गई है और 139 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह प्रकोप पूर्वी कांगो के तीन प्रांतों में फैला हुआ है और 15 मई 2026 को आधिकारिक रूप से घोषित किया गया था।
ताज़ा स्थिति और नए मामले
गुरुवार को एक ही दिन में 17 नए पुष्ट मामले सामने आए, जिनमें 5 मौतें शामिल हैं। ये सभी मामले पूर्वी प्रांत इटुरी में दर्ज किए गए। इसके अलावा, उसी तिथि तक 168 संदिग्ध मामले भी दर्ज हुए थे, जिनमें 64 लोगों की मौत हो चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) की गुरुवार को जारी रिपोर्ट में बताया गया कि इटुरी में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (IDP) के एक शिविर में इबोला से संबंधित दो मौतें दर्ज की गई हैं, जो इस प्रकोप के मानवीय संकट से गहरे जुड़ाव को उजागर करती है।
प्रभावित क्षेत्र और बुंडिबुग्यो स्ट्रेन की चुनौती
इस प्रकोप के लिए जिम्मेदार इबोला का बुंडिबुग्यो स्ट्रेन पूर्वी कांगो के तीन प्रांतों — इटुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू — के 29 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुका है। गौरतलब है कि बुंडिबुग्यो प्रजाति के इबोला के लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है, हालाँकि संभावित वैक्सीन और उपचारों के परीक्षण जारी हैं।
यह ऐसे समय में फैल रहा है जब मई 2026 में DRC और युगांडा दोनों में इबोला प्रकोप की एक साथ पुष्टि हुई थी, जिससे सीमापार संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है।
परिचालन चुनौतियाँ और वित्तीय संकट
स्वास्थ्य अधिकारियों की रिपोर्ट में कई गंभीर बाधाओं का उल्लेख किया गया है। मृत्यु के बाद नमूना परीक्षण (पोस्ट-मॉर्टम स्वैबिंग) कराने में लोगों की अनिच्छा, इबोला उपचार केंद्रों की सीमित क्षमता, नॉर्थ किवू में संक्रमण रोकथाम सामग्री की कमी, और तीनों प्रांतों में निगरानी रिपोर्टिंग प्रणाली की कमजोरी — ये सभी प्रतिक्रिया को बाधित कर रहे हैं।
इन सबके अलावा, रिपोर्ट में 2.15 करोड़ डॉलर (लगभग $21.5 मिलियन) की वित्तीय कमी का उल्लेख है, जो राहत एवं नियंत्रण प्रयासों पर सीधा असर डाल रही है।
क्षेत्रीय संकट और मानवीय परिस्थितियाँ
यह प्रकोप ऐसे क्षेत्र में फैल रहा है जो पहले से ही मानवीय संकट, असुरक्षा, दूरस्थ एवं घनी आबादी वाले इलाकों और लोगों व व्यापारिक गतिविधियों की अधिक आवाजाही जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। इन परिस्थितियों में संक्रमण की श्रृंखला तोड़ना स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अत्यंत कठिन साबित हो रहा है।
इबोला का इतिहास और यह 17वाँ प्रकोप
इबोला रोग पहली बार 1976 में दो अलग-अलग प्रकोपों के रूप में सामने आया था — एक वर्तमान दक्षिण सूडान के नज़ारा क्षेत्र में, और दूसरा वर्तमान DRC के यामबुकु क्षेत्र में। दूसरा प्रकोप इबोला नदी के निकट एक गाँव में हुआ था, और इसी नदी के नाम पर इस बीमारी का नाम पड़ा। वर्तमान प्रकोप इस देश में इबोला का 17वाँ प्रकोप है। आने वाले हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों की प्रतिक्रिया और वित्तीय सहायता की गति यह तय करेगी कि यह प्रकोप किस दिशा में जाता है।